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Web Series Review: अच्छी कहानी, दमदार अदाकारी लेकिन बजट में मात खा गया, स्काईफायर
Sun, 09 Jun 2019 02:35 PM IST
anand anand
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Sun, 09 Jun 2019 02:35 PM IST
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डिजिटल रिव्यू: स्काईफायर (वेब सीरीज)
कलाकार: प्रतीक बब्बर, सोनाली चौहान, जतिन गोस्वामी आदि।
निर्देशक: सौमिक सेन
ओटीटी: जी5
जी समूह के ओटीटी जी5 की लोकप्रियता अगर दिनोंदिन बढ़ रही है तो इसकी पहली वजह है इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सीरीज और फिल्मों में मौजूद विविधता। मूल रूप से भारतीय कहानियों को ही पेश करने वाले इस ओटीटी की नई छलांग है इसकी पहली साइंस फिक्शन सीरीज, स्काईफायर। गुलाब गैंग और चीट इंडिया जैसी समसामयिक मुद्दों पर फिल्में बनाने वाले निर्देशक सौमिक सेन ने इस बार मुद्दा उठाया है मौसम का।
सौमिक सेन की निर्देशकीय क्षमता पर उनकी फिल्में बार बार सवाल उठाती रही हैं। वह विजनरी अच्छे हैं पर किरदारों को गढ़ने और उनको उभारने में वह अक्सर मात खा जाते हैं। उनके साथ दूसरी दिक्कत ये भी है कि जिस स्तर की वह कहानियां चुनते हैं, निर्माता उन्हें उस स्तर का बजट नहीं देते। स्काईफायर का सबसे बड़ा माइनस प्वाइंट इसके स्पेशल इफेक्ट्स हैं। फिल्ममेकिंग स्कूल स्तर के स्पेशल इफेक्ट्स सीरीज के पहले सीन से ही बजट कटौती की पोल खोलते हैं।
अरून रमन की किताब स्काईफायर एक दमदार साइंस फिक्शन है। जी5 ने अगर इस पर सीरीज बनाने का फैसला तो कर लिया, लेकिन इस कहानी को परदे पर उतारने लायक पैसा जी5 के पास नहीं है। एक पत्रकार, एक पुलिस अफसर और एक राजनीतिज्ञ के त्रिभुज में फंसी कहानी कभी समकोण नहीं बना पाती। बस्तियों से गायब होते बच्चे कभी इस देश में मुद्दा नहीं बने। इसके रहस्य को उजागर करने की कोशिशों में खुलते साजिश के तार स्काईफायर को विस्तार देते हैं।
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अभिनय के मामले में प्रतीक बब्बर ने बताया कि सही मौका मिले तो वह अपनी अदाकारी का दमखम दिखा सकते हैं। सोनाली चौहान भी काफी मेहनत करती नजर आती है। लेकिन, इन दोनों पर भारी हैं अभिनेता जतिन गोस्वामी। सीरीज को आखिर तक देखना एक चुनौती है और दूसरे ओटीटी पर मौजूद बेहतर कंटेंट के मुकाबले यह उतना दर्शनीय भी नहीं है।
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कलाकार: प्रतीक बब्बर, सोनाली चौहान, जतिन गोस्वामी आदि।
निर्देशक: सौमिक सेन
ओटीटी: जी5
जी समूह के ओटीटी जी5 की लोकप्रियता अगर दिनोंदिन बढ़ रही है तो इसकी पहली वजह है इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सीरीज और फिल्मों में मौजूद विविधता। मूल रूप से भारतीय कहानियों को ही पेश करने वाले इस ओटीटी की नई छलांग है इसकी पहली साइंस फिक्शन सीरीज, स्काईफायर। गुलाब गैंग और चीट इंडिया जैसी समसामयिक मुद्दों पर फिल्में बनाने वाले निर्देशक सौमिक सेन ने इस बार मुद्दा उठाया है मौसम का।
सौमिक सेन की निर्देशकीय क्षमता पर उनकी फिल्में बार बार सवाल उठाती रही हैं। वह विजनरी अच्छे हैं पर किरदारों को गढ़ने और उनको उभारने में वह अक्सर मात खा जाते हैं। उनके साथ दूसरी दिक्कत ये भी है कि जिस स्तर की वह कहानियां चुनते हैं, निर्माता उन्हें उस स्तर का बजट नहीं देते। स्काईफायर का सबसे बड़ा माइनस प्वाइंट इसके स्पेशल इफेक्ट्स हैं। फिल्ममेकिंग स्कूल स्तर के स्पेशल इफेक्ट्स सीरीज के पहले सीन से ही बजट कटौती की पोल खोलते हैं।
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अरून रमन की किताब स्काईफायर एक दमदार साइंस फिक्शन है। जी5 ने अगर इस पर सीरीज बनाने का फैसला तो कर लिया, लेकिन इस कहानी को परदे पर उतारने लायक पैसा जी5 के पास नहीं है। एक पत्रकार, एक पुलिस अफसर और एक राजनीतिज्ञ के त्रिभुज में फंसी कहानी कभी समकोण नहीं बना पाती। बस्तियों से गायब होते बच्चे कभी इस देश में मुद्दा नहीं बने। इसके रहस्य को उजागर करने की कोशिशों में खुलते साजिश के तार स्काईफायर को विस्तार देते हैं।
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अभिनय के मामले में प्रतीक बब्बर ने बताया कि सही मौका मिले तो वह अपनी अदाकारी का दमखम दिखा सकते हैं। सोनाली चौहान भी काफी मेहनत करती नजर आती है। लेकिन, इन दोनों पर भारी हैं अभिनेता जतिन गोस्वामी। सीरीज को आखिर तक देखना एक चुनौती है और दूसरे ओटीटी पर मौजूद बेहतर कंटेंट के मुकाबले यह उतना दर्शनीय भी नहीं है।
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