Exclusive: 54943 बच्चों पर कुपोषण की मार, कमजोर है सुपोषण मिशन की धार
पौष्टिक आहार के अभाव में कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य नहीं सुधार पा रहा है। सात साल से सुपोषण मिशन चल रहा है, 7151 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में हैं। यह मिशन सीएम योगी की प्राथमिकता वाला मिशन है, मगर नतीजा अपेक्षा से बदतर है।
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पौष्टिक आहार के अभाव में सीएम के गृह जनपद में 54943 बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं। इनमें से 7151 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में शामिल हैं। यह संख्या 2014 में कुपोषण का शिकार एक लाख से अधिक बच्चों की तुलना में भले कम लग सकती है, मगर यह संकेत जरूर करती है कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई की धार काफी कमजोर है। यह बात तब और अहम हो जाती है, जब कुपोषण मिटाने के लिए चलाए जा रहे, अभियान पर पिछले साढ़े चार साल से सीएम योगी की सीधी नजर है। फिलहाल, अतिकुपोषित बच्चों को 31 दिसंबर तक स्वस्थ बनाने के लिए जिला व ब्लॉक स्तरीय अफसरों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई है।
लंबे समय तक गरीबी और बीमारी से जूझते रहे पूर्वांचल में कुपोषित बच्चों की तादाद काफी है। वर्ष 2014 में प्रदेश सरकार ने बच्चों का स्वास्थ्य सुधारने के लिए सुपोषण मिशन की शुरूआत की थी। वर्ष 2017 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने कुपोषण मिटाने पर सर्वाधिक जोर दिया। इसके लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन दिवस का आयोजन करने से लगायत गर्भवती महिलाओं व किशोरियों के लिए पौष्टिक आहार, समय से टीकाकरण आदि पर जोर दिया गया।
कुपोषित बच्चों के लिए रामबाण बताए गए सहजन के पौधे परिजनों में वितरित किए गए। कई लोगों को सरकार की तरफ से गाय भी दी गई। इन सारी कवायद के बावजूद बेहतर परिणाम सामने नहीं आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में अब भी 54943 बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से भी 7151 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में शामिल हैं।
गांव हो या शहर, हर जगह हैं कुपोषित बच्चे
कुपोषण की समस्या ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्र में भी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक पाली गांव में 89, हरैया में 47, नसरूद्दीन चक में 60, बेलवा रायपुर में 48, सराय गुलरिया में 58, मानीराम में 53, डोहरिया कला में 30, महराबारी में 32 और सरया तिवारी में 36 बच्चे कुपोषित श्रेणी में शामिल हैं। शहरी क्षेत्र के शाहपुर में 16, भैरोपुर में 36 और सेमरा नंबर एक में 38 बच्चे कुपोषित हैं।
215 गांवों में लगाए गए हैं अफसर
जिले के अति कुपोषित बच्चों को सुपोषित श्रेणी में लाने के लिए 215 गांवों में विशेष अभियान शुरू किया गया है। एक अक्तूबर से शुरू हुए अभियान के तहत 31 दिसंबर तक चिह्नित अति कुपोषित बच्चों को सुपोषित किया जाना है। इसके लिए 36 जिला स्तरीय अफसरों को दो-दो गांव आवंटित किए गए हैं। शेष 143 गांवों में ब्लॉक स्तरीय अफसरों को जिम्मेदारी दी गई है। इन अफसरों को संबंधित गांव में जाकर लोगों को कुपोषण के लक्षण व बचाव के उपाय बताते हुए इसके प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी मिली है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत कुमार सिंह ने कहा कि कुपोषण मिटाने का अभियान सतत है। वर्ष 2014 में एक लाख से अधिक बच्चे कुपोषित थे, जो अब घटकर करीब 55 हजार रह गए हैं। कुपोषित श्रेणी के बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए जागरूकता जरूरी है। इसीलिए 36 जिला स्तरीय अफसरों के अलावा अन्य ब्लॉक स्तरीय अफसरों को भी जिम्मेदारी दी गई है। इन अफसरों की निगरानी में गांव में कुपोषण मिटाने के लिए चलने वाली योजनाओं का पूर्ण क्रियान्वयन कराना है। इसके अलावा ये अफसर व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयास करेंगे।