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मेरे दोस्त पिक्चर अभी बाकी है
Updated Thu, 09 Aug 2012 12:14 PM IST
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हैलो फ्रेंड्स! जब भी कभी आपको कोई कहे कि पिक्चर अभी बाकी है तो आप ये समझने में देर मत करना की दाल में जरूर कुछ काला है। मैं इस बार आपके लिए एक कॉमेडी फिल्म देखने गई। आप समझ ही गए होंगे मैं किस फिल्म की बात कर रही हूं। जी हां, रजनीश राज ठाकुर की फिल्म 'मेरे दोस्त पिक्चर अभी बाकी है'।
ट्रेलर देखकर लग रहा था कि फिल्म एक मजेदार कॉमेडी होगी। लेकिन मैं ये नहीं जानती थी कि सालों से एक डिब्बा बंद फिल्म ऐसी हो सकती है। जबकि फिल्म में राजपाल यादव थे तो कॉमेडी की भरपूर उम्मीद थी।
कहानी
अमर जोशी (सुनील शेट्टी) को फिल्मों का बहुत शौक है। स्कूल की बजाय सिनेमाहॉल में उसका ज्यादा समय बीतता है। बड़े होते-होते डायरेक्टर बनने की उसकी ख्वाहिश और भी बढ़ जाती है। जिसके लिए वह बनारस में अपनी वीडियो लाइब्रेरी बेच लंदन के फिल्म इंस्टीट्यूट में फिल्म मेकिंग के गुर सीखने चला जाता है।
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फिल्म मेकिंग की पढ़ाई पूरी होने के बाद अमर मुंबई की रीयल कहानी पर फिल्म बनाना चाहता है जिसके लिए वह मुंबई में अपने दोस्त सूरज (राजपाल यादव) जो कि जूनियर आर्टिस्ट है, के पास चला जाता है। यही से अमर का फिल्म बनाने का संघर्ष शुरू होता है और फिल्म में कई उतार-चढ़ाव के साथ ही शुरू होता है कॉमेडी का दौर।
ऐक्टिंग
राजपाल यादव जिस फिल्म में हो उसमें आपको हंसने का भरपूर मौका मिलेगा। फिल्म देखकर ऐसा लग रहा था कि पूरी फिल्म का भार राजपाल यादव के कंधों पर ही है। सुनील शेट्टी की परफॉर्मेंस राजपाल यादव के आगे फीकी सी दिखाई पड़ रही थी। उदिता गोस्वामी को एक शो पीस की तरह फिल्म में इस्तेमाल किया गया। लेकिन ओम पुरी, नीना गुप्ता, राकेश बेदी रजाक खान फिल्म में अपनी छाप छोड़ते दिखाई पड़े।
म्यूजिक
मुमैथ खान का आइटम सांग फिल्म में जान डालने के लिए काफी है। बाकी म्यूजिक कोई खास असर नहीं छोड़ता। ऐसा लगता है कि फिल्म के संगीत पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया गया।
निर्देशन
निर्देशक रजनीश राज ठाकुर फिल्म को एक धागे में पिरोने में कामयाब नहीं हो पाए। फिल्म में बहुत झोल है। कभी फिल्म एकदम स्लो हो जाती है तो भी एकदम तेज चलने लगती है। कभी फिल्म में बहुत हंसी आती है तो कभी बहुत बोर करती है फिल्म। कहने का मतलब है कि फिल्म में बिल्कुल भी बैलेंस नहीं है।
क्या है खास
मुमैथ खान का आइटम सांग देखा जा सकता है। 'दाल में कुछ काला है' फिल्म से तो यह फिल्म बहुत बेहतर है और हल्की-फुल्की हंसी तो आती ही है। राजपाल यादव में कैसे पूरी फिल्म को संभालने का हुनर है, ये इस फिल्म में देखा जा सकता है।
क्यों है बकवास
फिल्म निर्देशन या फिल्म इंडस्ट्री पर बनी फिल्में पहले भी कभी हिट नहीं हुई। फिल्म की कहानी भी कोई नई नहीं है। पहले भी फिल्म इंडस्ट्री, फिल्मों की मेकिंग, कास्टिंग काउच जैसी फिल्में बनी हैं जो कि कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है।
फिल्म के सितारे
पिक्चर अभी बाकी है के सितारों के सितारे गर्दिश में हैं फिल्म के मुख्य किरदार सुनील शेट्टी ढैय्या के प्रभाव में हैं तो राजपाल यादव साढ़े साती के घेरे में। फिल्म की नायिका उदिता गोस्वामी भी शनि के प्रभाव में हैं लेकिन शनि इनकी कुण्डली में शश योग बनाकर बैठा है और शुक्र की दशा चल रही है जो इनके लिए लाभप्रद है।
इस फिल्म से उदिता को काफी समय बाद पर्दे पर आने का मौका मिला है जो शुक्र की ही मेहरबानी है। फिल्म शुभ नक्षत्र में रिलीज हो रही है जिसे लाभ देने वाला नक्षत्र कहा गया है, शायद यह थोड़ा फायदा दे जाए। राजपाल यादव और सुनील शेट्टी की कॉमेडी लोगों को मजा देगी।
बैनर: फिल्मी बॉक्स मूवीज
