गोरखपुर: रजिस्ट्री, आरटीओ के बाद अब सदर तहसील कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी, सामने आई बड़ी गड़बड़ी
आवेदन लटकाने और दौड़ाने के लिए बदनाम तहसील में बड़ी वित्तीय अनियमितता की आशंका, कमिश्नर के निर्देश पर अपर आयुक्त के निरीक्षण में सामने आई अनियमितता, जांच की तैयारी।
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खराब कार्यशैली और भ्रष्टाचार के मामले में रजिस्ट्री कार्यालय और आरटीओ पर कार्रवाई के बाद सदर तहसील पर भी ऐसी ही सख्ती की तैयारी चल रही है। तहसील कार्यालय में बड़ी वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।
कमिश्नर रवि कुमार एनजी के निर्देश पर अपर आयुक्त न्यायिक रतिभान द्वारा किए गए निरीक्षण एवं प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह मामला प्रकाश में आया है। कंप्यूटर के माध्यम से निकलने वाली खतौनी से प्राप्त धनराशि में यह अनियमितता सामने आई है। प्रशासन अब टीम गठित कर तहसील कार्यालय के विभिन्न पटलों की विस्तृत जांच कराने की तैयारी कर रहा है।
कंप्यूटराइज्ड खतौनी से मिलने वाली धनराशि का विवरण रजिस्टर नंबर नौ में दर्ज किया जाता है। मगर छह महीने से इस रजिस्टर में कोई विवरण ही नहीं दर्ज किया गया है। जो विवरण उपलब्ध भी है, उसमें से प्राप्त धनराशि व बैंक में जमा धनराशि के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिला है। अपर आयुक्त न्यायिक रतिभान ने अपनी जांच रिपोर्ट में खतौनी से प्राप्त धनराशि के गबन की प्रबल आशंका जताई है।
खतौनी से प्राप्त धनराशि का ब्योरा नहीं मिला, गबन की आशंका
अपर आयुक्त न्यायिक की प्रारंभिक जांच में पता चला कि रजिस्टर नंबर नौ में प्रतिदिन तहसील से कंप्यूटर के माध्यम से निकलने वाली खतौनी से प्राप्त धनराशि का अंकन नहीं किया जा रहा है। यही नहीं हर दिन मिलने वाली धनराशि को नियमानुसार अगले दिन बैंक में जमा कराना अनिवार्य होता है। यह भी नहीं हो रहा है। वर्ष 2021-22 में अप्रैल महीने से लेकर दिसंबर महीने तक इस रजिस्टर पर एक भी स्लिप चस्पा नहीं मिली है। उस दौरान कार्यरत रहे तहसीलदार, नायब तहसीलदार, लेखपाल द्वारा रजिस्टर पर हस्ताक्षर भी नहीं किया गया था।
इस मामले को गंभीर लापरवाही माना गया है। जनवरी 2022 में स्लिप रजिस्टर में चस्पा किया गया है। दो फरवरी 2022 तक खतौनी से प्राप्त धनराशि को बैंक में जमा करने की स्लिप रजिस्टर में चस्पा की गई है। स्लिप के अनुसार कुल धनराशि एक लाख 61 हजार 701 रुपये है, जबकि रजिस्टर में इस महीने एक लाख 86 हजार 856 रुपये आय दिखाई गई है। अपर आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में गबन की प्रबल आशंका जताई है। इसी तरह जांच में पाया गया कि रजिस्टर क्रमांक चार में मत्स्य पालन आवंटन की प्रक्रिया पूरी हुई दिखाई जा रही है लेकिन उससे प्राप्त धन को कोष में नहीं जमा कराया गया है।
पहले भी हुई कार्रवाई
सदर तहसील में वरासत के मामले में धनउगाही करने के आरोप में हाल ही में एक नायब तहसीलदार एवं चार लेखपालों को दूसरी तहसीलों में स्थानांतरित किया जा चुका है। सदर तहसील की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कमिश्नर रवि कुमार एनजी के निर्देश पर अपर आयुक्त प्रशासन, अपर आयुक्त न्यायिक एवं अपर आयुक्त राजस्व ने जांच की थी। जांच के दौरान नामांतरण के 300 से अधिक ऐसे मामले लंबित पाए गए थे, जिनको निस्तारित करने की अधिकतम समय सीमा बीत चुकी थी। सख्ती के बाद इस कार्य में कुछ तेजी आई मगर खतौनी से होने वाली आय में गड़बड़ी मिली है।