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बसंत पंचमी आज, मंदिरों में दिनभर चलीं तैयारियां, देखें शुभ मुहूर्त और विशेष महत्व क्या?

Thu, 30 Jan 2020 02:24 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Thu, 30 Jan 2020 02:24 AM IST
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basant panchami 2020, basant panchami will celebrate on various places, piligrims take holy bath
Basant Panchmi
ऋतुराज बसंत के आगमन का पर्व बसंत पंचमी बृहस्पतिवार को हर्षोल्लास पूर्वक मनाई जाएगी। शैक्षणिक संस्थानों एवं हिंदू घरों में पांच प्रकृतियों में से एक वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाएगी। इसी दिन निश्चित स्थानों पर सम्मत स्थापित कर लोग होलिकोत्सव की शुरुआत करेंगे। साथ ही श्रद्धालु पवित्र नदियों व सरोवरों में आस्था की डुबकी भी लगाएंगे।
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ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना को लेकर बुधवार को शहर के विभिन्न मंदिरों एवं शिक्षण संस्थानों में दिनभर तैयारियां चलती रहीं। गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित कई शिक्षण संस्थाओं में श्रद्धालु मां सरस्वती के प्रतिमा की स्थापना की तैयारी करते दिखे। वहीं, शाम तक सम्मत वाले स्थानों की साफ-सफाई कराई गई। 
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मां सरस्वती की होगी आराधना
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि बृहस्पतिवार को सूर्योदय 6 बजकर 35 मिनट पर होगा। पंचमी तिथि का मान दिन में 10 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस दिन छत्र नामक महाऔदायिक योग भी है। उन्होंने बताया कि जिस दिन पूर्वाह्न में पंचमी हो, वही दिन बसंत पंचमी के लिए मान्य दिन है। यह ऋतुराज बसंत के आरंभ का दिन है। बसंत पंचमी के दिन शैक्षणिक कार्यों से जुड़े लोग खासतौर से शिक्षार्थी, शिक्षक व साहित्यकार मां सरस्वती की पूजा अर्चन करेंगे। इसी दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्मत की स्थापना भी होगी। बच्चे धूल उड़ाकर होलिकोत्सव की शुरुआत करेंगे।
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बसंत से होता है नई ऊर्जा का संचार

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि ऋतुराज बसंत के आगमन पर बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। बसंत ऋतु लोगों में नई ऊर्जा का संचार करती है। हर तरफ खुशियों का माहौल होता है। पुरानी चीजों में भी नया जीवन आ जाता है।

बसंत पंचमी के दिन विद्या के साथ ही वाणी की देवी मां सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या में वृद्धि होती है।

सरस्वती पूजन की विधि
ज्योतिर्विद मनीष मोहन ने बताया कि गणेश, वरुण, मातृका और नवग्रह पूजन के बाद पुष्प लेकर पुस्तक या कलश अथवा मूर्ति स्थापित कर माता सरस्वती की आराधना करें।

धूप, दीप के बाद मक्खन, दही, दूध, सफेद तिल के लड्डू, धान का लावा, ईंख, ईंख का रस, गुड़, मधु, शक्कर, चावल, खीर, मिठाई, नारियल, नारियल का जल, मूली, अदरक, पका हुआ केला, श्रीफल, बेर आदि का भोग लगाएं। इसके बाद आरती, पुष्पांजलि और प्रार्थना करें। बसंत पंचमी के दिन व्रत नहीं होता, केवल पूजन ही होता है।
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