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गोरखपुर में फिर जाग उठा असलहे का शौक, एक महीने में 130 आवेदन बिके
Sat, 18 Jan 2020 07:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2020 07:12 AM IST
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बंदूक
- फोटो : file
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला सामने आने के बाद करीब चार महीने तक खामोश बैठे असलहों की चाहत रखने वालों का शौक फिर जाग उठा है। यही वजह है कि एक महीने में शस्त्र लाइसेंस के 130 से अधिक आवेदनों पत्रों की बिक्री हो चुकी है जिससे सरकारी खजाने में 65 हजार का राजस्व जुड़ा है। उधर शस्त्र लाइसेंस बनाने पर लगी रोक हटने के बाद पहले से आवेदन कर चुके चार हजार आवेदनों को लेकर भी लोगों ने पैरवी तेज कर दी है।
दिसंबर 2018 में शस्त्र लाइसेंस बनाने को लेकर रोक हटाई गई थी। इसके बाद महीने भर में ही चार हजार से अधिक आवेदन पत्रों की बिक्री हुई। जब तक नए फार्म छपकर आते लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया। आचार संहिता खत्म हुई तो एक फिर आवेदकों ने पैरवी शुरू की मगर 14 अगस्त 2019 को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला सामने आ गया।
इस मामले में जब कलेक्ट्रेट के कर्मचारी समेत तमाम लोगों पर कार्रवाई शुरू हुई तो असलहे के शौकीन भी एक बारगी सहम गए। करीब चार महीने तक कोई भी कदरदान शस्त्र कार्यालय तो दूर कलेक्ट्रेट परिसर में भी नहीं दिखाई दिया। जिनके शस्त्र लाइसेंस सही थे वे भी डरे थे कि उनका नाम भी इस लपेटे में न आ जाए। मगर जैसे ही जांच पूरी हुई। 10 दिसंबर के बाद से फिर से शस्त्र कार्यालय में भीड़ बढ़ने लगी है। नए आवेदन पत्र खरीदने के साथ ही पुराने आवेदक भी पैरवी में जुट गए हैं।
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दिसंबर 2018 में शस्त्र लाइसेंस बनाने को लेकर रोक हटाई गई थी। इसके बाद महीने भर में ही चार हजार से अधिक आवेदन पत्रों की बिक्री हुई। जब तक नए फार्म छपकर आते लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया। आचार संहिता खत्म हुई तो एक फिर आवेदकों ने पैरवी शुरू की मगर 14 अगस्त 2019 को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला सामने आ गया।
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इस मामले में जब कलेक्ट्रेट के कर्मचारी समेत तमाम लोगों पर कार्रवाई शुरू हुई तो असलहे के शौकीन भी एक बारगी सहम गए। करीब चार महीने तक कोई भी कदरदान शस्त्र कार्यालय तो दूर कलेक्ट्रेट परिसर में भी नहीं दिखाई दिया। जिनके शस्त्र लाइसेंस सही थे वे भी डरे थे कि उनका नाम भी इस लपेटे में न आ जाए। मगर जैसे ही जांच पूरी हुई। 10 दिसंबर के बाद से फिर से शस्त्र कार्यालय में भीड़ बढ़ने लगी है। नए आवेदन पत्र खरीदने के साथ ही पुराने आवेदक भी पैरवी में जुट गए हैं।
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प्रशासन अब भी लाइसेंस जारी करने के मूड में नहीं
बंदूक
- फोटो : file
नए लाइसेंस के मामले में डीएम के. विजयेंद्र पांडियन भले ही किसी भी तरह की रोक से इनकार कर रहे हैं मगर प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक जिला प्रशासन अब भी नए लाइसेंस बनाने के मूड में नहीं है। सिर्फ वरासत के मामलों में ही सुनवाई हो रही है। एक महीने में शस्त्र लाइसेंस के करीब पांच वरासत के मामले निस्तारित हुए हैं।
प्रत्येक फार्म की बिक्री से जिला प्रशासन को पांच सौ रुपये की आय हो रही है। रोक हटने के बाद बिके चार हजार फार्म से ही प्रशासन को करीब 20 लाख रुपये से अधिक की आय हुई। प्रशासन की आवेदन पत्रों से कमाई हो रही इसलिए उसकी बिक्री पर रोक नहीं है।
विभागीय जांच के बाद ही निलंबन पर विचार
जमानत के बाद भी जिला प्रशासन की तरफ से शुरू कराई गई विभागीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही पूर्व असलहा बाबू राम सिंह के निलंबन को निरस्त करने पर कोई निर्णय हो सकेगा। मामले की जांच एडीएम (प्रशासन) चतुर्भुजी गुप्ता को सौंपी गई है।
इस मामले में राम सिंह के अलावा कलेक्ट्रेट के दो और पूर्व असलहा बाबू को आरोपी बनाकर जेल भेजा गया है। इनमें अशोक गुप्ता और विजय श्रीवास्तव का नाम शामिल है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि अभी विभागीय जांच चल रही है। इसके बाद ही निलंबन वापसी को लेकर कोई निर्णय हो सकेगा।
जिलाधिकारी के विजयेंद्र ने बताया कि नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर कोई रोक नहीं है। आवेदन पत्रों की जांच में जिसे वास्तव में असलहे की जरूरत पाई जाएगी, उसे लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
प्रत्येक फार्म की बिक्री से जिला प्रशासन को पांच सौ रुपये की आय हो रही है। रोक हटने के बाद बिके चार हजार फार्म से ही प्रशासन को करीब 20 लाख रुपये से अधिक की आय हुई। प्रशासन की आवेदन पत्रों से कमाई हो रही इसलिए उसकी बिक्री पर रोक नहीं है।
विभागीय जांच के बाद ही निलंबन पर विचार
जमानत के बाद भी जिला प्रशासन की तरफ से शुरू कराई गई विभागीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही पूर्व असलहा बाबू राम सिंह के निलंबन को निरस्त करने पर कोई निर्णय हो सकेगा। मामले की जांच एडीएम (प्रशासन) चतुर्भुजी गुप्ता को सौंपी गई है।
इस मामले में राम सिंह के अलावा कलेक्ट्रेट के दो और पूर्व असलहा बाबू को आरोपी बनाकर जेल भेजा गया है। इनमें अशोक गुप्ता और विजय श्रीवास्तव का नाम शामिल है। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि अभी विभागीय जांच चल रही है। इसके बाद ही निलंबन वापसी को लेकर कोई निर्णय हो सकेगा।
जिलाधिकारी के विजयेंद्र ने बताया कि नए शस्त्र लाइसेंस बनाने पर कोई रोक नहीं है। आवेदन पत्रों की जांच में जिसे वास्तव में असलहे की जरूरत पाई जाएगी, उसे लाइसेंस जारी किए जाएंगे।