Karwa Chauth : मेलबर्न में लिए फेरे, अब अखंड सुहाग के लिए गोरखपुर पहुंची मुनीरा
मुनीरा गुप्ता का अधिकांश समय मेलर्बन में गुजरा है। भारतीय संस्कृति, त्योहारों और परंपरा के बारे में उन्हें जानकारी है। मगर, इंदौर में उन्हें इनका गवाह बनने का मौका नहीं मिला। मेलर्बन में इतनी भव्यता से इन्हें मनाया नहीं जाता है। इसलिए दंपती ने करवाचौथ के पर्व को गोरखपुर में मनाने का निर्णय लिया।
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अखंड सौभाग्य का पर्व मनाने के लिए आस्ट्रेलिया के मेलर्बन से दस हजार किलोमीटर की दूरी तय कर मुनीरा गोरखपुर आईं हैं। मुनीरा और उनके पति आकाश मेलर्बन में साइंटिस्ट हैं। वहां, पढ़ाई के दौरान ही गोरखपुर के आकाश ने इंदौर की मुनीरा को अपना दिल दे दिया था।
वर्ष-2021 में दोनों ने परिवार की रजामंदी से ऑस्ट्रलिया में ही हिंदू रीति रिवाज से शादी की। कोरोना महामारी की वजह से उनकी सास बबिता गुप्ता और ससुर हेमंत गुप्ता शादी में शामिल नहीं हो सके थे। उन्होंने यहां से ही नव दंपती को ऑनलाइन वीडियो कॉल के माध्यम से सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया। अब जब कोरोना से हालात सामान्य हुए हैं तो दंपती करवाचौथ का पर्व मनाने गोरखपुर आया है।
एचएन सिंह चौराहा के पास ऑटोपार्ट्स व्यवसायी पिता हेमंत कुमार और मां बबीता गुप्ता के साथ रहने वाले डॉ. आकाश गुप्ता ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई नवल्स एकेडमी रुस्तमपुर ब्रांच से की है। उसके बाद लखनऊ से बीटेक और एमटेक की पढ़ाई आईआईटी खड़गपुर से पूरी की। फिर पीएचडी के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ मेलर्बन में प्रवेश लिया। वहीं, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के इंदौर की रहने वाली मुनीरा गुप्ता भी आस्ट्रेलिया में परास्नातक की पढ़ाई करती थीं।
मुनीरा की पढ़ाई में काफी रूचि रहती थी, जिससे आकाश बहुत प्रभावित थे। दोनों पढ़ाई के सिलसिले में हमेशा साथ समय व्यतीत करने लगे। आकाश ने समय की नजाकत को देखते हुए मुनीरा से अपने प्यार का इजहार किया। वहीं, मुनीरा भी आकाश के सरल स्वभाव और अच्छे आचरण की वजह से आकाश को पसंद करने लगीं थीं। उनके सकारात्मक जवाब के बाद दोनों ने मन की बात परिवार के सामने रखी। दोनों के आत्मनिर्भर होने की वजह से परिवार ने भी सहर्ष स्वीकृति प्रदान की।
मुनीरा का अधिकांश जीवन मेलर्बन में गुजरा
मुनीरा गुप्ता का अधिकांश समय मेलर्बन में गुजरा है। भारतीय संस्कृति, त्योहारों और परंपरा के बारे में उन्हें जानकारी है। मगर, इंदौर में उन्हें इनका गवाह बनने का मौका नहीं मिला। मेलर्बन में इतनी भव्यता से इन्हें मनाया नहीं जाता है। इसलिए दंपती ने करवाचौथ के पर्व को गोरखपुर में मनाने का निर्णय लिया।
दो महीने पहले सास ने शुरू की खरीदारी
पहली बार सुसराल आकर करवाचौथ मनाने की जानकारी मिलने के बाद से सास बबीता गुप्ता अपनी बेटी शिखा गुप्ता के साथ बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने त्योहार को खास बनाने के लिए बहू की साड़ी और गहनों की खरीदारी से लेकर सौंदर्य प्रसाधन के सामान की खुद ही खरीदारी की है।