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गोरखपुर: शराब की दुकानें खुलीं पर नहीं उमड़े शौकीन, आबकारी विभाग को 12 दिनों में करीब 30 करोड़ की चपत
Fri, 14 May 2021 10:58 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 14 May 2021 10:58 AM IST
सार
गोरखपुर में कोरोना कर्फ्यू शुरू होने के 12 दिन बाद गुरुवार को शराब की दुकानें खुलीं, मगर कुछ को छोड़ ज्यादातर पर नहीं दिखी भीड़।
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सुनसान पड़ी शराब की दुकान।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर में कोरोना कर्फ्यू शुरू होने के 12 दिन बाद गुरुवार को शराब की दुकानें खुलीं, मगर कुछ को छोड़ ज्यादातर पर भीड़ नहीं रही। दोपहर तक गिनती के ही लोग दुकानों पर पहुंचे। वहीं स्टॉक न होने से देहात इलाकों में तो कई दुकानों के शटर ही नहीं उठे। थोक दुकान पर सर्वर डाउन होने से दुकानदारों को शराब मिलने में भी दिक्कत हुई।
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दरअसल पिछली बार लॉकडाउन में दुकानें बंद कर एक चाभी दुकान मालिक तो एक पुलिस को दी गई थी। मगर इस बार कोरोना कर्फ्यू में चाभियां दुकान मालिकों के पास ही रहीं। देहात क्षेत्रों में जहां पुलिस और पब्लिक का आना-जाना कम होता है, वहां कई दुकानदारों ने दुकान से शराब निकालकर अधिक दामों पर बेच दी।
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कई दिन बाद गुरुवार को दुकानें खुलने से आबकारी के साथ ही पुलिस को भी अंदेशा था कि काफी भीड़ जुटेगी। यही वजह रही कि दुकानदारों ने भी एक दिन पहले बुधवार को ही सोशल डिस्टेंसिंग के लिए दुकानों के सामने गोला बना दिया था। सुबह पुलिस भी पहुंच गई। आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर और सिपाही भी लगातार भ्रमण करते रहे। मगर उम्मीद के मुताबिक कहीं भी बहुत ज्यादा भीड़ नहीं लगी।
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शाम पांच बजे के पहले कुछ दुकानों पर एक साथ आठ-दस लोग दिखे, मगर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा और एक-दो की संख्या में ही शौकीन मॉस्क पहनकर शराब खरीदते दिखे। पांच बजते ही दुकानों के शटर बंद हो गए। आबकारी विभाग को इन 12 दिनों में करीब 30 करोड़ रुपये की चपत लगी है।
महीने में शराब की बिक्री से विभाग को करीब 75 से 80 करोड़ रुपये की आय होती है। जिला आबकारी अधिकारी वीपी सिंह का कहना है कि गुरुवार सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक दुकानें खोली गईं। कई लोगों को जानकारी नहीं थी।