Kajol Video Interview: नब्बे के दशक और आज की शूटिंग में कितना अंतर? काजोल ने सिनेमा को लेकर कही ये बात
फिल्म 'दो पत्ती' में काजोल ने एक पुलिस ऑफिसर का रोल किया है, वहीं कृति सेनन डबल रोल में हैं। हाल ही में अमर उजाला को दिए गए एक इंटरव्यू में जब डबल रोल पर चर्चा हुई तो काजोल ने अपने समय की मुश्किलें साझा कीं। कैसे नब्बे के दशक में डबल रोल शूट करना एक मुश्किल भरा काम हुआ करता था? इस बारे में बताया।
विस्तार
आज यानी 25 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रोमांटिक थ्रिलर फिल्म 'दो पत्ती' रिलीज हुई है। इसमें कृति सेनन ने डबल रोल किया है, इस रोल को निभाने में काजोल उनके लिए काफी मददगार साबित हुईं। दरअसल, काजोल ने अपने करियर के शुरुआती दौर में डबल रोल वाली फिल्में की हैं। उनके पास डबल रोल करने का बहुत अच्छा अनुभव है। साथ ही नब्बे के दशक में काजोल ने जिन फिल्मों में डबल रोल किया, उन्हें शूट करते हुए, उन्हें काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। उन्हीं मुश्किलों के बारे में खुद काजोल ने बताया।
टेक्निकल सुविधा का रहा अभाव
काजोल कहती हैं, 'आज तो सिनेमा टेक्निकली बहुत एडवांस हो गया है। लेकिन मैंने जब फिल्मी करियर शुरू किया, तब ऐसा नहीं था। उस समय शूटिंग करना काफी मुश्किल होता था। खासकर अगर डबल रोल कर रहे हैं तो समस्या और भी बढ़ जाती थी। ऐसे में कलाकार को बहुत सोच-समझकर अभिनय करना होता था। एक सीमित समय में ही अपना शॉट देना होता था।' दरअसल, काजोल नब्बे और उससे पहले के दशक की बात कर रही हैं, जब चार मिनट का कैमरा रोल होता था, उसमें ही कलाकार को अपना सीन ओके करना होता। दोबारा अपना सीन करने की गुंजाइश बिल्कुल नहीं बचती थी।
दो फिल्मों में किया डबल रोल
काजोल ने 'दुश्मन (1998)' और 'कुछ खट्टी कुछ मीठी (2001)' में डबल रोल किया। 'दुश्मन' एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म थीं, इस फिल्म को दर्शकों ने काफी सराहा। इस फिल्म में काजोल का रोल काफी चैलेंजिंग था। उन्होंने फिल्म में दो बहनों का किरदार किया, जिसमें एक बहन का रेप और मर्डर हो जाने पर दूसरी बहन, कातिल से बदला लेती है। वहीं अगर 'कुछ खट्टी कुछ मीठी' की बात की जाए तो इसमें भी काजोल ने दो बहनों की भूमिका निभाई, लेकिन इसमें काजोल को कॉमेडी करने का अवसर मिला। फिल्म में काजोल की कॉमेडी टाइम काफी अच्छी रही। दर्शकों ने भी उन्हें कॉमिक रोल में काफी पसंद किया।
सिर्फ फिल्म को देती हैं अहमियत
काजोल एक मेहनती कलाकार हैं। वह जब सेट पर होती हैं तो सिर्फ फिल्म को अहमियत देती हैं। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि किसी फिल्म का निर्देशक नया है या नामी। यह नजरिया काजोल का अपने करियर की शुरुआत से रहा है। वह कहती हैं, 'मैंने तो सबसे ज्यादा नए निर्देशकों के साथ काम किया है। मैं हर निर्देशक को कहती हूं कि सबसे ज्यादा अहम हमारी फिल्म है। हमें सेट पर बस फिल्म को ही अहमियत देनी चाहिए।'