भाजपा सांसद-विधायकों ने पीडब्ल्यूडी के इस एप के खिलाफ खोला मोर्चा, कहा- '90 प्रतिशत ठेकेदार हो जाएंगे बेरोजगार'
- 17 जनप्रतिनिधियों ने सीएम को लिखा पत्र
- बड़े ठेकेदारों के वर्चस्व से कार्य की गुणवत्ता होगी प्रभावित, एप पर तत्काल रोक लगाने की मांग
विस्तार
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रहरी एप के खिलाफ भाजपा के चार सांसद और 13 विधायकों ने सवाल खड़े करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इन जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रहरी एप की व्यवस्था से 90 प्रतिशत ठेकेदार बेरोजगार हो जाएंगे। निर्माण कार्यों पर बड़े ठेकेदारों का वर्चस्व हो जाएगा। प्रतिस्पर्धा नहीं होने से कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
इन जनप्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष गंगा प्रसाद गुप्ता और आदर्श पूर्वांचल ठेकेदार समिति के मंडल अध्यक्ष शरद कुमार सिंह के उस पत्र को भी संलग्न किया है, जिसमें प्रहरी एप की व्यवस्था पर चिंता जताई गई है। जनप्रतिनिधियों ने सीएम से मांग की है कि प्रहरी एप पर तत्काल रोक लगाई जाए।
गोरखपुर के सदर सांसद रवि किशन ने सीएम को लिखे पत्र में कहा कि लोक निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों के टेंडर के लिए पहले से ही चाणक्य व अन्य एप लागू है। प्रहरी एप से ठेकेदारों को काफी परेशानी हो रही है। सांसद ने कहा कि ठेकेदार संघ के अध्यक्ष ने भी उन्हें पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। कुशीनगर के सांसद विजय दूबे, सलेमपुर के सांसद रविंद्र कुशवाहा, मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर ने भी सीएम को पत्र लिखा है।
इसी प्रकार 13 भाजपा विधायकों ने भी सीएम को पत्र लिखकर प्रहरी एप को हटाने की मांग की है। इसमें एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, मलिहाबाद से विधायक जय देवी, बस्ती जिले के महादेवा के विधायक रवि सोनकर, रूधौली के विधायक संजय प्रसाद जायसवाल, कुशीनगर के फाजिलनगर से विधायक गंगा कुशवाहा, महराजगंज के नौतनवां से विधायक अमन मणि त्रिपाठी, देवरिया के भाटपार रानी के विधायक आशुतोष उपाध्याय, बलिया के विधायक उमाशंकर सिंह आदि शामिल हैं। (संवाद)
शहर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा कि कुछ लोग अपनी समस्या बताने आए थे। इस समस्या से शासन को अवगत करा दिया है। शासन को अंतिम फैसला लेना है। जो भी फरियाद लेकर आता है उसे जरूरत सुनते हैं फिर समस्या से शासन को अवगत कराते हैं।
कैंपियरगंज विधायक फतेहबहादुर सिंह ने कहा कि हम जनता द्वारा चुने गए हैं और जनता के लिए काम करते हैं। जो भी फरियाद लेकर आता है, उसकी समस्या सुनते हैं। संबंधित प्रकरण शासन स्तर पर तय होना है। प्रहरी एप को लेकर पत्र लिखा गया है।
विभाग का दावा, एप से आएगी टेंडर में पारदर्शिता
जानकारी के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया को बेहतर बनाने की बात कह कर बीते 16 सितंबर से प्रहरी एप की व्यवस्था को लागू किया है। इसमें ठेकेदार ऑनलाइन टेंडर डालेंगे। टेंडर में जो भी पेपर मांगे गए हैं, उसे ऑनलाइन भरना होगा। इसके बाद प्रहरी एप तय करेगा कि कौन ठेकेदार किस काम के लिए योग्य है।
विभाग का कहना है कि पहले टेंडर में इंजीनियर की अहम भूमिका होती थी। वह जिसे चाहते थे, टेंडर दे देते थे। जिसे नहीं चाहते थे, आवेदन में कई खामियां बताकर प्रतिस्पर्धा से बाहर कर देते थे। इसको लेकर शिकायतें शासन तक पहुंचती थीं। विभाग का कहना है कि प्रहरी एप से टेंडर में पारदर्शिता आएगी।
ठेकेदारों की चिंता यह
ठेकेदारों का कहना है कि प्रहरी एप में जो शर्तें निर्धारित हैं, उसे पांच करोड़ तक का काम कराने वाला ठेकेदार पूरा नहीं कर सकता। शर्त में कहा गया है कि ठेके के काम में प्रयोग होने वाली सभी मशीनें पांच साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए, जबकि विभाग की कई मशीनें जैसे प्लांट, रोलर आदि अंग्रेजों के जमाने की हैं। एक दूसरी शर्त यह है कि सड़कों पर काम कराने वाला तकनीकी स्टाफ जेई व एई, हर सड़क के लिए अलग-अलग होना चाहिए। इसके अलावा हर विभाग में टेंडर के समय जमानत राशि दो प्रतिशत निर्धारित है, यहां 10 प्रतिशत कर दिया गया है।