Rana Daggubati Video Interview: मेरी सोच हिंदी में नहीं है, मेरे सारे विचार अंग्रेजी में आते हैं..
Rana Daggubati Video Interview: हाल ही में साउथ सुपरस्टार राणा दग्गूबाती अपनी सीरीज 'राणा नायडू' के सीजन 2 से चर्चा में हैं। आइए सुनते हैं उनसे हुई खास बातचीत को।
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फिल्म ‘दम मारो दम’ से हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने वाले अभिनेता राणा दग्गूबाती ओटीटी पर फिर लौटे हैं अपने लोकप्रिय शो ‘राणा नायडू’ के दूसरे सीजन के साथ। सिनेमा में विजुअल इफेक्ट्स सुपरवाइजर के तौर पर काम शुरू करने वाले राणा ने भविष्य में फिल्म निर्देशन का विकल्प भी खुला रखा है। वह कहते भी हैं कि विजुअल इफेक्ट्स सुपरवाइजर के तौर पर 20 साल पहले सिनेमा में हुई उनकी शुरुआत यहां तक ले आएगी, इसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने की राणा दग्गूबाती से ये खास मुलाकात। इस इंटरव्यू में राणा के साथ निर्देशक करण अंशुमान और नेटफ्लिक्स इंडिया की सीरीज हेड तान्या बामी भी शामिल रहीं। पूरे इंटरव्यू का वीडियो इन सवालों और जवाबों के आखिर में है...
आपने हिंदी सिनेमा में रोहन सिप्पी निर्देशित फिल्म ‘दम मारो दम’ से कोई डेढ़ दशक पहले डेब्यू किया, लेकिन ‘बाहुबली’ में भल्लादेव के किरदार की लोकप्रियता ने सबको पीछे छोड़ दिया। ये किरदार कितना बड़ा पैमाना है, आपके किसी भी नए किरदार की लोकप्रियता का?
सर, मैं कंपेयर ही नहीं करता हूं उसके साथ, क्योंकि उसके बाद मैं कभी भी एक पीरियड फिल्म किया नहीं। मेरा मानना है कि जीवन में आपको कुछ ही किरदार ऐसे मिलते हैं जो वाकई में बहुत विशाल होंगे। और, सिर्फ भल्लालदेव ही नहीं, बल्कि ‘बाहुबली’ फिल्म ने ही समग्र रूप से न सिर्फ मेरी अभिनय यात्रा को बदल दिया बल्कि इसने भारतीय सिनेमा को देखने का नजरिया ही बदल डाला। भारत के साथ साथ पूरी दुनिया में दर्शकों का भारतीय सिनेमा को देखने का नजरिया इन दोनों फिल्मों ने बदला है और मेरे हिसाब से बदलाव का ये पल सबके लिए एक जैसा रहा है।
हिंदी आपकी बहुत अच्छी है, लेकिन आप बातचीत में अंग्रेजी को वरीयता देते हैं...
जी, दरअसल मेरी सोच हिंदी में नहीं है तो मुझे हिंदी बोलने के लिए बार बार अपने विचारों को अनुवाद की प्रक्रिया से गुजारना होता है। मेरे सारे विचार अंग्रेजी में आते हैं। उन्हें हिंदी में बोलने के लिए मुझे उनका अनुवाद करना होता है।
आपने अपनी फिल्मी यात्रा विजुअल इफेक्ट्स सुपरवाइजर के तौर पर आज से 20 साल पहले तब शुरू की जब इसका इतना हल्ला नहीं था, बाद में आप फिल्म निर्माता बने, वितरक बने, अमर चित्रकथा पर भी कुछ कर रहे हैं, ये कारोबारी कला आपके भीतर कहां से आई?
सर, मैं सबसे पहले एक एंटरटेनर हूं। दूसरों का मनोरंजन करता हूं। इसमें मुझे आनंद आता है। मैं लोगों का मनोरंजन करना पसंद करता हूं। मैं खुद के लिए भी मनोरंजन की तलाश में रहता हूं और मैं ये भी चाहता हूं कि लोग मेरे जरिये ज्यादा से ज्यादा मनोरंजन हासिल कर सकें। और, ये मेरे लिए शुरू से ऐसा ही रहा है।
और, प्रयोगधर्मी भी आप हैं..?
मेरा शुरू से मानना रहा है कि मुझे लोगों का मनोरंजन करने के लिए नए-नए तरीके खोजते रहने होंगे। मैंने विजुअल इफेक्ट्स से जब शुरू किया तो मुझे लगता है कि वह समय से काफी पहले की बात थी। लेकिन, इसके बाद भी मैंने ‘बाहुबली’ की जो कि विजुअल इफेक्ट्स पर आधारित एक बड़ी फिल्म रही।
शौक बाकी है अभी आपका विजुअल इफेक्ट्स का? क्या ‘बाहुबली’ की मेकिंग के दौरान आपने इसके निर्देशक एस एस राजामौली को इसे लेकर आपने कोई सुझाव दिए?
हां सर, शौक तो बाकी है। ‘बाहुबली’ की जहां तक बात है तो उस समय हम सब एक अलग ही मनोरंजन की खोज में थे। हम सब कुछ नया खोज रहे थे क्योंकि तब तक किसी ने विजुअल इफेक्ट्स को लेकर इतने विशाल स्तर पर काम किया नहीं था। तो, वह सब हमारे लिए एक खोज यात्रा जैसा ही रहा। फिल्म के पहले भाग में ये खोज कुछ ज्यादा ही तीव्र रही थी।
इतना सब कुछ आपको फिल्म निर्माण क्षेत्र में आता है। परदे के पीछे भी और परदे पर भी तो क्या हम आपको भविष्य में फिल्म निर्देशन में भी हाथ आजमाते देख सकते हैं?
निर्देशन में मुझे जाना है कि नहीं, मुझे अभी कुछ पता नहीं है, सर। 20 साल पहले मुझे फिल्में सिर्फ पसंद आती है। फिर मैंने सिनेमा में विजुअल इफेक्ट्स सुपरवाइजर के तौर पर काम करना शुरू किया। उसके बाद मैं अभिनेता बना, फिर निर्माता बना, फिर फिल्म वितरक भी बना। मुझे लगता है सिनेमा मुझे इन सबके लिए चुनता रहा है और सिनेमा इस यात्रा में मुझे जहां भी ले जाएगा, मैं उसके लिए तैयार रहूंगा।
और, नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी पर नागा नायडू का किरदार करने के लिए आपने अपने चाचा वेंकटेश को कैसे मनाया?
उनका किरदार उनके इससे पहले किए सारे किरदारों से अलग था और मुझे लगता है कि इसी ने उनमें इस किरदार के लिए रुचि जगाई। नहीं तो, सामान्यतया जब भी एक ही परिवार के दो कलाकार किसी कहानी में आते हैं तो या तो बेटा, बाप को बचा रहा होता है या बाप, बेटे को बचा रहा होता है। पहले सीजन में हमने दो विपरीत ध्रुवों पर खड़े होकर अपना सफर शुरू किया और ये हम दोनो के लिए ही बहुत दिलचस्प रहा।
इंटरव्यू का वीडियो आप ये लिंक क्लिक करके देख सकते हैं।