निर्माता: नरेन्द्र सिंह
निर्देशक: रजनीश राज ठाकुर
संगीत: सुखविंदर सिंह
कलाकार: सुनील शेट्टी, राजपाल यादव, उदिता गोस्वामी, राकेश बेदी, ओमपुरी, नीना गुप्ता, मुमैत खान
रेटिंग्ा: *1/2
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ट्रेलर देखकर लग रहा था कि फिल्म एक मजेदार कॉमेडी होगी। लेकिन मैं ये नहीं जानती थी कि सालों से एक डिब्बा बंद फिल्म ऐसी हो सकती है। जबकि फिल्म में राजपाल यादव थे तो कॉमेडी की भरपूर उम्मीद थी।
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कहानी
अमर जोशी (सुनील शेट्टी) को फिल्मों का बहुत शौक है। स्कूल की बजाय सिनेमाहॉल में उसका ज्यादा समय बीतता है। बड़े होते-होते डायरेक्टर बनने की उसकी ख्वाहिश और भी बढ़ जाती है। जिसके लिए वह बनारस में अपनी वीडियो लाइब्रेरी बेच लंदन के फिल्म इंस्टीट्यूट में फिल्म मेकिंग के गुर सीखने चला जाता है।
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फिल्म मेकिंग की पढ़ाई पूरी होने के बाद अमर मुंबई की रीयल कहानी पर फिल्म बनाना चाहता है जिसके लिए वह मुंबई में अपने दोस्त सूरज (राजपाल यादव) जो कि जूनियर आर्टिस्ट है, के पास चला जाता है। यही से अमर का फिल्म बनाने का संघर्ष शुरू होता है और फिल्म में कई उतार-चढ़ाव के साथ ही शुरू होता है कॉमेडी का दौर।
ऐक्टिंग
राजपाल यादव जिस फिल्म में हो उसमें आपको हंसने का भरपूर मौका मिलेगा। फिल्म देखकर ऐसा लग रहा था कि पूरी फिल्म का भार राजपाल यादव के कंधों पर ही है। सुनील शेट्टी की परफॉर्मेंस राजपाल यादव के आगे फीकी सी दिखाई पड़ रही थी। उदिता गोस्वामी को एक शो पीस की तरह फिल्म में इस्तेमाल किया गया। लेकिन ओम पुरी, नीना गुप्ता, राकेश बेदी रजाक खान फिल्म में अपनी छाप छोड़ते दिखाई पड़े।
म्यूजिक
मुमैथ खान का आइटम सांग फिल्म में जान डालने के लिए काफी है। बाकी म्यूजिक कोई खास असर नहीं छोड़ता। ऐसा लगता है कि फिल्म के संगीत पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया गया।
निर्देशन
निर्देशक रजनीश राज ठाकुर फिल्म को एक धागे में पिरोने में कामयाब नहीं हो पाए। फिल्म में बहुत झोल है। कभी फिल्म एकदम स्लो हो जाती है तो भी एकदम तेज चलने लगती है। कभी फिल्म में बहुत हंसी आती है तो कभी बहुत बोर करती है फिल्म। कहने का मतलब है कि फिल्म में बिल्कुल भी बैलेंस नहीं है।
क्या है खास
मुमैथ खान का आइटम सांग देखा जा सकता है। 'दाल में कुछ काला है' फिल्म से तो यह फिल्म बहुत बेहतर है और हल्की-फुल्की हंसी तो आती ही है। राजपाल यादव में कैसे पूरी फिल्म को संभालने का हुनर है, ये इस फिल्म में देखा जा सकता है।
क्यों है बकवास
फिल्म निर्देशन या फिल्म इंडस्ट्री पर बनी फिल्में पहले भी कभी हिट नहीं हुई। फिल्म की कहानी भी कोई नई नहीं है। पहले भी फिल्म इंडस्ट्री, फिल्मों की मेकिंग, कास्टिंग काउच जैसी फिल्में बनी हैं जो कि कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई है।
फिल्म के सितारे
पिक्चर अभी बाकी है के सितारों के सितारे गर्दिश में हैं फिल्म के मुख्य किरदार सुनील शेट्टी ढैय्या के प्रभाव में हैं तो राजपाल यादव साढ़े साती के घेरे में। फिल्म की नायिका उदिता गोस्वामी भी शनि के प्रभाव में हैं लेकिन शनि इनकी कुण्डली में शश योग बनाकर बैठा है और शुक्र की दशा चल रही है जो इनके लिए लाभप्रद है।
इस फिल्म से उदिता को काफी समय बाद पर्दे पर आने का मौका मिला है जो शुक्र की ही मेहरबानी है। फिल्म शुभ नक्षत्र में रिलीज हो रही है जिसे लाभ देने वाला नक्षत्र कहा गया है, शायद यह थोड़ा फायदा दे जाए। राजपाल यादव और सुनील शेट्टी की कॉमेडी लोगों को मजा देगी।
बैनर: फिल्मी बॉक्स मूवीज
निर्माता: नरेन्द्र सिंह
निर्देशक: रजनीश राज ठाकुर
संगीत: सुखविंदर सिंह
कलाकार: सुनील शेट्टी, राजपाल यादव, उदिता गोस्वामी, राकेश बेदी, ओमपुरी, नीना गुप्ता, मुमैत खान
रेटिंग्ा: *1/2