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कल्पना के सहारे बहुत नहीं उड़ सके एंडटीवी के 'हनुमान', इन वजहों से बंद होने जा रहा धारावाहिक

Sat, 03 Oct 2020 02:06 PM IST
shrilata biswas अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: shrilata biswas Updated Sat, 03 Oct 2020 02:06 PM IST
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kahat hanuman jai shri ram going to be off air soon
कहत हनुमान जय श्री राम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

टीवी पर दिखाई जाने वाली धार्मिक कथाओं में अपनी मनगढ़ंत कहानियां जोड़कर पर्दे पर परोसने का निर्माताओं का फॉर्मूला असफल होता हुआ नजर आ रहा है। देश के दर्शक धार्मिक कथाओं पर बने धारावाहिकों और फिल्मों को देखना बहुत पसंद करते हैं लेकिन, उनका मन तब खट्टा हो जाता है जब उन कथाओं के साथ धारावाहिक के निर्माता कुछ अपनी तरफ से जोड़ जाड़ कर पेश करते हैं। उसी का फल है कि एंडटीवी का एक धारावाहिक 'कहत हनुमान जय श्री राम' टीआरपी न मिलने की वजह से बंद होने जा रहा है, जानकारी के मुताबिक इसका आखिरी एपोसोड नौ अक्तूबर को प्रसारित होगा।

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देश में कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन का यह दौर ऐसा रहा है जब दूरदर्शन और बाकी चैनलों पर रामानंद सागर का 'रामायण' और बी आर चोपड़ा के 'महाभारत' जैसे प्रतिष्ठित धारावाहिकों को फिर से प्रसारित किया गया। इन धारावाहिकों का खुमार दर्शकों के सिर इस कदर चढ़कर बोला कि लॉकडाउन में इन धारावाहिकों ने टीआरपी के वर्षों पुराने रिकॉर्ड तक तोड़ दिए। टीवी चैनलों को इससे मोटा फायदा हुआ और भारी टीआरपी आने की वजह से उन्हें बड़ी संख्या में विज्ञापन भी मिले। लेकिन, इस दौर में भगवान श्री राम के परमभक्त रहे हनुमान पर आधारित बना टीवी का यह धारावाहिक अगर टीआरपी न मिलने की वजह से बंद होता है तो यह निर्माताओं और लेखकों के लिए चिंता का विषय है।
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इस मुद्दे पर अमर उजाला ने वरिष्ठ समीक्षक इंद्रमोहन पन्नू से बात की। उन्होंने वह दौर भी देखा है जब रामायण, महाभारत और श्री कृष्णा जैसे धारावाहिक दर्शकों के लिए आस्था का प्रतीक होते थे। और, उन्होंने यह दौर भी देखा है जब इन्हीं कथाओं को काल्पनिक कहानियों के साथ जोड़कर पर्दे पर पेश किया जा रहा है। आज के समय में इस तरह के धारावाहिकों को टीआरपी न मिलने की सबसे बड़ी वजह इंद्रमोहन लेखकों को मानते हैं। उनका कहना है कि इस तरह के जो धार्मिक धारावाहिक होते हैं, वह सीधे लोगों की भावनाओं से जुड़े होते हैं। और, आजकल के लेखक इनमें मिलावट करके सीधे-सीधे लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं।

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कहत हनुमान जय श्री राम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अपनी बात को विस्तार से बताते हुए इंद्रमोहन कहते हैं, 'जब एकता कपूर ने धारावाहिक 'कहानी हमारे महाभारत की' बनाया तब उसमें उन्होंने किसी भी पांडव को सिर पर मुकुट नहीं पहनाया। उनके लेखकों का तर्क था कि शायद उस समय लोग मुकुट नहीं पहनते होंगे क्योंकि जब लड़ाइयां होती थी तो मुकुट जैसी चीजों को गिरने का खतरा रहता था। अब उस समय के लोगों की बनी हुई कोई तस्वीर तो है नहीं। इन लोगों का जिस तरह से बखान ग्रंथों और पुराणों में किया गया है, उसी तरह से पर्दे पर इनका चित्रण होता है। अब अपनी तरफ से इस तरह की चीजों को गढ़ लेना तो गलत ही है। लोगों ने अब तक जिन रूपों में उन्हें पढ़ा और टीवी पर देखा है, वह छवि उनके दिमाग में बनी हुई है। और, वह अपने देवताओं को उसी रूप में देखना चाहते हैं।'

