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'साहब! पति बोल रहा बच्चे उसके नहीं, चेक करा दें डीएनए'
Fri, 28 Feb 2020 07:01 PM IST
vivek shukla
नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 28 Feb 2020 07:01 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : social media
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साहब! शादी के 20 साल बाद अब पति कह रहा है कि बच्चे उसके नहीं हैं। इसकी वजह से बच्चों का नाम किसी भी कागज पर दर्ज नहीं हो पा रहा है। वह सजायाफ्ता अपराधी है। बच्चों की डीएनए जांच करा दीजिए, ताकि उसका शक दूर हो जाए। यह गुहार खोराबार थाना क्षेत्र की एक महिला ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर लगाई है। अब मामला सीएमओ तक पहुंचा है, उन्होंने महिला को कानूनी सलाह लेने की बात कह जांच से मना कर दिया है।
महिला ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करते हुए बताया है कि उसकी शादी 20 साल पूर्व उसी थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। महिला का आरोप है कि उसके पति ने झूठ बोलकर उससे कोर्ट मैरिज की थी, जबकि वह पहले से ही तीन शादियां कर चुका था।
बताया कि शादी के बाद सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। दो बेटियों का जन्म हुआ। इस बीच वह तीसरी बार गर्भवती हुई तो पति ने बुरी तरह से मारपीट कर भगा दिया। डर के कारण वह मायके आ गई और एक बेटे को जन्म दिया। इस बीच पति ने कोई खोज-खबर नहीं ली। अब वह बच्चों को स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसे में पति का शक दूर करने के लिए डीएनए जांच करा दी जाए।
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पति और उसका एक बेटा है सजायाफ्ता
महिला ने शिकायती पत्र में यह भी जानकारी दी है कि पति और उसकी पहली पत्नी का पुत्र दोनों सजायाफ्ता हैं। दोनों के डर के कारण कोई भी कर्मचारी सरकारी कागजात में उसका या उसके बच्चों का नाम नहीं दर्ज कर रहा है। इसकी वजह से बच्चों का भविष्य खराब हो रहा हैं।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि डीएनए जांच कराने के लिए महिला को कानूनी मदद लेनी होगी। बिना पुलिस केस हुए डीएनए जांच संभव नहीं है। जिला अस्पताल में डीएनए जांच की सुविधा भी नहीं है।
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महिला ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करते हुए बताया है कि उसकी शादी 20 साल पूर्व उसी थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। महिला का आरोप है कि उसके पति ने झूठ बोलकर उससे कोर्ट मैरिज की थी, जबकि वह पहले से ही तीन शादियां कर चुका था।
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बताया कि शादी के बाद सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। दो बेटियों का जन्म हुआ। इस बीच वह तीसरी बार गर्भवती हुई तो पति ने बुरी तरह से मारपीट कर भगा दिया। डर के कारण वह मायके आ गई और एक बेटे को जन्म दिया। इस बीच पति ने कोई खोज-खबर नहीं ली। अब वह बच्चों को स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसे में पति का शक दूर करने के लिए डीएनए जांच करा दी जाए।
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पति और उसका एक बेटा है सजायाफ्ता
महिला ने शिकायती पत्र में यह भी जानकारी दी है कि पति और उसकी पहली पत्नी का पुत्र दोनों सजायाफ्ता हैं। दोनों के डर के कारण कोई भी कर्मचारी सरकारी कागजात में उसका या उसके बच्चों का नाम नहीं दर्ज कर रहा है। इसकी वजह से बच्चों का भविष्य खराब हो रहा हैं।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि डीएनए जांच कराने के लिए महिला को कानूनी मदद लेनी होगी। बिना पुलिस केस हुए डीएनए जांच संभव नहीं है। जिला अस्पताल में डीएनए जांच की सुविधा भी नहीं है।