‘मुझे राजनीतिक रंग न दें’, क्यों बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत के बाद प्रोसेनजीत चटर्जी ने कही ये बात?
Prosenjit Chatterjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद अब प्रोसेनजीत चटर्जी ने क्यों कहा कि उन्हें राजनीतिक रंग ने दें? जानिए क्या है इसके पीछे की असल वजह…
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हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए। यहां 15 साल से सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस की हार हुई और भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की। बंगाली अभिनेता रुद्रनील घोष ने भी भाजपा के टिकट पर शिबपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच ऐसी चर्चाएं उठीं कि अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी ने रुद्रनील को उनकी जीत पर बधाई देने के लिए फोन किया था। चर्चाओं के बढ़ने पर अब खुद प्रोसेनजीत ने इन पर प्रतिक्रिया दी है और सच्चाई बताई है।
मैंने किसी को फोन नहीं किया
चर्चाएं ज्यादा बढ़ने पर इस पूरे मामले को लेकर अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी ने अपने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा किया है। इस पोस्ट में उन्होंने इस तरह की अफवाहों को पूरी तरह से खंडन करते हुए लोगों से उन्हें किसी राजनीतिक पार्टी से न जोड़ने का आग्रह भी किया है।
अपनी पोस्ट में एक्टर ने लिखा, ‘मैं कई साल से अत्यंत सम्मान के साथ व्यवहार करता आ रहा हूं और भविष्य में भी ऐसा ही करना चाहता हूं। आप सभी से मेरा एक विनम्र निवेदन है - कृपया मुझे किसी भी प्रकार से राजनीतिक रंग न दें। मैंने किसी को फोन नहीं किया; बल्कि मेरे छोटे भाई ने मुझे फोन किया। बड़े भाई होने के नाते किसी को आशीर्वाद देना मेरा कर्तव्य है और मैंने वही किया है। इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।’
राजनीति में सक्रिय नहीं हैं प्रोसेनजीत
हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित प्रोसेनजीत चटर्जी राजनीति में सक्रिय नहीं रहे हैं और न ही उन्होंने किसी भी क्षेत्र में चुनाव लड़ा है। उन्होंने अपने करियर में रुद्रनील के साथ कई बंगाली फिल्मों में काम किया है। प्रोसेनजीत बंगाली फिल्मों के अलावा कई हिंदी फिल्मों व सीरीज में भी नजर आ चुके हैं। वो आखिरी बार पिछले साल रिलीज हुई राजकुमार राव की फिल्म ‘मालिक’ में नजर आए थे।
पश्चिम बंगाल चुनाव की बात करें तो ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस यहां पिछले 15 साल से सरकार में थी। लेकिन इस बार बाजी पलट गई और टीएमसी को हराकर भाजपा ने शानदार जीत हासिल की। बीजेपी ने 294 विधानसभा सीटों में से 207 पर जीत हासिल की।
जबकि टीएमसी सिर्फ 80 सीटों पर सिमटकर रह गई। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी सीट से चुनाव हार गईं। हालांकि, उन्होंने बीजेपी पर बेईमानी के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।