Pakistan Cinema: पाकिस्तान के पेशावर में एक और सिनेमाहॉल गिराया गया, खत्म होने के कगार पर फिल्म कल्चर
पाकिस्तान के सिनेमा जगत के लिए बुरी खबर है। पेशावर में शनिवार को अरशद सिनेमा को गिराए जाने का काम शुरू हो गया। 2025 में यह तीसरा ऐसा सिनेमाहॉल है जिसे गिराए जाने के बाद कमर्शियल प्लाजा बनाया जाएगा।
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पाकिस्तान के पेशावर में कभी आगे बढ़ता सिनेमा कल्चर अब लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। अब सिर्फ तीन सिनेमा हॉल ही बचे हैं और वह भी ईद के त्योहारों तक ही मौजूद रहेंगे। पीटीआई के अनुसार विभाजन से पहले पेशावर में दो सिख व्यापारियों द्वारा बनाए गए नाज सिनेमा और पिक्चर हाउस को इस साल मार्च और जून में गिराया जा चुका है। ये दोनों सिनेमाघर पिछले एक दशक में पेशावर शहर में गिराए जाने वाले सिनेमाघरों की लंबी सूची में शामिल हो गए हैं। अब अरशद सिनेमा हॉल के ढांचे को गिराने का काम शनिवार को शुरू हुआ, जो एक महीने में पूरा हो जाएगा।
क्यों गिराए जा रहे हैं सिनेमाहॉल
इस सिनेमा हॉल के मालिक अरशद खान ने 1984 में इसको बनवाया था। इसका नाम अपने नाम पर रखा था। अब और आर्थिक नुकसान नहीं झेल सके तो 41 साल बाद इसे गिराने का फैसला किया है। इस सिनेमा हॉल में आखिरी फिल्म ईद-उल-अजहा वाले दिन दिखाई गई थी। अरशद सिनेमा के प्रोजेक्टर ऑपरेटर मुहम्मद यूसुफ ने प्रोजेक्टर मशीनों को वापस लेते हुए पीटीआई को बताया, ‘यह सिनेमाहॉल 80 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ था लेकिन इसकी कमाई मुश्किल से 20 लाख रुपये हुई। मैं 40 साल से इस सिनेमा से प्रोजेक्टर ऑपरेटर के तौर पर जुड़ा हुआ हूं।’ यूसुफ ने बताया कि सिनेमाहॉल के 45 कर्मचारियों की नौकरी चली गई है।
ये भी हैं कुछ अहम कारण
पिछले कुछ वर्षों में सिनेमाहॉल के गिराए जाने का संबंध पेशावर में सिनेमा कल्चर का खत्म हाेना है। अब कई सिनेमाहॉल की जगह हॉस्पिटल, शॉपिंग मॉल बन गए हैं। अरशद सिनेमा के मैनेजर तैय्यब खान का कहना है, ‘सोशल मीडिया ने लोगों को मनोरंजन के कई ऑप्शन दिए हैं, जिसके कारण सिनेमा का जादू कम हो रहा है।’ वहीं पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में आंतकवाद ने भी सिनेमा कल्चर के खत्म होने में योगदान दिया है। कुछ साल पहले फिल्में दिखाने वाले कुछ थिएटर पर बमबारी की गई थी।
पश्तो लेखक अबासीन यूसुफजई का कहना है, ‘सिनेमाघरों के नुकसान का मतलब पश्तो मनोरंजन और भाषा का नुकसान भी है।’ 'पख्तो फिल्मूना' (पश्तो फिल्में) नाम की किताब के लेखक हाजी असलम खान ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा के कई शहरों और आदिवासी जिलों में 40 से ज्यादा सिनेमाघर थे लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के खत्म होने के कारण उन्हें तहस-नहस कर दिया गया। खैबर पख्तूनख्वा में पश्तो मनोरंजन को कई मुश्किलों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा।’ असलम खान ने आगे कहा, ‘नामी फिल्म कलाकार या तो मर चुके हैं या उन्होंने हमेशा के लिए यह पेशा छोड़ दिया है।’
सिनेप्रेमियों के लिए दुखद बात
आखिर में अरशद सिनेमा हॉल के मालिक अरशद खान कहते हैं, ‘इन सभी मुद्दों ने पेशावर शहर, जिसे कभी सिनेमाघरों और कलाकारों का शहर कहा जाता था को बदल दिया है। दशकों पुराने सिनेमा घरों को खो दिया है। इनकी जगह अब कमर्शियल प्लाजा बन गए हैं, जिसने सिने प्रेमियों को सिनेमा से दूर कर दिया है।