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गोरखपुर विश्वविद्यालय: परीक्षा में मॉनिटरिंग सेल से नहीं जुड़े 103 कॉलेज, मिली चेतावनी

Wed, 28 Jul 2021 03:59 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 28 Jul 2021 03:59 PM IST
सार

गोविवि तथा संबद्ध महाविद्यालयों में वार्षिक परीक्षा शुरू हुई। पहले दिन 171 केंद्रों पर परीक्षा, 48 हजार हुए शामिल।
 

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103 colleges not associated with monitoring cell in examination in Gorakhpur University
गोरखपुर विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करते कुलपति प्रो राजेश सिंह - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षा के पहले दिन मॉनिटरिंग सेल से नहीं जुड़ने वाले 103 कॉलेजों को चेतावनी दी गई। विवि एवं संबद्ध महाविद्यालयों में मंगलवार से वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गईं। पहले दिन 171 केंद्रों पर 48 हजार छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। हालांकि ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था फेल हो गई। 103 परीक्षा केंद्र (महाविद्यालय) इस सेल से नहीं जुड़ सके। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन ने महाविद्यालयों के केंद्राध्यक्षों पर कड़ी नाराजगी जताई है। दोबारा समस्या आने पर केंद्र बदलने तक की चेतावनी भी दी है। सभी से कहा है कि जल्द से जल्द मॉनिटरिंग सेल से बातचीत कर तकनीकी व्यवधान दूर करा लें।
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विश्वविद्यालय मीडिया सेल के मुताबिक परीक्षा के पहले दिन पहली पाली में 93 केंद्र बनाए गए थे। मॉनिटरिंग सेल ने परीक्षा के दौरान जब इनसे संपर्क करने की कोशिश की तो महज 30 केंद्रों के केंद्राध्यक्षों से ही संपर्क हो सका जबकि 63 की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। दूसरी पाली में कुल 78 केंद्र बनाए गए थे। इसमें से सेल का संपर्क केवल 40 केंद्राध्यक्षों से हो सका जबकि 40 महाविद्यालयों से लाख प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हो सका। 
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विवि के कंप्यूटर विभाग में बने सेंट्रल ऑनलाइन मॉनिटरिंग सेल में समन्वयक डॉ. सचिन सिंह की टीम दोनों ही पालियों में केंद्रों से संपर्क करने की कोशिश करती रही। कुछ केंद्रों में तकनीकी जानकारी के अभाव में कनेक्टिविटी नहीं हो सकी तो कुछ के डीवीआर बंद मिले। विवि प्रशासन के मुताबिक ऐसे केंद्रों पर तत्काल उड़ाका दल और पर्यवेक्षक भेजकर नकनविहीन परीक्षा सुनिश्चित कराई गई। शुचितापूर्ण परीक्षा संपन्न कराने के लिए विवि ने सात उड़ाका दल और 20 आब्जर्वर नियुक्त किए हैं।
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कुलपति ने किया परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण
कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने परीक्षा के पहले दिन सेंट एंड्रयूज कॉलेज, इस्लामिया कॉलेज ऑफ कॉमर्स और विवि के दीक्षा भवन में हो रही परीक्षा का निरीक्षण किए। इस दौरान कोविड प्रोटोकॉल के पालन को लेकर उन्होंने केंद्राध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए।

इन नंबरों पर फोन कर लिंक से जुड़ें महाविद्यालय
वार्षिक परीक्षाओं के पहले दिन जो महाविद्यालय सीसीटीवी कैमरा चालू रहने के बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए लिंक से नहीं जुड़ सके, ऐसे महाविद्यालयों के केंद्राध्यक्षों और प्राचार्यों को इसे लेकर आगे से सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। विवि प्रशासन ने केंद्राध्यक्षों से कहा है कि

वह निर्धारित नंबरों पर फोन करके अपने महाविद्यालय को मॉनिटरिंग सेल से जुड़वा लें। अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें। केंद्राध्यक्ष 9792511544,
9910146475, 9453305264, 9451929427, 9336402321 नंबर पर फोन कर सकते हैं।

एमए अंतिम वर्ष की मौखिक परीक्षा नहीं होगी

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार समाजशास्त्र विभाग के एमए अंतिम वर्ष (सत्र 2020 21) के व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की मौखिकी परीक्षा नहीं कराई जाएगी। मौखिकी के स्थान पर विद्यार्थियों को असाइनमेंट जमा कराना होगा। समाजशास्त्र के एमए द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में से किसी विषय को चयनित करके असाइनमेंट कम से कम 10 पेज में लिखना है। असाइनमेंट के मुख्य पृष्ठ पर विवि का नाम परीक्षार्थी का नाम, विषय एवं अनुक्रमांक अंकित होना चाहिए। जिन विद्यार्थियों ने अभी तक असाइनमेंट जमा नहीं कराया है, वह जल्द ही इसे विभाग में जमा करा दें। विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता पांडेय ने बताया कि 476 विद्यार्थियों में से अब तक मात्र 191 विद्यार्थियों ने असाइनमेंट जमा किया है। जो विद्यार्थी असाइनमेंट नहीं जमा करेंगे उनका रिजल्ट अपूर्ण रहेगा। अत: सभी आवश्यक रूप से शीघ्र ही जमा करें।
 
एमए समाजशास्त्र द्वितीय वर्ष के सचिन ने बताया कि नंबर के बहुविकल्पीय सवाल आए थे, जिससे बहुत दिक्कत हुई। कोरोनाकाल में पूरी पढ़ाई तो हुई नहीं, गाइड से ही तैयारी की गई। दो सवालों में एक का लिखित देना था जो 30 नंबर का था। कोरोना प्रोटोकॉल को पूरा पालन हुआ है।
 
परीक्षा का पूरा पैटर्न बदल गया है। बहुविकल्पीय सवालों को हल करना आसान नहीं है। जब पढ़ाई ही नहीं हुई है तो पूरे सिलेबस से कैसे तैयारी कर पाएंगे। इसका ध्यान देना चाहिए था।
शिवांगी गुप्ता, एमए समाजशास्त्र द्वितीय वर्ष
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