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Sanjay Leela Bhansali: पिता की आखिरी ख्वाहिश नहीं पूरी कर पाए संजय लीला भंसाली, इस बात का रहेगा हमेशा मलाल

Thu, 02 May 2024 07:35 PM IST
अनुपमा कुमारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अनुपमा कुमारी Updated Thu, 02 May 2024 07:35 PM IST
सार

संजय लीला भंसाली के पिता नवीन भंसाली भी एक फिल्म निर्माता थे। उनके पिता को वह सफलता नहीं मिली जिसके वे हकदार थे। अपने पिता के बारे में बात करते हुए निर्देशक कहते हैं, 'पापा आखिरी दिनों में अपनी जड़ों में लौट जाना चाहते थे।

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Sanjay Leela Bhansali talks about his father says on his death bed he wanted to connect with his roots
संजय लीला भंसाली - फोटो : इंस्टाग्राम

विस्तार


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बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक संजय लीला भंसाली जब भी कोई फिल्म बनाते हैं तो वह फिल्म लार्जर दैन लाइफ ही होती है। उनकी फिल्में अपनी भव्यता के लिए मशहूर हैं। इन दिनों निर्देशक अपनी पहली वेब सीरीज 'हीरामंडी: द डायमंड बाजार' को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। हाल ही में अपने शो के प्रमोशन के दौरान संजय लीला भंसाली अपने पिता से जुड़ी कई बातों को याद करते नजर आए। 

नहीं पूरी कर सके पिता की आखिरी ख्वाहिश 
संजय लीला भंसाली के पिता नवीन भंसाली भी एक फिल्म निर्माता थे। उनके पिता को वह सफलता नहीं मिली जिसके वे हकदार थे। अपने पिता के बारे में बात करते हुए निर्देशक कहते हैं, 'पापा आखिरी दिनों में अपनी जड़ों में लौट जाना चाहते थे। एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि वे पाकिस्तानी गायिका रेशमा का गाया हुआ गाना 'हायो रब्बा' सुनना चाहते हैं'। 
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जिंदगी अजीब है 
संजय लीला भंसाली अपनी बात जारी रखते हुए कहते हैं, 'मैं जब कैसेट लेकर लौटा तब तक वे कोमा में जा चुके थे। वे नहीं सुन पाए उस गाने को और मेरी मां बार-बार मुझसे कह रही थी कि मैं उस गाने को बजा दूं। उस वक्त न तो वहां जगह थी और न ही सही समय कि मैं उस गाने को बजा पाता। जिंदगी बहुत अजीब है।अब बताइए क्या मैं कभी भी इस इमोशन को सिनेमा में दिखा सकता हूं। आप सिनेमा में जिंदगी के हर रंग को चाह कर भी नहीं दिखा सकते हैं'। 

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छह साल की उम्र में सिनेमा से हुआ प्यार 
संजय लीला भंसाली सिर्फ फिल्में बनाते नहीं हैं, बल्कि वे फिल्म के निर्माण की प्रकिया को जीते हैं, अपने किरदारों को वे दिल से रचते हैं। सिनेमा उनके लिए सिर्फ काम नहीं है। संजय कहते हैं, 'जब मैं छह साल का था तब मेरे पिता पहली बार मुझे एक फिल्म के सेट पर ले गए थे और सच बता रहा हूं मैं उस वक्त सिर्फ और सिर्फ वहीं रहना चाहता था। मुझे न तो क्रिकेट खेलने का मन होता था और न ही स्कूल जाने का। मैं शायद तब से ही सिनेमा से जुड़ गया था'। 
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