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गोरखपुर: यहां हिंदू-मुस्लिम एक साथ मांगते हैं मन्नत, पूरी हो जाती है हर मुराद
Sun, 30 May 2021 04:58 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 30 May 2021 04:58 PM IST
सार
- शहर के बहरामपुर में स्थित है बाले मियां का दरगाह
- हर साल लगता है मेला, बड़ी संख्या में हिंदू होते हैं मेले में शामिल
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बाले मियां की दरगाह।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर शहर के बहरामपुर मोहल्ला स्थित बाले मियां की दरगाह और मैदान आस्था के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक समरसता का भी केंद्र हैं। यहां हर वर्ष लगने वाले एक माह के मेले में देश भर के आस्थावान हिंदू-मुसलमान बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
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हजरत सालार मसूद गाजी उर्फ बाले मियां की दरगाह शहर के बहरामपुर क्षेत्र में स्थित है। यहां हर वर्ष ज्येष्ठ (जेठ) माह में एक महीने का मेला लगता है। मेले में देश के दूर-दराज इलाकों से लेकर आसपास के अकीदतमंद और आस्थावान बाले मियां की दरगाह में हाजिरी देने और मन्नत मांगने पहुंचते हैं। हर जायज मुराद पूरी करने वाले के रूप में मशहूर बाले मियां की दरगाह पर आस्थावान पलंग पीढ़ी, कनूरी आदि चढ़ा कर अपनी आस्था और अकीदत का इजहार करते हैं।
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पूर्वांचल की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है मेला
बाले मियां के मेले को पूर्वांचल की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल माना जाता है। हर साल लग्न की रस्म पलंग पीढ़ी के रूप में मनाई जाती है। आपकी नजर में हिंदू-मुसलमान या किसी भी धर्म का मानने वाला सब बराबर थे। यही कारण है कि आपकी दरगाह से हर इंसान को फैज पहुंचता है। उनकी दरगाह में भी सब को बराबर सम्मान मिलता है। आपका मजार शरीफ बहराइच शरीफ में है। अकीदतमंदों ने गोरखपुर में सैकड़ो साल पहले प्रतीकात्मक मजार बनाई। जो वक्फ विभाग में दर्ज है। गाजी मियां के नाम से मोहल्ला गाजी रौजा भी बसा है।
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ऐतिहासिक है बाले मियां का मैदान
बाले मियां का मैदान ब्रिटिश राज के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन का भी गवाह रहा है। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान महात्मा गांधी ने ब्रिटिश राज के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन के प्रति लोगों को जागरूक करने और जनसमर्थन हासिल करने के लिए महात्मा गांधी 1921 में गोरखपुर के इसी बाले मियां के मैदान में आए थे। इसी मैदान में उन्होंने जनता से ब्रिटिश राज के साथ असहयोग करने का आह्वान किया था।