सीबीएसई: पांच अक्तूबर तक नहीं कराया पंजीकरण तो खराब हो जाएगा एक साल
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संचालित होने वाले विद्यालयों में नौंवी से बारहवीं के विद्यार्थियों को पांच अक्टूबर तक तो पहली से आठवीं के विद्यार्थियों को एक अक्टूबर तक पंजीकरण हर हाल में करा लेना है। इसके बाद बोर्ड किसी भी विद्यार्थी का पंजीकरण स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में विद्यार्थियों का साल बर्बाद होना तय है।
कोरोना संकट की वजह से मार्च से ही स्कूल बंद हैं। शासन के निर्देश पर निजी स्कूल संचालकों की ओर से ऑनलाइन क्लास का संचालन किया जा रहा है। इस दौरान अभिभावकों से केवल मासिक फीस ही जमा कराई जा रही है।
शुल्क में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके बावजूद स्कूलों में विद्यार्थियों का नामांकन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ है। बच्चे बिना नामांकन के ही ऑनलाइन क्लास में शामिल हो रहे हैं। स्कूल प्रबंधन के पास भी इसका ब्योरा नहीं है कि उनके स्कूल में इस वर्ष कितने बच्चों का नामांकन हुआ है।
जबकि, बोर्ड की ओर से कक्षा 1-8 में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के ऑनलाइन एफिलिएटेड स्कूल इनफार्मेशन सिस्टम (ओएएसएस) और यू डायस पोर्टल पर बच्चों की संख्या, स्कूल में मौजूद संसाधनों के साथ कार्यरत शिक्षकों की सूची मांगी जा रही है। इसके लिए बोर्ड ने एक अक्तूबर तक की समय सीमा निर्धारित की है।
नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों की बढ़ेगी फजीहत
कक्षा नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों के पंजीकरण के लिए पांच अक्तूबर तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। ऐसे में गोरखपुर स्कूल एसोसिएशन की ओर से विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइट्स और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अभिभावकों से अपील की जा रही है कि वह तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण करा लें।
नौवीं और ग्यारहवीं में पंजीकरण के आधार पर ही विद्यार्थियों को दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में शामिल होने का मौका दिया जाता है। अगर दसवीं या बारहवीं में पढ़ने वाला कोई विद्यार्थी इस वर्ष परीक्षा नहीं देता है तो अगले साल वापस उसे नौवीं या ग्यारहवीं में प्रवेश लेना होगा। यानी उसके तीन साल बर्बाद हो जाएंगे।
गोरखपुर स्कूल एसोसिएशन मंत्री हेमंत मिश्रा ने बताया कि सीबीएसई से संचालित स्कूलों को अपने यहां नामांकित विद्यार्थियों की सूचना हर वर्ष बोर्ड को उपलब्ध करानी होती है। कोविड की वजह से नामांकन की संख्या में पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी गिरावट आई है। एक बार बोर्ड को नामांकित छात्रों की जानकारी देने के बाद उससे अधिक बच्चों को स्कूल में रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में बच्चों का साल बर्बाद होगा।