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आर्थिक तंगी का खामियाजा: बिजली गुल तो बीएसएनएल के नेटवर्क पर हाय-हैलो बंद, उपभोक्ता परेशान

Thu, 05 May 2022 01:31 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 05 May 2022 01:31 PM IST
सार

गोरखपुर और महराजगंज जिलों में बीएसएनएल ने 273 टावर लगाए हैं। गोरखपुर-महाराजगंज जिलों में 2.75 लाख ग्राहक बीएसएनएल के हैं। मोबाइल टावर को संचालित करने के लिए कंपनी डीजल, बैट्री भी नहीं खरीद पा रही।

 

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BSNL Mobile phone consumers facing problem for Network
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

बिजली गुल होते ही गोरखपुर-महाराजगंज के करीब 2.75 लाख बीएसएनएल के ग्राहकों के मोबाइल फोन का नेटवर्क भी गायब हो जाता है। इतनी देर न कॉल आती है, न जाती है, न नेट चलता है। यह सब इसलिए होता है, क्योंकि बीएसएनएल अपने टावर को संचालित करने के लिए जनरेटर या बैट्री की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। कंपनी की आर्थिक तंगी का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। परेशान होकर अधिकतर ग्राहक निजी कंपनियों की ओर रुख करने लगे हैं।

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जानकारी के मुताबिक, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने गोरखपुर और महाराजगंज जिले में 273 टावर लगाए हैं। इनमें बीटीएस लगाकर क्षेत्र में नेटवर्क का विस्तार भी किया था। टावरों के संचालन के लिए बिजली कनेक्शन के साथ जेनरेटर और बैटरी की व्यवस्था की गई थी। आर्थिक तंगी से गुजर रही संचार कंपनी बिजली गुल होने पर मोबाइल टावरों को संचालित करने के लिए जरूरी जनरेटर को चलाने के लिए डीजल की खरीद नहीं कर पा रही है।
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कंपनी के पास बैटरी भी नहीं है। ऐसे में बिजली गायब होते ही मोबाइल टावर काम करना बंद कर देते हैं। इससे मोबाइल उपभोक्ताओं का नेटवर्क गायब हो जाता है। इससे कंपनी की सेवा प्रभावित हो रही है। इस वजह से अधिकतर उपभोक्ता कंपनी का दामन छोड़कर दूसरी कंपनियों की सेवा लेने लग गए हैं।
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बीएसएनएल के प्रधान महाप्रबंधक विद्यानंद ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है। तेज हवा चलने पर बिजली निगम कटौती कर देता है। ऐसे में बीटीएस का टावर बंद हो जाता। इसे चलाने के लिए जनरेटर नहीं चल पाता है। अतिरिक्त फंड नहीं होने की वजह से डीजल की खरीद नहीं हो पाती है। बैटरी भी निगम के पास नहीं है। इस वजह से उपभोक्ताओं का नेटवर्क गायब हो जाता है।   

अधिक प्रभावित इलाके
सहजनवां, कौड़ीराम, गोला, खजनी, बांसगांव, सरदारनगर, कैंपियरगंज, पिपराइच, पीपीगंज, चौरीचौरा, पनियरा, निचलौल, ठूठीबारी, सिकरीगंज, बड़हलगंज समेत अन्य ग्रामीण इलाके।  

टावरों की स्थिति

  • कुल टावरों की संख्या : 425
  • बीएसएनएल के टावर - 273
  • प्राइवेट कंपनियों के टावर - 152

 
बैटरियां हो गईं खराब
बीएसएनएल ने अपने टावरों में विकल्प के रूप में बैटरी रखी थी। बिजली से चार्ज होने के बाद जरूरत पड़ने पर इनसे बैकअप लिया जाता था। लेकिन, सालों से बैटरी की मरम्मत नहीं होने से लगभग सभी बैट्रियां खराब हो गई हैं। कुछ जो सही हैं, उनसे थोड़ी देर तक ही बैकअप मिल पाता है।

निजी कंपनियों का कैसे करें मुकाबला
बीएसएनएल के पास बैटरी और डीजल के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। इसके बावजूद निजी टेलीकॉम कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी है। निजी संचार कंपनियां 4जी नेटवर्क के साथ बाजार में हैं, जबकि बीएसएनएल 3जी सेवा उपलब्ध करा पा रहा है। ऐसे में बीएसएनएल निजी संचार कंपनियों का कैसे मुकाबला कर सकता है यह बड़ा सवाल है।

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