फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   case pending for one year resolved in one hour On initiative of Municipal Commissioner

गोरखपुर: एक घंटे में निस्तारित हुआ एक साल से लंबित नामांतरण प्रकरण, प्रमाणपत्र मिलते ही खुशी से झूम उठे दिव्यांग महेंद्र

Sat, 11 Sep 2021 01:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 11 Sep 2021 01:25 PM IST
सार

नगर आयुक्त की पहल पर लगातार हो रहा है लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण।

विज्ञापन
case pending for one year resolved in one hour On initiative of Municipal Commissioner
महेंद्र अग्रवाल को मकान का नामांतरण प्रमाणपत्र देते नगर आयुक्त। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में पिता की मौत के बाद मकान के नामांतरण के लिए एक साल से नगर निगम का चक्कर काट रहे दिव्यांग महेंद्र कुमार अग्रवाल के लिए शुक्रवार सुकून का दिन साबित हुआ। नगर आयुक्त अविनाश सिंह के निर्देशन में एक साल से लंबित मामला एक घंटे में निपट गया। प्रमाणपत्र मिलने के बाद महेंद्र के चेहरे पर मुस्कान छलक उठी और उन्होंने इसके लिए नगर आयुक्त को धन्यवाद दिया। नियमानुसार, दिव्यांग महेंद्र का टैक्स भी माफ कर दिया गया।
विज्ञापन


कूड़ाघाट निवासी एवं पूरी तरह से दिव्यांग महेंद्र कुमार अग्रवाल के पिता की मृत्यु 2005 में हो गई थी। पांच बहनों और माता द्वारा नोटरी शपथ पत्र के आधार पर महेंद्र ने नगर निगम में मकान के नामांतरण का प्रार्थना पत्र पिछले वर्ष ही दिया था। इसके बाद से वह लगातार नगर निगम के विभिन्न विभागों में चक्कर लगाते रहे। शुक्रवार को महेंद्र शाम करीब 4:15 बजे नगर आयुक्त के पास पहुंचे और अपनी व्यथा बताई। नगर आयुक्त ने उन्हें अपने चेंबर में ही बैठाया और जोनल अधिकारी मणिभूषण तिवारी को बुलाकर तत्काल प्रकरण को निस्तारित करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन


इसके बाद आननफानन पत्रावलियां ढूंढ़ी गईं और करीब 5:15 तक मकान का नामांतरण महेंद्र कुमार अग्रवाल के नाम हो गया। एक साल की दौड़भाग के बाद मात्र एक घंटे में निपट जाने को महेंद्र सहजता से स्वीकार ही नहीं कर पा रहे थे। खुशी में आंखें छलक पड़ीं और नगर आयुक्त से बोले-थैंक यू सर। प्रमाणपत्र देने के दौरान नगर आयुक्त के अलावा उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला, लेखाधिकारी गिरिजेश बहादुर पाल, चीफ इंजीनियर सुरेश चंद, कर्नल सीपी सिंह मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं ?

जिस तरह से लोगों के काम हो रहे हैं, उसके लिए नगर आयुक्त साधुवाद के पात्र हैं, मगर यहीं एक सवाल भी उठता है कि क्या यही सिस्टम है?  यानि जो लोग नगर आयुक्त से मिल लेंगे, उनके काम तत्काल हो जाएंगे और जो नहीं मिल सकेंगे, वे धक्के खाते रहेंगे। जानकार कहते हैं कि इसके लिए एक प्रभावी सिस्टम बनाने की जरूरत है। जब साबित हो गया कि पीड़ित को परेशान किया गया तो संबंधित कर्मचारी को चिह्नित कर दंड भी दिया जाना चाहिए, ताकि ऐसे कर्मियों में खौफ हो। दंड मिसाल बने और और कर्मी अपने पटल का काम ईमानदारी से समय से करें। मतलब, ऐसा सिस्टम जो संवेदनशील और जवाबदेह हो तभी इस नेकनीयती का फायदा होगा, वरना नगर निगम के खराब प्रवृत्ति के जो भी कर्मचारी होंगे वे छोटे-छोटे काम के लिए आम आदमी को भूलभुलैया में भटकाने और सांप-सीढ़ी खिलाने से बाज नहीं आएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed