स्किनकेयर टिप्स: घर से बाहर निकलते समय सनस्क्रीन भूल जाते हैं? त्वचा को हो सकता है ये नुकसान
Skin Care Tips: लंबे समय तक UV एक्सपोजर टैनिंग, पिगमेंटेशन, समय से पहले झुर्रियां या त्वचा कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। इसलिए अपनी त्वचा के अनुसार सही सनस्क्रीन चुनें और इसे स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बनाएं। याद रखें, सनस्क्रीन के साथ छाया और सुरक्षात्मक कपड़ों का इस्तेमाल भी जरूरी है।
विस्तार
sunscreen benefits for skin: आजकल स्किन केयर रूटीन में सनस्क्रीन को बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन कई लोग इसे सिर्फ गर्मियों में या तेज धूप में बाहर निकलते समय ही लगाते हैं। कुछ लोग तो रोज सनस्क्रीन लगाना जरूरी ही नहीं समझते। क्या आप जानते हैं कि सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें त्वचा को प्रभावित कर सकती हैं, भले ही मौसम ठंडा हो या आसमान में बादल छाए हों?
नियमित रूप से सनस्क्रीन न लगाने से त्वचा पर टैनिंग, समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण और धूप से होने वाली दूसरी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, इसका असर आपकी धूप में रहने की अवधि, त्वचा के प्रकार और UV एक्सपोजर पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं कि रोज सनस्क्रीन न लगाने से त्वचा पर क्या असर पड़ सकता है और इससे बचाव कैसे करें।
1. त्वचा पर टैनिंग बढ़ सकती है
धूप में मौजूद UV किरणों के संपर्क में आने से त्वचा में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ सकता है। इसके कारण त्वचा का रंग गहरा दिखाई देने लगता है, जिसे टैनिंग कहा जाता है। सनस्क्रीन UV एक्सपोजर को कम करने में मदद करती है, हालांकि यह पूरी तरह टैनिंग को रोकने की गारंटी नहीं देती।
2. समय से पहले झुर्रियां आ सकती हैं
सूरज की UVA किरणें त्वचा के अंदर तक पहुंचकर कोलेजन और इलास्टिन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। समय के साथ इससे महीन रेखाएं, झुर्रियां और त्वचा में ढीलापन दिखाई दे सकता है। नियमित सनस्क्रीन का इस्तेमाल फोटोएजिंग यानी धूप के कारण होने वाली समय से पहले उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को कम करने में मदद करता है।
3. चेहरे पर काले धब्बे बढ़ सकते हैं
अगर आपकी त्वचा पर पहले से पिगमेंटेशन, मेलाज्मा या मुंहासों के बाद काले निशान हैं, तो धूप में रहने से ये और गहरे हो सकते हैं। ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन त्वचा को UVA और UVB किरणों से बचाने में मदद करती है। पिगमेंटेशन की समस्या होने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।
4. सनबर्न का खतरा बढ़ सकता है
तेज धूप में पर्याप्त सुरक्षा के बिना रहने से त्वचा लाल हो सकती है, उसमें जलन हो सकती है और दर्द भी महसूस हो सकता है। गंभीर सनबर्न में त्वचा पर छाले भी पड़ सकते हैं। सनस्क्रीन के साथ छाया, पूरी बांह के कपड़े और टोपी का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
5. त्वचा रूखी और बेजान दिख सकती है
लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने से त्वचा की बाहरी परत और उसकी नमी बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे त्वचा रूखी, खुरदरी या बेजान दिखाई दे सकती है। मॉइस्चराइजर और नियमित सन प्रोटेक्शन त्वचा की देखभाल में मदद कर सकते हैं।
6. त्वचा को होने वाला नुकसान समय के साथ जमा हो सकता है
धूप से होने वाला नुकसान हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता। बार-बार UV किरणों के संपर्क में आने से त्वचा में समय के साथ बदलाव जमा हो सकते हैं। इसलिए केवल तब सनस्क्रीन लगाना पर्याप्त नहीं है, जब धूप बहुत तेज महसूस हो। रोजमर्रा के बाहरी कामों के दौरान भी सूर्य की किरणों से बचाव पर ध्यान देना चाहिए।
7. त्वचा कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है
UV किरणों का अत्यधिक और लंबे समय तक संपर्क त्वचा कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। सनस्क्रीन का नियमित और सही इस्तेमाल इस जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह पूरी सुरक्षा नहीं देती। त्वचा पर कोई नया या बदलता हुआ तिल, न भरने वाला घाव या असामान्य धब्बा दिखाई दे तो डॉक्टर से जांच कराएं।
रोज सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका क्या है?
- कम से कम SPF 30 वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें, जो UVA और UVB दोनों से सुरक्षा देती हो।
- बाहर निकलने से लगभग 15 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं और लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें।
- बाहर रहने के दौरान लगभग हर दो घंटे में दोबारा लगाएं। तैरने, पसीना आने या तौलिये से त्वचा पोंछने के बाद भी दोबारा लगाएं।
- चेहरे के साथ गर्दन, कान और शरीर के खुले हिस्सों पर भी सनस्क्रीन लगाएं।
- तेज धूप के समय छाया में रहें और जरूरत पड़ने पर टोपी, धूप का चश्मा तथा सुरक्षात्मक कपड़ों का इस्तेमाल करें।
नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं। त्वचा संबंधी लगातार समस्या होने पर त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करें।