बाढ़ ने बढ़ाई मुसीबत: पानी कम होने पर बढ़ती हैं बीमारियां, स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध
125 से अधिक गांवों की बाढ़ प्रभावित आबादी को बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय है। विभाग ने 83 टीमों को सहायता के लिए लगाया है।
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गोरखपुर जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यदि कोई सर्पदंश से पीड़ित है तो वह नजदीकी अस्पताल जाए और इलाज कराए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
जिले की 125 से अधिक गांवों की बाढ़ प्रभावित आबादी को बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय है। विभाग ने 83 टीमों को सहायता के लिए लगाया है। टीम में चिकित्सक समेत चार स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। अब तक 5700 से अधिक लोगों की जांच कर बुखार और उल्टी दस्त की दवाएं दी जा चुकी हैं।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. एके चौधरी ने बताया कि इलाकों में कुल 62887 क्लोरीन की टेबलेट वितरित की गई है। लोग 20 लीटर पानी में एक टेबलेट का घोल बना कर दो घंटे बाद ही इसका उपयोग करें। इससे डायरिया से सुरक्षित रहेंगे। 12970 हैंडपंपाें का क्लोरिफिकेशन किया गया है, ताकि लोगों को साफ-सुथरा पानी मिल सके।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में ओआरएस के 13518 पैकेट वितरित किए गए हैं। लोगों को अगर बुखार है तो तत्काल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सूचना दें। ज्यादा दिक्कत होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं।
पानी कम होने पर बढ़ती हैं बीमारियां
जिला सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पानी कम होने के साथ ही डायरिया और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए। अगर किसी भी किस्म का बुखार हो तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें।
सीएचसी-पीएचसी में 20-20 वायल एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध
डॉ. एके चौधरी ने बताया कि बाढ़ के कारण सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसे देखते हुए प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर 20-20 वॉयल एंटी स्नेक वेनम भी उपलब्ध कराए गए हैं। अगर किसी के साथ सर्पदंश की घटना होती है तो झाड़ फूंक करने की बजाय सीधे अस्पताल जाएं।