Maguni Charan Kuanr: प्रख्यात कठपुतली कलाकार पद्मश्री मगुनी चरण कुआंर का हुआ निधन, राष्ट्रपति ने जताया शोक
पद्मश्री विजेता कठपुतली कलाकार मगुनी चरण कुआंर का निधन हो गया है। वो 87 साल के थे। उनका जन्म 12 फरवरी 1937 को हुआ था।
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पद्मश्री विजेता कठपुतली कलाकार मगुनी चरण कुआंर का निधन हो गया है। वो 87 साल के थे। उनका जन्म 12 फरवरी 1937 को हुआ था। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शोक जताया है।
प्रेरणादायक विरासत छोड़ गए मगुनी: द्रौपदी मुर्मू
द्रौपदी मुर्मू ने ट्वीट कर लिखा, "ओडिशा के क्योंझर के प्रख्यात कठपुतली कलाकार श्री मगुनी चरण कुआंर के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उन्हें पारंपरिक कठपुतली नृत्य शैली को बढ़ावा देने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वे अपने पीछे एक प्रेरणादायक विरासत छोड़ गए हैं। उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।"
Sad to learn about the demise of Shri Maguni Charan Kuanr, an eminent puppeteer from Keonjhar, Odisha. He was awarded the Padma Shri for promotion of the traditional puppet dance form. He leaves behind an inspiring legacy. Condolences to his family, friends and admirers. pic.twitter.com/UCX3l2nRsk
विज्ञापन विज्ञापन— President of India (@rashtrapatibhvn) June 1, 2024
15 साल की उम्र में शुरू किया था सीखना
साल 2023 में ओडिशा से चार हस्तियों को पद्मश्री से नवाजा गया था। इनमें से एक मगुनी चरण कुआंर भी थे। उन्होंने 70 साल तक कठपुतली का मंचन किया। मगुनी केवल 15 साल के बालक थे, जब उन्होंने इस कला का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। मकरध्वज बेहरा उनके गुरु थे। अपने हुनर का प्रदर्शन करने के लिए उन्होंने 'उत्कल विश्वकर्मा करकुंज' की स्थापना की थी, जो एक सांस्कृतिक समूह था।
दो राष्ट्रपति के हाथों हुए थे सम्मानित
ओडिशा में पैदा हुए मगुनी चरण ने देश के कई शहरों में जाकर अपने हुनर का लोहा मनवाया था। उन्होंने मुंबई, गुवाहाटी, दिल्ली, कोलकाता, सिक्किम, मेघालय, कूच बिहार, भोपाल, बेंगलुरु और अगरतला में कठपुतली का मंचन किया था। मगुनी कठपुतली के किरदारों के लिए संवाद भी लिखते थे। उनकी पहचान महज कठपुतली कलाकार तक ही सीमित नहीं रही। उन्हें मिट्टी के मूर्तिकार, चित्रकार, लकड़ी के नक्काशकार और संवाद लेखक के रुप में भी जाना जाता हैं। पद्मश्री से सम्मानित होने से पहले उन्हें कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया था। 1984 में उन्हें उड़ीसा संगीत नाटक अकादमी मिला था और 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आजाद के हाथों संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला था।