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GDA: 38 साल में 47 उपाध्यक्ष बदले, गोरखपुर शहर का कैसे होगा सुनियोजित विकास

Wed, 21 Sep 2022 02:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 21 Sep 2022 02:13 PM IST
सार

जीडीए के उपाध्यक्ष रहे प्रेम रंजन सिंह का तबादला कर दिया गया है। इन्होंने अपने कार्यकाल में मानचित्र व्यवस्था को सुधारने और रामगढ़ताल समेत शहर की प्रमुख सड़कों के सुंदरीकरण के लिए काम किया है। करीब 14 माह में नई महायोजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू कराई।

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47 vice presidents changed in 38 years of GDA Gorakhpur
नए जीडीए उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर इन्होंने अभी कार्यभार नहीं संभाला है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की स्थापना (1983) नगर के सुनियोजित विकास के लिए की गई है। लेकिन, इसे संस्था का दुर्भाग्य कहा जाए या शहर के लोगों का, स्थापना के 38 साल के सफर में 47 उपाध्यक्ष बदल दिए गए। करीब छह उपाध्यक्ष तो अपना काम ठीक से समझ भी नहीं पाए थे कि उनका तबादला कर दिया गया। जानकार बताते हैं कि इसका असर शहर के सुनियोजित विकास पर पड़ता है।

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सवाल तो उठता ही है कि यदि किसी उपाध्यक्ष को केवल दो से छह माह का ही समय मिल पा रहा है, तो वह इतने कम समय में जीडीए का कितना भला कर पाया होगा? शहर के लिए क्या योजनाएं बनाई होंगी? यही नहीं यदि किसी अधिकारी को साल-डेढ़ साल का भी समय मिल जाए तो उसे पर्याप्त नहीं माना जाता है।
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अब जीडीए के उपाध्यक्ष रहे प्रेम रंजन सिंह का तबादला कर दिया गया है। इन्होंने अपने कार्यकाल में मानचित्र व्यवस्था को सुधारने और रामगढ़ताल समेत शहर की प्रमुख सड़कों के सुंदरीकरण के लिए काम किया है। करीब 14 माह में नई महायोजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू कराई। जाहिर है कि उनके तबादले से ये कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, नया अधिकारी बेहतर कार्य कर सकता है, लेकिन सवाल वही है कि क्या उसे पर्याप्त समय मिल पाएगा? यदि वह भी तबादले की परंपरा का शिकार हो गया तो योजनाएं प्रभावित होंगी।
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बताया जाता है कि डीके कोटिया जीडीए के अकेले ऐसे उपाध्यक्ष रहे, जिन्हें चार साल (27 मई 1986 से 29 मई 1990) तक कुर्सी संभालने का मौका मिला। उनके अलावा आज तक कोई ऐसा उपाध्यक्ष नहीं रहा, जो तीन साल का कार्यकाल पूरा कर सका हो। दो साल (21 मई 2002 से एक जुलाई 2004) तक का समय भी सिर्फ पूर्व उपाध्यक्ष राम सजीवन पूरा कर पाए थे।

जानकार कहते हैं कि जीडीए उपाध्यक्ष के धड़ाधड़ तबादले की ही देन है कि करीब चार दशक के बाद भी शहर का सुनियोजित विकास उस गति से नहीं हो सका जिस तरह से होना चाहिए था। सीएम सिटी होने के बाद विकास की रफ्तार बढ़ी, लेकिन उसमें योगदान जीडीए का विशेष नहीं रहा। जानकार बताते हैं कि शहर के विकास की रफ्तार और तेज हो सकती थी यदि जीडीए उपाध्यक्ष इतनी जल्दी-जल्दी नहीं बदले जाते।

 

साढ़े पांच साल में छह उपाध्यक्ष बदले

करीब साढ़े पांच साल में छह उपाध्यक्ष बदले गए। 30 जून 2017 में जीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष ओएन सिंह के तबादले के बाद एक जुलाई 2017 को उपाध्यक्ष बने वैभव श्रीवास्तव का नौ महीने बाद तबादला कर दिया गया। 23 अप्रैल 2018 को आए अमित बंसल एक साल तीन माह तक टिके और दो जुलाई 2019 को तबादला हो गया।

छह जुलाई 2019 को पदभार संभालने के छह महीने में ही दिनेश कुमार का तबादला हो गया। तीन जनवरी 2020 को गोरखपुर के सीडीओ पद से प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बने अनुज सिंह का भी कार्यकाल 14 फरवरी 2021 तक ही रहा। 15 फरवरी 2021 को प्रयागराज के सीडीओ पद से उपाध्यक्ष बनाए गए आशीष कुमार का पिछले साल जुलाई में तबादला कर दिया गया था। अब प्रेम रंजन सिंह का तबादला भी कर दिया गया है। उनकी जगह एक दो दिन में महेंद्र सिंह तंवर कार्यभार संभालने वाले हैं।

आईएएस भी नहीं जम सके, 10 साल में 12 का तबादला
पीसीएस ही नहीं, आईएएस अफसर भी जीडीए के उपाध्यक्ष की कुर्सी पर साल-सवा साल से अधिक नहीं टिक सके। पिछले नौ साल में 11 आईएएस अफसरों के तबादले किए गए हैं। वर्ष 2012 से अब तक जीडीए में कुल 14 उपाध्यक्ष बदले। इनमें से 12 आईएएस थे। इस दौरान दो पीसीएस अफसर डीएस उपाध्याय और एके तिवारी ही इस पद पर तैनात रहे।

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