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Exclusice: गोरखपुर के लोगों से कमा रहे हैं बैंक, पर कर्ज देने में करते हैं आनाकानी
Sun, 12 Sep 2021 01:38 PM IST
vivek shukla
राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 12 Sep 2021 01:38 PM IST
सार
प्राइवेट हों या पब्लिक सेक्टर के बैंक सभी के सीडी रेसियो में काफी अंतर। 44 हजार करोड़ का कारोबार करते हैं जिले से, लोन देते हैं 13 हजार करोड़। 31.5 हजार करोड़ रुपये सालाना जमा करते हैं गोरखपुरवासी बैंकों में। बड़ौदा यूपी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक की स्थिति सबसे खराब।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले के लोगों से बैंक कमाई अधिक कर रहे हैं, लेकिन उस अनुपात में कर्ज नहीं दे रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि बैंक जिले के लोगों का पैसा दूसरे जिलों या प्रदेशों में लगा रहे हैं। इस तरह जिले का धन जिले के ही काम नहीं आ रहा है। बैंकों का गोरखपुर का सीडी रेसियो (ऋण-जमा अनुपात) देखकर तो यही कहा जा सकता है। निजी बैंक का अनुपात फिर भी कुछ ठीक है, लेकिन सरकारी बैंक जिलावासियों के प्रति बेहद अनुदार बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले के पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंक सालाना करीब 44618 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं, लेकिन करीब सभी सरकारी बैंक युवाओं को उद्योग लगाने या अपना कारोबार शुरू करने के लिए ऋण देने में हिचकते हैं। यह स्थिति तब है जबकि जिले के लोग बैंकों की स्थानीय शाखाओं में सालाना करीब 31 हजार करोड़ रुपये जमा करते हैं।
गोरखपुरवासियों की जमा रकम से दूसरे प्रदेश के लोगों को देते हैं ऋण
बैंकों का सीडी रेसियो देखकर यही कहा जा सकता है कि गोरखपुर के लोगों द्वारा विभिन्न बैंकों में जमा की गई रकम का इस्तेमाल दूसरे प्रदेश के लोगों को ऋण देने में किया जा रहा है। जिले के बैंकों का औसत सीडी रेसियो करीब 42 प्रतिशत है। सबसे खराब स्थिति सरकारी बैंकों की है। इनका सीडी रेसियो केवल 37.38 प्रतिशत है। वहीं, ग्रामीण बैंक का सीडी रेसियो 24 प्रतिशत है। ऋण देने के मामले में सबसे खराब स्थिति भारतीय स्टेट बैंक की है, जिसका सीडी रेशियो 28.06 प्रतिशत है। वहीं, ग्रामीण बैंक के तौर पर बड़ौदा यूपी बैंक की स्थिति बहुत खराब है। निजी बैंकों में एक दो को छोड़ दिया जाए तो बाकियों का सीडी रेसियों सरकारी बैंकों की अपेक्षा काफी अच्छा का जा सकता है।
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जानकारी के अनुसार, जिले के पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंक सालाना करीब 44618 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं, लेकिन करीब सभी सरकारी बैंक युवाओं को उद्योग लगाने या अपना कारोबार शुरू करने के लिए ऋण देने में हिचकते हैं। यह स्थिति तब है जबकि जिले के लोग बैंकों की स्थानीय शाखाओं में सालाना करीब 31 हजार करोड़ रुपये जमा करते हैं।
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गोरखपुरवासियों की जमा रकम से दूसरे प्रदेश के लोगों को देते हैं ऋण
बैंकों का सीडी रेसियो देखकर यही कहा जा सकता है कि गोरखपुर के लोगों द्वारा विभिन्न बैंकों में जमा की गई रकम का इस्तेमाल दूसरे प्रदेश के लोगों को ऋण देने में किया जा रहा है। जिले के बैंकों का औसत सीडी रेसियो करीब 42 प्रतिशत है। सबसे खराब स्थिति सरकारी बैंकों की है। इनका सीडी रेसियो केवल 37.38 प्रतिशत है। वहीं, ग्रामीण बैंक का सीडी रेसियो 24 प्रतिशत है। ऋण देने के मामले में सबसे खराब स्थिति भारतीय स्टेट बैंक की है, जिसका सीडी रेशियो 28.06 प्रतिशत है। वहीं, ग्रामीण बैंक के तौर पर बड़ौदा यूपी बैंक की स्थिति बहुत खराब है। निजी बैंकों में एक दो को छोड़ दिया जाए तो बाकियों का सीडी रेसियों सरकारी बैंकों की अपेक्षा काफी अच्छा का जा सकता है।
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यह होता है सीडी रेसियो
