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गोरखपुर: प्रशासन तलाशता रहा, जमीन कारोबारी खटखटाते रहे खातेदारों का दरवाजा
Fri, 14 Oct 2022 01:16 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 14 Oct 2022 01:16 PM IST
सार
केदारनाथ के पुत्र आलोक कृष्ण मुखर्जी और उनके पौत्र राजा मुखर्जी करीब चार महीने पहले सदर तहसील आए थे। वारिस होने का सबूत दिया और सभी जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराते हुए तहसीलदार न्यायिक सदर के कोर्ट में वरासत के लिए आवेदन किया। वरासत हुई भी, लेकिन बाद में फिर उसे खारिज कर दिया गया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : istock
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विस्तार
गोरखपुर सदर तहसील के जंगल डुमरी नंबर दो की 26 एकड़ जमीन लावारिस घोषित करते हुए ग्राम सभा के नाम दर्ज के मामले में कुछ जमीन कारोबारियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। सदर तहसील प्रशासन की टीम भले ही मूल खातेदारों या उनके वारिसों को नहीं तलाश सकी, मगर गोरखपुर के जमीन कारोबारी लगातार उनके घर दस्तक देते रहे। जमीन के मूल खातेदारों में से एक स्व. केदारनाथ मुखर्जी के पौत्र राजा मुखर्जी का दावा है कि करीब दो साल पहले से गोरखपुर के कुछ लोग उनके कोलकाता स्थित घर पहुंचते रहे हैं।
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ये कारोबारी औने-पौने दाम पर जमीन चाहते थे, मगर उनका परिवार नहीं तैयार था। कारोबारी महज 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर पर जमीन का सौदा करना चाहते थे। आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों ने खुद को प्रशासन का कर्मचारी बताते हुए जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज कराने की धमकी भी दी थी। उन्होंने पहले तो इसे गंभीरता से नहीं लिया मगर, जब जमीन वास्तव में ग्राम सभा के नाम दर्ज हो गई तो वे गंभीर हुए।
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केदारनाथ के पुत्र आलोक कृष्ण मुखर्जी और उनके पौत्र राजा मुखर्जी करीब चार महीने पहले सदर तहसील आए थे। वारिस होने का सबूत दिया और सभी जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराते हुए तहसीलदार न्यायिक सदर के कोर्ट में वरासत के लिए आवेदन किया। वरासत हुई भी, लेकिन बाद में फिर उसे खारिज कर दिया गया।
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अब सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी की शिकायत के बाद यह मामला फिर गरमा गया है। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की है। मूल खातेदार केदारनाथ मुखर्जी के पुत्र आलोक कृष्ण मुखर्जी और शैलेंद्र नाथ बनर्जी के वारिस जिंदा हैं। यही नहीं, जिस केदारनाथ मुखर्जी और उनके वारिसों को लेखपालों की टीम तलाश नहीं सकी, उन केदारनाथ को 1971 में राष्ट्रपति वराहगिरि वेंकट गिरि के हाथों पद्म भूषण सम्मान मिल चुका है।