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Sri Ramana: दिग्गज पटकथा लेखक श्री रमण का निधन, 70 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
Wed, 19 Jul 2023 09:06 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: मोहम्मद फायक अंसारी
Updated Wed, 19 Jul 2023 09:06 PM IST
सार
बताया जा रहा है कि लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। उनके उल्लेखनीय कार्यों में 'मिथुनम' (2012) की पटकथा शामिल है, जिससे उन्हें काफी प्रशंसा मिली।
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श्री रमण
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मशहूर पटकथा लेखक श्री रमण का लंबी बीमारी के कारण 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपनी लेखनी से भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अमिट छाप छोड़ी। श्री रमण के निधन से उनके प्रशंसकों और फिल्म बिरादरी को लोगों को गहरा सदमा पहुंचा है। वह तेलुगू सिनेमा और साहित्य दोनों में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए पहचाने जाते थे।
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लंबे समय से चल रहा था इलाज
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 19 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। उनके उल्लेखनीय कार्यों में 'मिथुनम' (2012) की पटकथा शामिल है, जिससे उन्हें काफी प्रशंसा मिली। गायक-अभिनेता एसपी बालासुब्रमण्यम और लक्ष्मी अभिनीत यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म रमण के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित थी। इस फिल्म को नंदी पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
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इन रचनाओं से मिली प्रसिद्धि
बता दें कि आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में जन्मे श्री रमण एक साप्ताहिक पत्रिका में अपने आकर्षक लेखों के माध्यम से प्रसिद्ध हुए थे। अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अक्षरा थुनीरम उपनाम अपनाकर कई अन्य पत्रिकाओं में व्यंग्य रचनाए भी लिखीं। उनकी कई उल्लेखनीय रचनाओं में 'जोकी ज्योति', 'श्री चैनेल', 'पंडारी' और 'मोगली रेकुलु' जैसी कहानियां हैं।
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लंबे समय से चल रहा था इलाज
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 19 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। उनके उल्लेखनीय कार्यों में 'मिथुनम' (2012) की पटकथा शामिल है, जिससे उन्हें काफी प्रशंसा मिली। गायक-अभिनेता एसपी बालासुब्रमण्यम और लक्ष्मी अभिनीत यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म रमण के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित थी। इस फिल्म को नंदी पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
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इन रचनाओं से मिली प्रसिद्धि
बता दें कि आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में जन्मे श्री रमण एक साप्ताहिक पत्रिका में अपने आकर्षक लेखों के माध्यम से प्रसिद्ध हुए थे। अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अक्षरा थुनीरम उपनाम अपनाकर कई अन्य पत्रिकाओं में व्यंग्य रचनाए भी लिखीं। उनकी कई उल्लेखनीय रचनाओं में 'जोकी ज्योति', 'श्री चैनेल', 'पंडारी' और 'मोगली रेकुलु' जैसी कहानियां हैं।