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Pankaj Udhas: पंकज उधास को पद्म भूषण सम्मान मिलने पर बेटी ने जताया आभार, बोलीं- 'काश वे यहां होते, बहुत खुश...

Sun, 26 Jan 2025 02:43 PM IST
तनु चतुर्वेदी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: तनु चतुर्वेदी Updated Sun, 26 Jan 2025 02:43 PM IST
सार

मशहूर गायक पंकज उधास को पद्म भूषण सम्मान मिलने पर उनकी बेटियों और पत्नी ने सरकार का आभार जताया है। उनकी बेटियों ने भी उन्हें याद किया।

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Pankaj Udhas daughter gratitude for Padma Bhushan award to Father said I wish he was here have been very happy
पंकज उधास को श्रद्धांजलि देते हुए पत्नी फरीदा उधास, बेटी नायाब उधास और रीवा उधास - फोटो : एएनआई

विस्तार

गणतंत्र दिवस पर हुए पद्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद कुछ खट्टे मीठे पल देखने को मिल रहे हैं। कोई किसी को बधाइयां दे रहा है, तो कोई किसी को याद कर रहा है। इसी कड़ी में पंकज उधास के परिवार ने भी उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार मिलने के बाद बात की है। परिवार ने सम्मान के लिए सरकार को धन्यवाद भी दिया है।
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परिवार ने जताया आभार
गजल गायक पंकज उधास को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद उनकी पत्नी फरीदा उधास, बेटी नायाब उधास और रीवा उधास ने बात की है। एएनआई से बातचीत में पंकज उधास की पत्नी ने कहा कि ये हमारे लिए गर्व की बात है।
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बेटी रीवा ने की बात
उनकी बेटी रीवा ने कहा कि हम सोचते हैं कि काश वो यहां होते। वे इससे बहुत खुश होते। मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने मेरे पिता को ये सम्मान दिया। उन्होंने हमेशा भारत को गर्व महसूस करने के लिए काम किए हैं। वे भारत के लिए हमेशा समर्पित रहे। उनके संगीत से आज पूरा देश जुड़ा हुआ है।
 
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बड़ी बेटी को है पिता पर गर्व
पंकज उधास की बड़ी बेटी नायाब भी इस दौरान बहुत इमोशनल हो गईं। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास कुछ अच्छी यादें हैं और कुछ बुरी। हम उन पर गर्व महसूस करते हैं। वे आज यहां नहीं हैं लेकिन मैं उन सभी को धन्यवाद देती हूं जो उनके काम को समझते हैं।

26 फरवरी को हुआ था निधन
पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को हुआ था। पद्म भूषण सम्मान मिलने पर फिर पंकज उधास के गानों के बारे में फैंस बातें करने लगे हैं।

संगीत और गजलों से मिली पहचान
पंकज उधास को उनकी गजल आहत गजल से जाना जाता है। उन्होंने अन्य सफलताएं दर्ज कीं, जिनमें मुकरार (1981), तरन्नुम (1982), महफिल (1983) और कई अन्य शामिल हैं। उनकी कुछ लोकप्रिय प्रस्तुतियां हैं 'चिट्ठी आई है', 'चांदनी रात में', 'ना कजरे की धार', 'और आहिस्ता कीजिए बातें', 'एक तरफ उसका घर' और 'थोड़ी थोड़ी पिया करो'।
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