Ratan Thiyam Dies: नहीं रहे मणिपुरी थिएटर के 'रतन', 77 साल की उम्र में ली अंतिम सांस; लंबे समय से थे बीमार
Ratan Thiyam Death News: भारतीय नाटककार रतन थियम का 77 साल की उम्र में निधन हो गया है। रतन पिछले कुल समय से बीमार चल रहे थे।
विस्तार
भारत के सांस्कृतिक और रंगमंचीय इतिहास में एक युग का अंत हो गया है। मणिपुर के थिएटर निर्देशक, लेखक, कवि और नाटककार रतन थियम का 77 साल की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे थियम ने इंफाल के रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में अंतिम सांस ली। उनकी तस्वीर शेयर करते हुए कांग्रेस के लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई ने इस खबर के बारे में जानकारी दी है। गौरव ने रतन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
Deeply saddened by the passing of Ratan Thiyam — legendary theatre maestro, visionary artist, and pioneer of India’s “theatre of roots” movement. His legacy will continue to inspire generations. My heartfelt condolences to his family and the theatre fraternity. pic.twitter.com/LeYFMrC5k4
— Gaurav Gogoi (@GauravGogoiAsm) July 23, 2025विज्ञापन
रतन थियम का जन्म मणिपुर में हुआ और उनके पिता मणिपुरी नृत्य शैली के कलाकार थे। उन्हें बचपन से ही कला के क्षेत्र में जाना था।
मणिपुर के सीएम ने दी श्रद्धांजलि
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि रतन थियम की कला में मणिपुर की आत्मा बसती थी।वो सिर्फ एक रंगकर्मी नहीं, बल्कि मणिपुरी संस्कृति के संवाहक थे। उनका समर्पण और दृष्टिकोण भारतीय थिएटर के लिए एक अमूल्य धरोहर बन चुका है।
It is with deep sorrow that I express my heartfelt condolences on the passing of Shri Ratan Thiyam, a true luminary of Indian theatre and an esteemed son of Manipur. His unwavering dedication to his craft, his vision, and his love for Manipuri culture enriched not only the world… pic.twitter.com/20ZbKwGdZL
— N. Biren Singh (@NBirenSingh) July 23, 2025
रतन थियम के करियर की शुरुआत
रतन थियम का रचनात्मक सफर सिर्फ रंगमंच तक सीमित नहीं थी। उन्होंने पेंटिंग, कविता और लघु कहानियों से अपने कला-सफर की शुरुआत की। अपने शुरुआती दौर में वो नाट्य समीक्षक के रूप में भी सक्रिय रहे। धीरे-धीरे मंच से उनका जुड़ाव बढ़ा और वो खुद नाटक लिखने और निर्देशित करने लगे। उनके नाटकों की खासियत थी – प्राचीन भारतीय परंपराओं को समकालीन संदर्भों में ढालना।
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थिएटर ऑफ रूट्स के स्तंभ
1970 के दशक में जब भारतीय रंगमंच पश्चिमी प्रभावों से भरा हुआ था, तब रतन थियम ने 'थिएटर ऑफ रूट्स' आंदोलन को नई पहचान दी। इस आंदोलन का उद्देश्य था- भारतीय संस्कृति, दर्शन और पारंपरिक कला रूपों को नाट्य मंच पर फिर से दिखाना।
रतन थियम के यादगार नाटक
रतन थियम के नाटकों में सिर्फ कहानी नहीं होती थी, बल्कि उसमें संगीत, सीन, डायलॉग भी कमाल के होते थे। ‘उत्तर प्रियदर्शी’, ‘करणभारम्’, ‘द किंग ऑफ डार्क चैंबर’ और ‘इम्फाल इम्फाल’ जैसे उनके नाटकों में सामाजिक संदेश और सांस्कृतिक आत्मा दिखाई देती थी।
रतन थियम को मिली राष्ट्रीय पहचान
1987 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2013 से 2017 तक वो राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के अध्यक्ष भी रहे। इस दौरान उन्होंने थिएटर की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए।