Gorakhpur: बीआरडी बना हेपेटाइटिस-बी और सी जांच का नोडल, गोरखपुर-बस्ती मंडल के डॉक्टरों को दी गई ट्रेनिंग
स्क्रीनिंग सहित अन्य जानकारी के लिए गोरखपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर जिले के डॉक्टरों को ट्रेनिंग भी दी गई है। हेपेटाइटिस को नेशनल हेपेटाइटिस कंट्रोल कार्यक्रम के तहत जोड़ दिया गया है। इसमें मरीजों की निशुल्क जांच के साथ दवाएं भी दी जाएंगी। इसी कड़ी में यह शुरुआत की गई है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज को हेपेटाइटिस-बी और सी जांच के लिए सात जिलों का नोडल बनाया गया है। बीआरडी का माइक्रोबायोलॉजी विभाग गोरखपुर और बस्ती मंडल के हेपेटाइटिस मरीजों की जांच करेगा। जांच में वायरल लोड अधिक मिलने पर उनका इलाज मेडिसिन विभाग करेगा।
शासन के निर्देश के बाद बीआरडी के डॉक्टरों ने गोरखपुर और बस्ती मंडल के डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि बीआरडी ने हेपेटाइटिस मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। हर दिन 10 से 12 सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। अब तक करीब 400 मरीजों की जांच की गई है। इनमें 350 मरीजों में वायरल का लोड अधिक मिला है। इनमें सबसे अधिक हेपेटाइटिस बी के मरीज मिले हैं। इन मरीजों का इलाज मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की टीम कर रही है।
उन्होंने बताया कि स्क्रीनिंग सहित अन्य जानकारी के लिए गोरखपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर जिले के डॉक्टरों को ट्रेनिंग भी दी गई है। हेपेटाइटिस को नेशनल हेपेटाइटिस कंट्रोल कार्यक्रम के तहत जोड़ दिया गया है। इसमें मरीजों की निशुल्क जांच के साथ दवाएं भी दी जाएंगी। इसी कड़ी में यह शुरुआत की गई है।
उन्होंने बताया कि यह बीमारी बेहद खतरनाक होती है। एक बार हेपेटाइटिस किसी को हो जाता है तो वह आजीवन रहता है। इसलिए इससे बचाव बेहद जरूरी है। हेपेटाइटिस बी और सी दोनों के वायरस खतरनाक होते हैं। शरीर में एक भी वायरस अगर चला जाता है और समय से इलाज न हो तो तेजी से वायरस पनपते हैं और गंभीर बीमारियां हो जाती हैं।
बीआरडी और जिला अस्पताल में चलेगी ओपीडी
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस मरीजों की जांच और उनके इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन और जिला अस्पताल में अलग से ओपीडी चलाने की योजना है। इसमें हेपेटाइटिस मरीजों की जांच से लेकर उनकी दवाइयों तक की जानकारी दी जाएगी। मरीजों को बताया जाएगा कि वायरल का लोड कितना है और बचाव के उपाय क्या है।
हेपेटाइटिस बी और सी से लिवर कैंसर का खतरा
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस बी औ सी दोनों ही खतरनाक होते हैं। सी वायरस का लक्षण मरीजों को काफी दिनों बाद पता चलता है। जबकि, बी का लक्षण आसानी से पता चल जाता है। दोनों ही वायरस से लिवर कैंसर का खतरा रहता है। इसलिए समय पर जांच और इलाज दोनों जरूरी है। बताया कि शरीर में एक भी वायरस खतरनाक है। जांच में यह पता किया जाता है कि वायरस का लोड कितना है।
हेपेटाइटिस बी के लक्षण
गाढ़ा पेशाब, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, थकान, बुखार, भूख में कमी, कमजोरी, पेट में दर्द, आंखों और त्वचा के सफेद हिस्से का पीला पड़ना (पीलिया) लक्षण हैं।
हेपेटाइटिस सी के लक्षण
गाढ़ा पेशाब, कमजोरी, मिचली, उल्टी, पेट में दर्द, भूख में कमी आदि लक्षण हैं।