पन्नू बताते हैं,  'वैसे एकता कपूर के ज्यादातर धारावाहिक सैकड़ों एपिसोड तक टीवी पर चलते हैं। शायद इसी का यह परिणाम है कि एकता का यह धारावाहिक मात्र 75 एपिसोड के बाद ही बंद हो गया। धारावाहिक में पांडवों की वेशभूषा पर तो बी आर चोपड़ा के 'महाभारत' में भीष्म पितामह की भूमिका निभाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने एकता पर आरोप लगाया कि महाभारत जैसे पवित्र महाकाव्य का मजाक उड़ाया है। इस शो में पुरुष कलाकार अपने सिक्स पैक एब्स बनाकर और सीने पर उस्तरा चलवाकर आए। और महिला कलाकारों को ज्यादा अधकटे घटे ब्लाउज पहनाए गए। इसलिए, यह शो न तो दर्शकों ने पसंद किया और न ही समीक्षकों ने इसकी वाहवाही की।'

लेखकों पर सवाल उठाते हुए इंद्रमोहन कहते हैं कि आजकल के लेखक सिंथेटिक हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'इस तरह के धारावाहिकों को लिखने वाले लेखकों का एक स्तर होना चाहिए। एक काल्पनिक धारावाहिक लिखना अलग बात है और इस तरह की धार्मिक कथाओं पर आधारित धारावाहिक लिखना बहुत बड़ी चीज है। इसके लिए शोध कार्य बहुत जरूरी है। जब 'महाभारत' बना, उस समय बी आर चोपड़ा के पास एक बड़ी शोध टीम थी। उन्होंने पुणे के एक कॉलेज से इसके तथ्यों पर गहराई से शोध किया था। लेकिन, आजकल कोई इतनी मेहनत नहीं करना चाहता। सब तकनीक के सारे चलना चाहते हैं। इस तरह न तो बनने वाला धारावाहिक धार्मिक रह पाता है और न ही काल्पनिक।'

धार्मिक कथाओं पर बने धारावाहिकों को बुजुर्ग तो देखते ही हैं, साथ ही युवा भी बड़े चाव से देखते हैं। आजकल का युवा तकनीक से पूरी तरह वाकिफ है और वह जानता है कि पिछले समय में इस तरह की चीजें बिल्कुल नहीं होंगी जैसी इन धारावाहिकों में दिखाई जाती हैं। और, बुजुर्गों को तो कथाएं सुनने, पढ़ने और पुराने धारावाहिकों को देखने के बाद ज्यादातर चीजें पता ही होती हैं। इंद्रमोहन कहते हैं कि अगर भगवान राम के परम भक्त रहे हनुमान के बारे में बिना जानकारी इकट्ठा किए कोई भी कहानी गढ़ी जाएगी तो वह तुरंत पकड़ में आ जाएगी। कलाकार चाहे जितनी भी मेहनत करें लेकिन कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता। इनके जरिए लोगों की धार्मिक भावनाएं नहीं बदली जा सकतीं। इन्हीं दिक्कतों के चलते एंडटीवी का शो 'कहत हनुमान जय श्री राम' बंद होने जा रहा है। इस बारे में एंडटीवी की आधिकारिक प्रवक्ता की प्रतिक्रिया संपर्क किए जाने के बाद भी हासिल नहीं हो सकी है।  

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