Sajjan Birth Anniversary: सरकटे से पहले सज्जन ने बेताल बन लोगों में फैलाई दहशत, 'राम' की पीठ पर बैठ मचाया आतंक
Sajjan Birth Anniversary: हिंदी सिनेमा के दिवंगत अभिनेता सज्जन लाल पुरोहित की आज 104वीं जयंती है। वह 'विक्रम और बेताल' के 'बेताल' बनकर मशहूर हुए थे। चलिए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें...
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हाल ही में हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच 'स्त्री 2' के सरकटे ने दहशत फैलाई थी। सरकटे को देख दर्शक हैरान रह गए थे और उसकी हरकतों ने लोगों के दिलों में डर भी पैदा किया था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सरकटे से पहले भी दर्शकों के बीच ऐसा डर का माहौल बन चुका है, जिसके आतंक से पुराने जमाने में भी लोगों की बीच दहशत का माहौल पैदा हो गया था। वह था 'विक्रम और बेताल' के किरदार 'बेताल' का डर। रामानंद सागर के सीरियल 'विक्रम और बेताल' में अभिनेता सज्जन लाल पुरोहित 'बेताल' बने थे और घर-घर में मशहूर हो गए। चलिए आज अभिनेता की 104वीं जयंती पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में...
'बेताल' बन टीवी पर छाए सज्जन
सज्जन लाल पुरोहित का जन्म 15 जनवरी, 1921 में जयपुर में हुआ था। सज्जन ने जोधपुर के जसवंत कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। वह अभिनेता नहीं बल्कि, वकील बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ऐसे में वह फिल्मी दुनिया में आए और अभिनेता बन गए। टीवी की दुनिया में दस्तक देने से पहले ही सज्जन ने कई सारी फिल्मों में अभिनय किया था। ऐसे में जब उन्होंने टीवी का रुख किया तो अभिनेता ने बेताल के किरदार में भी जान फूंक दी थी।
ऐसे मिला 'बेताल' का रोल
सज्जन लाल पुरोहित पेशे से तो वकील थे, लेकिन अभिनय उनका शौक था। सज्जन ने देश की आजादी के पहले से ही फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया था। सज्जन ने विक्रम और बेताल में काम करने से पहले रामानंद सागर की फिल्म आंखें में उनके साथ काम किया था। इस फिल्म के बाद से ही सज्जन की अदाकारी रामानंद सागर के जेहन में बस गई थी। जब रामानंद सागर के मन में विक्रम और बेताल का ख्याल आया, तब उन्होंने बेताल के किरदार के लिए सज्जन को चुना। सज्जन ने भी देर न करते हुए सीधे हां कह दिया।
डायलॉग से भी मशहूर हुए सज्जन
सीरियल में विक्रम की भूमिका अरुण गोविल ने निभाया था, जो आगे चलकर टीवी के श्रीराम बने। वहीं, सज्जन ने 'बेताल' बन दर्शकों के बीच अलग ही आतंक फैलाया। यह भारत का पहला ऐसा शो था, जिसमें टीवी पर स्पेशल इफेक्ट्स दिखाए गए थे। डरावनी शक्ल और बड़ी आंखें और लंबे सफेद बालों वाले 'बेताल' का लुक उस जमाने में लोगों के बीच रोमांच के साथ एक तरह का डर भी पैदा कर रहा था। 'बेताल' द्वारा बोला गया डायलॉग 'तू बोला, तो मैं चला जा रहा हूं। मैं तो चला।' आज भी लोगों के जेहन में बसा हुआ है।
सज्जन का फिल्मी करियर
1985 में प्रसारित होने वाला टीवी शो विक्रम और बेताल पूरे देश का ध्यान खींचने में सफल रहा था। इस क्लासिक शो को आज भी अरुण गोविल और सज्जन की जोड़ी के लिए याद किया जाता है। सज्जन ने उन्होंने 150 से ज्यादा फिल्मों और टीवी शो 'विक्रम और बेताल' के साथ एक अन्य शो 'लेना-देना' में काम किया। सज्जन ने अपने करियर की शुरुआत मासूम (1941), चौरंगी (1942) जैसी फिल्मों में बतौर एक्स्ट्रा कलाकार की थी। उन्होंने मीना (1944) के संवाद और दूर चलें (1946) और धन्यवाद (1948) के गीत भी लिखे। सज्जन ने फिल्म 'धन्यवाद' से बॉलीवुड में मुख्य अभिनेता के तौर पर डेब्यू किया था। 1950-60 के दशक में इस बहुमुखी अभिनेता ने सैयां, रेल का डिब्बा, बहना, शीशा, मालकिन, निर्मोही, कस्तूरी, मेहमान, लगन, गर्ल स्कूल, परिधान, दो दूल्हे, घर-घर में दिवाली, हा-हा-ही-ही-हू-हू, पूनम झांझर, हल्ला- गुल्ला जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया।