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चार साल बाद अपने दोनों पैरों पर खड़ा हुआ संतोष, सड़क हादसे में गवां दिया था पैर और हाथ
Thu, 05 Mar 2020 05:34 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 05 Mar 2020 05:34 PM IST
सार
- जंगल कौड़िया के प्राथमिक विद्यालय डोहरिया में बीएसए की मौजूदगी में लगा कृत्रिम पैर
- बेटे को दोनों पांव पर चलता देख भावुक हुई मां, सुधा ने कहा-बेटे को मिला नया जीवन
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छात्र संतोष कुमार अपने दोनों पैर जमीन पर रखकर चल सका।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आखिर वो घड़ी बुधवार को सामने आ ही गई जिसका बेसब्री से आठ साल के संतोष और उसके पूरे परिवार को इंतजार था। एक्सपर्ट की मौजूदगी में बुधवार को प्राइमरी स्कूल के छात्र संतोष कुमार अपने दोनों पैर जमीन पर रखकर चल सका। चार साल तक लगातार एक पांव से चलने का दंश झेलने वाले संतोष को कृत्रिम पैर लगाने के बाद विशेषज्ञों ने अपनी मौजूदगी में ही उसे पूरे विद्यालय परिसर में भ्रमण कराया। बेटे को दोनों पैरों पर चलता देख मां सुधा भावुक होकर बोली, ‘आज बेटे को नया जीवन मिला’।
कक्षा दो में पढ़ने वाला संतोष चार साल पहले एक ट्रेलर की चपेट में आ गया था। हादसे में उसने अपना बायां पैर और हाथ गवां दिया। जान बची मगर दिव्यांगता के दंश से पूरा बचपन तबाह हो गया। बच्चे का हौसला न टूटे इसलिए मजदूर पिता रामबचन ने संतोष का दाखिला प्राइमरी स्कूल में करा दिया। स्कूल में दूसरे बच्चों को पीटी करता देख संतोष के मन में भी उसे करनी की लालसा जगी।
एक पैर और हाथ के बल पर कुछ दिनों में धीरे-धीरे वह पीटी करना सीख गया। अब वह आगे खड़े होकर विद्यालय के दूसरे बच्चों को पीटी करना भी सिखाता है। कृत्रिम पैर तैयार करने वाले डॉ. उमेश चंद किरण ने बताया कि पहले दिन उपकरण लगाकर देखा गया है। धीरे-धीरे संतोष को इसकी आदत हो जाएगी। कृत्रिम पैर लगने से अब उसे किसी पर आश्रित नहीं होना पड़ेगा। इस मौके पर बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह, सर्व शिक्षा अभियान के समन्वयक विवेक जायसवाल, प्रधानाध्यापिका समेत अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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कक्षा दो में पढ़ने वाला संतोष चार साल पहले एक ट्रेलर की चपेट में आ गया था। हादसे में उसने अपना बायां पैर और हाथ गवां दिया। जान बची मगर दिव्यांगता के दंश से पूरा बचपन तबाह हो गया। बच्चे का हौसला न टूटे इसलिए मजदूर पिता रामबचन ने संतोष का दाखिला प्राइमरी स्कूल में करा दिया। स्कूल में दूसरे बच्चों को पीटी करता देख संतोष के मन में भी उसे करनी की लालसा जगी।
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एक पैर और हाथ के बल पर कुछ दिनों में धीरे-धीरे वह पीटी करना सीख गया। अब वह आगे खड़े होकर विद्यालय के दूसरे बच्चों को पीटी करना भी सिखाता है। कृत्रिम पैर तैयार करने वाले डॉ. उमेश चंद किरण ने बताया कि पहले दिन उपकरण लगाकर देखा गया है। धीरे-धीरे संतोष को इसकी आदत हो जाएगी। कृत्रिम पैर लगने से अब उसे किसी पर आश्रित नहीं होना पड़ेगा। इस मौके पर बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह, सर्व शिक्षा अभियान के समन्वयक विवेक जायसवाल, प्रधानाध्यापिका समेत अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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