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Railways: NER में इतिहास का हिस्सा बन गए अंग्रेजों के जमाने के रेल सिग्नल, धरोहर के रूप में किया गया संरक्षित
Wed, 31 May 2023 02:47 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 31 May 2023 02:47 PM IST
सार
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे पूरी तरह आधुनिकीकरण की दिशा में अग्रसर है। बड़ी लाइन के सभी रेलवे स्टेशनों पर कलर लाइट सिग्नल लगाए जा चुके हैं। पुराने सेमाफोर सिग्नल अब अतीत हो चुके हैं।
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सेमा-फोर सिग्नल
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पूर्वोत्तर रेलवे में अंग्रेजों के जमाने में लगा रेल सिग्नल सेमा-फोर अब इतिहास का हिस्सा बन गए हैं। बड़ी लाइन पर अब उनकी जगह सभी स्टेशनों पर आधुनिक तकनीक वाले कलर सिग्नल लगा दिए गए हैं।
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सेमा-फोर सिग्नल पूरी तरह मैकेनिकल हैं। इन्हें संचालित करने के लिए हर सिग्नल पर एक रेलकर्मी की तैनाती होती है। प्वाइंट बनाने के बाद रेलकर्मी सिग्नल देता है। इसमें तार के टूटने की आशंका बनी रहती है। इसके चलते कभी-कभी ट्रेनों को रोकना पड़ जाता है। वहीं, मैकेनिकल सिग्नल की दृश्यता कम होने के चलते ड्राइवर को ट्रेन की गति धीमी करनी पड़ती है।
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वहीं, अब लगाए गए कलर सिग्नल पूरी तरह से ऑनलाइन हैं। इसके लिए रेल की पटरियों के पास केबल बिछाई जाती है। जो यार्ड के दोनों ओर लगे सिग्नल से जुड़ी होती है। कलर सिग्नल एक किमी से ज्यादा दूर से ही ड्राइवर को नजर आने लगता है। जिसके हिसाब से वह ट्रेन की गति बढ़ाता और घटाता है।
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पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे पूरी तरह आधुनिकीकरण की दिशा में अग्रसर है। बड़ी लाइन के सभी रेलवे स्टेशनों पर कलर लाइट सिग्नल लगाए जा चुके हैं। पुराने सेमाफोर सिग्नल अब अतीत हो चुके हैं। इन्हें देखने के लिए मीटर गेज खंड में जाना पड़ेगा। सेमा-फोर सिग्नल को धरोहर के रूप में रेल म्यूजियम में भी संरक्षित किया गया है।
एनईआर एक नजर में
कुल रूट : 3470.9 किमी
बड़ी लाइन : 3188.75 किमी
छोटी लाइन : 282 किमी
कुल स्टेशन : 500