खुशखबर: गोरखपुर समेत तीन जिलों में मिलेगी सेंसर युक्त टेलीमेडिसिन सेवा, 60 हजार परिवारों को मिलेगी सुविधा
गोरखपुर विश्वविद्यालय ने सेवा का शुभारंभ किया। इस पायलट प्राजेक्ट के रूप में 60 हजार परिवारों को सुविधा मिलेगी।
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने सामाजिक सरोकारों के दायित्व को निभाते हुए ग्रामीण अंचल की महिलाओं और बच्चों के इलाज के लिए सेंसर आधारित डायनोस्टिक टेलीमेडिसिन सेवा की शुरूआत कर दी है। पायलट प्रोजेक्ट रूप में इसका क्रियान्वयन गोरखपुर, वाराणसी और मणिपुर के कामजोंग में होगा। इस सुविधा से 60 हजार परिवारों को लाभ मिलेगा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय, प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद (टीआईएफएसी), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार का एक स्वायत्त निकाय छह महीने में डाटा तैयार कर लेगा। इस योजना के तहत इलेक्ट्रो कार्डियोग्राफिक टेस्ट (हार्ट चेकअप), बीपी, शुगर, शरीर का तापमान, खून की जांच लिपिड प्रोफाइल, हीमोग्लोबिन, मां और बच्चे की देखभाल (भ्रूण डॉपलर) आदि जैसे स्वास्थ्य मानकों पर डेटा बनाया जाएगा।
ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा डेटा
इसके अंतर्गत व्यक्ति के स्वास्थ्य संबंधी डेटा को ऑनलाइन रखा जाएगा। इसे क्लाउड पर सहेजा जाएगा। जब भी डॉक्टर की आवश्यकता पड़ेगी, इसका उपयोग किया जा सकेगा। दिल्ली और अन्य जगहों पर बैठे प्रतिष्ठित डॉक्टरों का एक पैनल भी गठित किया गया है। यह पैनल एकत्रित आंकड़ों व सलाह का आकलन करने करेगा।
60 हजार परिवारों को मिलेगा लाभ
परियोजना के तहत पहले चरण में गोरखपुर, वाराणसी और मणिपुर के कामजोंग में 20-20 हजार परिवारों का डाटा एकत्र करने लक्ष्य है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाली वंचित महिलाओं और बच्चों को सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल प्रदान करना है। यह विशेष परियोजना मणिपुर के तीन जिलों गोरखपुर, वाराणसी और कामजोंग के लिए नमूना आधार पर स्वीकृत की गई है।