गोरखपुर: 14 साल की नाबालिक बनी मां, छुपाने के लिए परिजनों ने बकरियों का लिया सहारा
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चर्चा तो यहां तक है कि पुलिस ही मामले को रफा दफा करना चाहती है। बड़ा सवाल यह है कि केस दर्ज करने के बाद पुलिस को अभी तक आरोपित नहीं मिल सके और उधर गांव का हर शख्स खुलकर नाम लेता है। खुद पंचनामा में गवाह बने लोग ही आरोपित का नाम जानते और बताते भी है। असल में पुलिस इस पूरे प्रकरण में सिर्फ टालमटोल ही कर रही है क्योंकि मामला एक भाजपा नेता से जुड़ा है। गांव के एक शख्स के मुताबिक सभी लोग उस परिवार को जानते हैं जिसके साथ घटना हुई और जो इस घटना में शामिल है। केस दर्ज होने के बाद से ही आरोपित पैरवी कराकर येन-केन-प्रकरेण मामले को दबाना चाहते हैं। पुलिस भी जांच के नाम पर देरी कर रही है।
बकरी की आवाज के बीच कराया गया था प्रसव
जिस दिन नाबालिग मां बनी थी, उस दिन आसपास के लोगों को इसकी खबर लग गई थी। मगर छिपाने के लिए परिवार वाले कई बकरियों को घर के बाहर लाए और उसे बार बार मारते थे ताकि वह चीखे और बकरी के आवाज में नाबालिग की प्रसव पीड़ा को छिपाया जा सके। प्रसव के कुछ दिन बाद ही नाबालिग मां को हटा दिया गया।
लड़की के घर में ही मारा गया था नवजात
आसपास के लोग जानते थे बच्चे को रिश्तेदारी में भेजा
आसपास के लोगों को यह भनक थी कि बच्चे को मारा नहीं गया है, जो चंद लोग मारने की बात कह रहे थे उनकी आवाज भी दबा दी गई थी। करीब एक हफ्ते बाद जानवरों ने जब शव को बाहर खींचा तभी इसकी जानकारी गांव वालों को हुई। तब सभी को पता चला कि नवजात को मार दिया गया था।
कहीं भाजपा नेता के दबाव में तो नहीं बदली गई विवेचना
चर्चा तो यहां तक है कि एक भाजपा नेता के दबाव में पुलिस ने सोची समझी साजिश के तहत विवेचना को पीपीगंज से बदलकर कैंपियरगंज के हवाले कर दिया है। जबकि पीपीगंज पुलिस ने शुरुआती जांच में बिना केस दर्ज हुए ही यहां तक बता दिया था कि एक नाबालिग का ही वह बच्चा है यानी पीपीगंज पुलिस तह तक पहुंच सकती है लेकिन उसको पहुंचने ही नहीं दिया गया है। अब मामले को रफा दफा करने की कोशिश की जा रही है।
अब तक सिर्फ मौका मुआयना ही कर सकी है पुलिस
घटना की विवेचना छह फरवरी को कैंपियरगंज थाने पहुंच गई थी। इन दिनों के बीच में पुलिस सिर्फ एक दिन मौका मुआयना करने का ही काम कर सकी है। ना तो पुलिस ने उन पंचनामा के गवाहों से बातचीत की और ना ही उस संदिग्ध किशोरी से जिसके ऊपर सारा आरोप है। हालांकि एसओ कैंपियरगंज निर्भय नारायण सिंह ने बताया कि विवेचना जारी है। मौका मुआयना किया गया है। व्यस्तता होने की वजह से अभी दोबारा नहीं जा पाए है, जल्द ही जांच पूरी की जाएगी।
आरोपित नहीं तो पैरवी क्यों?
नाबालिग से संबंध रखने वाला शख्स हर उस दरवाजे तक पहुंच चुका है जहां से उसे मदद की उम्मीद है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि यदि वह आरोपित नहीं है तो फिर केस को रफा दफा करने की पैरवी क्यों करवा रहा है?
यह हुआ था
31 जनवरी को पीपीगंज इलाके में नवजात का शव मिला था। घटना के 72 घंटे बाद तीन फरवरी को पोस्टमार्टम हुआ था जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या और पैदाइश छिपाने की धाराओं में केस दर्ज किया था। इसके बाद विवेचना को निष्पक्ष करने के नाम पर कैंपियरगंज थानेदार को फाइल भेज दी गई। हालांकि पुलिस इस मामले में केस दर्ज करने में भी आनाकानी कर रही थी। बाद में सीओ कैंपियरगंज के आदेश पर पुलिस ने इस प्रकरण में केस दर्ज किया था।