बैंक में जितना पैसा जमा होता है, उसकी तुलना में वह कितना पैसा ऋण के रूप में बांट रहा है। इसे सीडी रेसियो कहा जाता है। बैंकों की आय दिए गए ऋणों से प्राप्त होने वाले ब्याज से होती है। इस आय से ही बैंक जमा राशि पर ब्याज देते हैं। गोरखपुर के मामले में सीडी रेसियो काफी समय से खराब चल रहा है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आपत्ति जता चुके हैं।
प्राइवेट बैंक
ग्रामीण बैंक
बड़ौदा यूपी बैंक 76 2790.63 682.52 3473.15 24.46
भारतीय स्टेट बैंक के डीजीएम संजीव कुमार ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक सीडी रेसियो बेहतर करने के लिए कई बिंदुओं पर एक साथ काम कर रहा है। गीडा में ओडीओपी योजना के तहत कई योजनाएं शुरू हो रही हैं। सरकार की विभिन्न योजनाएं, नाबार्ड की योजनाएं, हाउसिंग लोन आदि के लिए बैंक अधिक से अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है।
बड़ौदा यूपी बैंक के क्रेडिट जीएम कुमार केशव ने बताया कि कुछ समय पहले तीनों बैंकों का मर्जर होकर बड़ौदा यूपी बैंक बना है। विलय से पहले के बैंकों में सीडी रेसियो बेहतर नहीं था। सीडी रेसियो बढ़ाने के लिए बड़ौदा यूपी बैंक नई योजना के साथ काम कर रहा है। इसी क्रम में एक अगस्त से मानसून क्रेडिट कैंप शुरू किया गया है। अब तक 350 करोड़ का लोन स्वीकृत किया गया है।
बैंक में जितना पैसा जमा होता है, उसकी तुलना में वह कितना पैसा ऋण के रूप में बांट रहा है। इसे सीडी रेसियो कहा जाता है। बैंकों की आय दिए गए ऋणों से प्राप्त होने वाले ब्याज से होती है। इस आय से ही बैंक जमा राशि पर ब्याज देते हैं। गोरखपुर के मामले में सीडी रेसियो काफी समय से खराब चल रहा है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आपत्ति जता चुके हैं।
| बैंक | शाखाओं की संख्या | जमा | एडवांस | व्यापार | सीडी रेसियो |
| स्टेट बैंक ऑफ इंडिया | 75 | 10102.90 | 2855.13 | 12958.03 | 28.06 |
| पंजाब नेशनल बैंक | 47 | 4626.36 | 1870.39 | 6496.75 | 40.43 |
| यूनियन बैंक ऑफ इंडिया | 36 | 2985.05 | 1349.00 | 4334.05 | 45.19 |
| सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया | 17 | 1098.20 | 539.12 | 1637.32 | 49.09 |
| यूको बैंक | 17 | 987.31 | 397.12 | 1384.43 | 40.22 |
| केनरा बैंक | 22 | 1014.00 | 377.00 | 1391.00 | 37.18 |
| बैंक ऑफ इंडिया | 4 | 265.60 | 111.63 | 377.23 | 42.03 |
| इंडियन ओवरसिज बैंक | 7 | 412.00 | 177.00 | 589.00 | 42.96 |
| पंजाब एंड सिंध बैंक | 2 | 97.67 | 46.33 | 144.00 | 47.44 |
| बैंक ऑफ महाराष्ट् | 2 | 92.91 | 95.48 | 188.39 | 102.77 |
| इंडियन बैंक | 27 | 2709.00 | 1180.00 | 3889.00 | 43.56 |
| बैंक ऑफ बड़ौदा | 13 | 891.00 | 453.00 | 1344.00 | 50.84 |
प्राइवेट बैंक
| बैंक | शाखाओं की संख्या | जमा | एडवांस | व्यापार | सीडी रेसियो |
| आईसीआईसीआई | 8 | 525.00 | 483.06 | 1008.06 | 92.01 |
| एचडीएफसी | 18 | 1644.74 | 1390.71 | 3035.45 | 84.56 |
| एक्सिस बैंक | 9 | 555.53 | 462.46 | 1017.99 | 83.25 |
| आइडीबीआई | 1 | 134.00 | 26.44 | 160.44 | 19.73 |
| कोटक महेंद्रा | 3 | 177.83 | 183.42 | 361.25 | 103.14 |
| इंडसइंड | 2 | 89.96 | 345.28 | 435.24 | 383.82 |
| यस | 2 | 81.57 | 21.54 | 103.11 | 26.41 |
| बंधन | 3 | 101.10 | 189.60 | 290.70 | 187.54 |
ग्रामीण बैंक
बड़ौदा यूपी बैंक 76 2790.63 682.52 3473.15 24.46
भारतीय स्टेट बैंक के डीजीएम संजीव कुमार ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक सीडी रेसियो बेहतर करने के लिए कई बिंदुओं पर एक साथ काम कर रहा है। गीडा में ओडीओपी योजना के तहत कई योजनाएं शुरू हो रही हैं। सरकार की विभिन्न योजनाएं, नाबार्ड की योजनाएं, हाउसिंग लोन आदि के लिए बैंक अधिक से अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहा है।
बड़ौदा यूपी बैंक के क्रेडिट जीएम कुमार केशव ने बताया कि कुछ समय पहले तीनों बैंकों का मर्जर होकर बड़ौदा यूपी बैंक बना है। विलय से पहले के बैंकों में सीडी रेसियो बेहतर नहीं था। सीडी रेसियो बढ़ाने के लिए बड़ौदा यूपी बैंक नई योजना के साथ काम कर रहा है। इसी क्रम में एक अगस्त से मानसून क्रेडिट कैंप शुरू किया गया है। अब तक 350 करोड़ का लोन स्वीकृत किया गया है।