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Gorakhpur News: पुरुषों के मुकाबले दो तिहाई महिलाएं तनाव का शिकार

Wed, 01 Jul 2026 02:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Wed, 01 Jul 2026 02:47 AM IST
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65 percent of stress patients visiting the Psychiatry Department's OPD at AIIMS are women.
गोरखपुर। बदलती जीवनशैली और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच तनाव (स्ट्रेस) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एम्स मनोरोग विभाग के आंकड़े बताते हैं कि ओपीडी में तनाव से ग्रसित मरीजों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में करीब दो तिहाई है। हर 100 मरीजों में लगभग 65 महिलाएं होती हैं। इनमें भी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की संख्या अधिक है।
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एम्स के मनोरोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. मनोज पृथ्वीराज ने बताया कि महिलाओं पर घर की जिम्मेदारियों का दबाव रहता है। इसके अलावा पारिवारिक अपेक्षाएं, बच्चों की देखभाल, आर्थिक चिंताएं और सामाजिक परिस्थितियां भी उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि महिलाओं में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती हैं।
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डॉ. पृथ्वीराज ने कहा कि शुरुआती दौर में तनाव के लक्षण सामान्य लग सकते हैं लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। तनाव बढ़ने पर व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, बेचैनी, लगातार थकान, एकाग्रता में कमी, सिरदर्द और कार्यक्षमता में गिरावट व व्यवहार में आक्रामकता जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कई मामलों में यह समस्या अवसाद और अन्य मानसिक विकारों का कारण भी बन सकती है। यदि किसी व्यक्ति में लगातार उदासी, घबराहट, गुस्सा या दैनिक कार्यों में रुचि कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
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महिलाएं खुद के लिए निकालें समय
महिलाओं को खुद के लिए समय निकालना चाहिए। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, योग और ध्यान जैसी गतिविधियां तनाव को कम करने में प्रभावी भूमिका निभाती हैं। परिवार और मित्रों के साथ संवाद बनाए रखना भी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में सहायक होता है। महिलाओं में तनाव के मामले पुरुषों की तुलना में अधिक देखने को मिल रहे हैं। कई महिलाएं लंबे समय तक अपनी मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज करती रहती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।

केस-1

38 वर्षीय एक महिला परामर्श के लिए पहुंचीं। वह दो बच्चों की मां हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने बच्चों की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं व कॅरिअर को लेकर लगातार चिंतित रहती थीं। लगातार चिंता के कारण उन्हें रात में नींद कम आने लगी, सिरदर्द रहने लगा और वह छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ी हो जाती थीं। परिवार के साथ भी उनका व्यवहार प्रभावित होने लगा।

केस-2
35 वर्षीय एक महिला एम्स में लगातार थकान, बेचैनी और अनिद्रा की शिकायत लेकर पहुंचीं। काउंसिलिग के दौरान पता चला कि सुबह से देर रात तक काम के कारण उन्हें स्वयं के लिए समय नहीं मिल पाता था। बढ़ते दबाव के कारण उन्हें गुस्सा अधिक आने लगा घबराहट महसूस होती थी। जांच में पता चला कि वह लंबे समय से तनाव से जूझ रही हैं। उनका इलाज चल रहा है।
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