देश की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट होमी व्यारावाला, जिन्होंने महात्मा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू को किया था अपने कैमरे में कैद
हम हर रोज अपने आसपास बहुत कुछ देखते हैं लेकिन आज से अस्सी नब्बे साल पहले ऐसा नहीं था। जिंदगी इतनी आसान और सामान्य नहीं थी। अंग्रेजों के जमाने में महिलाओं के पास इतनी आजादी नहीं थी। हालांकि हर क्षेत्र में कोई न कोई महिला अपने कदम रख एक नया मुकाम बनाने की कोशिश कर रही थी। इसी कोशिश में लगीं थीं देश की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट, जो अपने ब्लैक एंड व्हाइट कैमरे से नेताओं से लेकर आम लोगों की तस्वीरें खींचा करती थीं। इनका नाम है होमी व्यारावाला। देश की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट के गौरव के साथ ही उन्हें भारत सरकार ने पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया था।
होमी व्यारावाला का जन्म गुजरात के नवसारी में एक पारसी परिवार में दिसंबर 1913 को हुआ था। उनके पिता पारसी उर्दू थियेटर के मशहूर अभिनेता थे। इसलिए घर में माहौल भी थोड़े खुलेपन का था। जिसकी वजह से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद होमी ने मुंबई के एक दैनिक समाचार पत्र में फोटो खींचना शुरू किया। अपने इसी शौक को उन्होंने पेशा बना लिया और प्रोफेशनल रूप से तस्वीरें खींचने लगीं। दुनिया में छिड़े दूसरे विश्व युद्ध के दौरान होमी को ब्रिटिश इंफार्मेशन सर्विस ने नई दिल्ली में नौकरी दी। हालांकि साल 1970 में पति के निधन के बाद होमी व्यारावाला ने फोटोग्राफी को छोड़ दिया।
बताते हैं कि होमी जी को जवाहर लाल नेहरू की तस्वीरें खींचना काफी पसंद था। उन्होने 1947 में लाल किले पर फहराए गए झंडे की तस्वीर के साथ ही लार्ड माउंटबेटन की वापसी महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की भी तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की थीं। साल 2010 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। जिसके बाद 2012 में सीढि़यों से गिरने के बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। होमी व्यारावाला ने अपनी जिंदगी के 40 साल करीब फोटोग्राफी की थी।