Amar Ujala Samwad: 'बचपन में बॉलीवुड फिल्में 30 से 40 बार देखता था', संवाद में बोले लाइफ कोच डॉ. मिकी मेहता
Amar Ujala Samwad 2025: अमर उजाला का वैचारिक संगम संवाद कार्यक्रम का आज गुरुवार को लखनऊ में गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आगाज हो चुका है। प्रतिष्ठित लाइफ और फिटनेस कोच डॉ. मिकी मेहता ने यहां कई दिलचस्प बातें साझा कीं।
विस्तार
साल 2025 के पहले अमर उजाला संवाद का आगाज हो चुका है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। यहां खेल से लेकर राजनीति, धर्म, स्वास्थ्य और फिल्म जगत की दिग्गज हस्तियां शामिल हुई हैं। प्रतिष्ठित लाइफ और फिटनेस कोच मिकी मेहता ने अमर उजाला संवाद में हिस्सा लिया है। यहां उन्होंने फिल्मों के प्रति अपनी दिलचस्पी के बारे में बात की, साथ ही सिनेमा पर सेहत के प्रभाव पर भी विचार रखे।
लाइफ कोच न होते तो कलाकार होते
डॉ. मिकी मेहता ने अमर उजाला संवाद में सेहत और खानपान से जुड़े टिप्स साझा किए। इसके अलावा उन्होंने बताया कि सिनेमा में उनकी बेहद दिलचस्पी है। डॉ. मेहता से संवाद में जब पूछा गया कि क्या आप लाइफ में कुछ और भी बनना चाहते थे? इस पर उन्होंने कहा, 'मैं बचपन में बॉलीवुड की फिल्में 20 बार, 30 बार और 40 बार देखता था। स्कूल नहीं जाता था। स्कूल से गुटली मारकर फिल्म देखता था। अगर मैं इस लाइन में नहीं आता तो शायद मैं एक्टर बनता'।
सिनेमा का सेहत से है नाता, बीपी पर पड़ सकता है असर
डॉ. मेहता से आगे सवाल किया गया कि, जब फिल्मों की बात हुई तो क्या जब हम किसी विलेन का डायलॉग बोलते हैं तो क्या बीपी हाई होता है? और जब हम कोई कॉमेडी मूवी देखते हैं तो क्या सेहत अच्छी होती है? क्या यह देखना चाहिए, क्योंकि लोग बोलते हैं कि मत देखो स्क्रीन कम देखो। इस पर उन्होंने जवाब दिया, 'फिल्मों में जब हम अपना आपा खो बैठते हैं। दृष्टा भाव छोड़कर हम किरदार, फिल्म और कहानी में घुस जाते हैं तो बीपी बढ़ जाता है'।
फिल्मों से घट-बढ़ सकता है बीपी
डॉ. मेहता ने आगे कहा, 'जब हम दृष्टा भाव से देखते हैं तो फिल्म को एंजॉय कर सकते हैं। गब्बर सिंह, अमरीश पुरी और गुलशन ग्रोवर को देखकर बीपी बढ़ भी सकता है। जॉनी लीवर और असरानी को देखकर बीपी घट भी सकता है, क्योंकि ये सारी चीजें योग के आधार पर हैं।
श्वास की क्रिया का विज्ञान
डॉ. मेहता ने कहा, 'जैसे श्वास की क्रिया होती है। श्वास से बने स्वर, स्वर से बने सुर, सुर से निकले गीत। श्वास, स्वर, सुर और गीत संगत में हो तो श्वास में आस्था छिपी हुई है'। संवाद के मंच पर डॉ. मेहता ने फिल्म 'शोले' का डॉयलॉग भी बोलकर दिखाया। दरअसल, जब उनसे आग्रह किया गया कि वे बोलकर बताएं किस तरह डायलॉग से बीपी बढ़ सकता है? इस पर उन्होंने 'शोले' का डायलॉग बोला- 'कितने आदमी थे। सरकार दो आदमी। वो दो थे और तुम तीन...धिक्कार है'।