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यूपी: पूर्वांचल में पहली बार बांस के आभूषणों को बनाने का दिया जाएगा प्रशिक्षण, जानिए कब होगी इसकी शुरुआत
Wed, 04 Aug 2021 01:37 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 04 Aug 2021 01:37 PM IST
सार
22 अगस्त से कॉमन फैसिलिटी सेंटर में बैंबू लेडी ऑफ इंडिया नीरा शर्मा देंगी प्रशिक्षण।
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बांस के आभूषण।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बांस से गहनों को बनाने के लिए 22 अगस्त से प्रशिक्षण की शुरुआत होगी। प्रशिक्षण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर में दिया जाएगा। पूर्वांचल में पहली बार बांस के आभूषणों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यही नहीं बांस के तैयार उत्पाद को बिक्री के लिए बाजार में भी उतारा जाएगा। 15 दिवसीय प्रशिक्षण बैंबू लेडी ऑफ इंडिया नीरा शर्मा और उनकी टीम के द्वारा दिया जाएगा।
डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि लक्ष्मीपुर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनकर तैयार हो गया है। यहां होने वाले प्रशिक्षण में कुल 25 लोगों को शामिल किया गया है। इनमें बांसफोड़ समाज के लोगों को 50 प्रतिशत और इसके बाद सामाजिक व आर्थिक रूप से जरूरतमंदों को शामिल किया गया है। ऐसे में हुनर के निखारने के लिए जरूरतमंद कारीगरों को वन विभाग में डीएफओ कार्यालय में संपर्क करना होगा।
सभी मानकों को पूरा करने के बाद उन्हें प्रशिक्षण में शामिल किया जा सकेगा। यहां बांस से झुमके, हार, उंगली के छल्ले, हेयर बैंड, क्लिप, ब्रोच पिन, चूड़ियां, कंगन, बाजूबंद, पायल और फैशन के अन्य सामान बनाना सिखाया जाएगा। इसके बाद इन्हें तैयार कर बाजार में उतारा जाएगा। इससे लोगों को रोजगार का सुलभ साधन उपलब्ध हो सकेगा। सीएफसी में कोई भी व्यक्ति बांस के उत्पाद बना सकता है। इसके लिए उसे अपना बांस लेकर जाना होगा। उत्पाद बनाने में खर्च हुई बिजली के बिल का ही भुगतान कर उत्पाद बना सकता है। वन विभाग इन उत्पादों के लिए बाजार भी उपलब्ध कराएगा।
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डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि लक्ष्मीपुर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनकर तैयार हो गया है। यहां होने वाले प्रशिक्षण में कुल 25 लोगों को शामिल किया गया है। इनमें बांसफोड़ समाज के लोगों को 50 प्रतिशत और इसके बाद सामाजिक व आर्थिक रूप से जरूरतमंदों को शामिल किया गया है। ऐसे में हुनर के निखारने के लिए जरूरतमंद कारीगरों को वन विभाग में डीएफओ कार्यालय में संपर्क करना होगा।
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सभी मानकों को पूरा करने के बाद उन्हें प्रशिक्षण में शामिल किया जा सकेगा। यहां बांस से झुमके, हार, उंगली के छल्ले, हेयर बैंड, क्लिप, ब्रोच पिन, चूड़ियां, कंगन, बाजूबंद, पायल और फैशन के अन्य सामान बनाना सिखाया जाएगा। इसके बाद इन्हें तैयार कर बाजार में उतारा जाएगा। इससे लोगों को रोजगार का सुलभ साधन उपलब्ध हो सकेगा। सीएफसी में कोई भी व्यक्ति बांस के उत्पाद बना सकता है। इसके लिए उसे अपना बांस लेकर जाना होगा। उत्पाद बनाने में खर्च हुई बिजली के बिल का ही भुगतान कर उत्पाद बना सकता है। वन विभाग इन उत्पादों के लिए बाजार भी उपलब्ध कराएगा।
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3.50 करोड़ से बनकर तैयार हुआ है सीएफसी
सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने एवं बांस की खेती से किसानों की आय बढ़ाने के लिए गोरखपुर के कैंपिंयरगंज ब्लॉक के लक्ष्मीपुर में बांस के लिए कॉमन फैसेलिटी सेंटर (सीएफसी) बनकर तैयार हो गया है। केंद्र सरकार की यह योजना 3.55 करोड़ रुपये में तैयार हुई है। अब यहां प्रशिक्षण शुरू होगा।
सीएफसी में मिलेंगी ये सुविधाएं
सेंटर की खाली पड़ी जमीन में बांस की खेती होगी। इसके अलावा बांस के ट्रीटमेंट, कार्बोनाइजेशन और वैल्यू एडिशन प्रोसेसिंग के लिए यूनिट स्थापित किया जा चुका है। बांस से निकलने वाले वेस्ट के लिए प्राइमरी स्तर की प्रोसेसिंग यूनिट भी निर्मित होगी। यह कॉमन फैसेलिटी सेंटर किसानों को प्रेरित व प्रशिक्षित करने, बांस से हस्तशिल्प बनाने एवं निर्मित उत्पाद की बिक्री के लिए बाजार को प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराएगी। इस सेंटर में ‘लाइवली हुड बिजनेस इनक्यूबेटर’ (एलबीआई) संचालित होगा। यहां बांस से हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, फर्नीचर निर्माण, बांस बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों में बांस की झोपड़ी बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए कक्ष भी निर्मित होंगे। बांस रखने और निर्मित उत्पाद को रखने के लिए गोदाम बनाया जाएगा।
सीएफसी में मिलेंगी ये सुविधाएं
सेंटर की खाली पड़ी जमीन में बांस की खेती होगी। इसके अलावा बांस के ट्रीटमेंट, कार्बोनाइजेशन और वैल्यू एडिशन प्रोसेसिंग के लिए यूनिट स्थापित किया जा चुका है। बांस से निकलने वाले वेस्ट के लिए प्राइमरी स्तर की प्रोसेसिंग यूनिट भी निर्मित होगी। यह कॉमन फैसेलिटी सेंटर किसानों को प्रेरित व प्रशिक्षित करने, बांस से हस्तशिल्प बनाने एवं निर्मित उत्पाद की बिक्री के लिए बाजार को प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराएगी। इस सेंटर में ‘लाइवली हुड बिजनेस इनक्यूबेटर’ (एलबीआई) संचालित होगा। यहां बांस से हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, फर्नीचर निर्माण, बांस बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों में बांस की झोपड़ी बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए कक्ष भी निर्मित होंगे। बांस रखने और निर्मित उत्पाद को रखने के लिए गोदाम बनाया जाएगा।