Kaala Review: अविनाश तिवारी के कंधे पर टिकी टी सीरीज की पहली वेब सीरीज, नांबियार ने किया निराश
अब तक हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे विषय पर कई फिल्में और बेव सीरीज का निर्माण हो चुका है। ओटीटी प्लेटफार्म डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर आज से स्ट्रीम हुई वेब सीरीज 'काला' के जरिए टी सीरीज भी वेब सीरीज के निर्माण में कदम रख रही है। इस सीरीज का निर्माण भूषण कुमार और किशन कुमार ने सीरीज के निर्देशक बिजॉय नांबियार के साथ मिलकर किया है। इस सीरीज की मुख्य कड़ी अभिनेता अविनाश तिवारी हैं। यह सप्ताह अविनाश तिवारी के लिए बहुत ही खास है। कल उनकी वेब सीरीज 'बंबई मेरी जान' अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है और आज 'काला' डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई है।
वेब सीरीज 'काला' की कहानी मूलरूप से अविनाश तिवारी के किरदार ऋत्विक मुखर्जी के इर्द गिर्द घूमती है। ऋत्विक मुखर्जी एक आईबी ऑफिसर है, जिसे देश के बड़े बिजनेसमैन नमन आर्य के गैरकानूनी धंधे के बारे में जब पता चलता है, तो वह नमन आर्य के खिलाफ छानबीन शुरू करता है। इस छानबीन में ऋत्विक को पता चलता है कि नमन आर्य अपनी बिजनेस के आड़ में हवाला का काम बहुत बड़े स्तर पर कर रहा है। ऋत्विक मुखर्जी, नमन आर्य के खिलाफ सबूत इकट्ठे करना शुरू करता है, लेकिन इसी दौरान ऋत्विक मुखर्जी को ही फंसा दिया जाता है। यहां से खुद को निर्दोष साबित करने की जद्दोजहद शुरू होती है। आठ एपिसोड की यह सीरीज पूरी तरह से सस्पेंस, टर्न और ट्विस्ट से भरी पड़ी है।
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वेब सीरीज 'काला' जबरदस्त क्राइम ड्रामा और सस्पेंस से भरपूर वेब सीरीज है, जिसमें हवाला की दुनिया के साथ -साथ सत्ता की भूख और हवस को दिखाया गया। सीरीज में एक्शन और ड्रामा की टाइमिंग परफेक्ट लगती है, दर्शक बोर न हो इस लिए बीच में कॉमेडी का तड़का भी लगा दिया गया है। लेकिन शुरुआत बहुत धीमी है। इस सीरीज को अलग आठ एपिसोड की बजाय सात एपिसोड में बनाया गया होता तो सीरीज की कहानी चुस्त लगती है। ड्रामा को क्रिएट करने के चक्कर में बीच -बीच में कहानी थोड़ी सी बोझिल सी लगने लगती है। लेकिन हर एपिसोड की कहानी एक ऐसे मोड़ पर खत्म होती है कि अगला एपिसोड देखने की जिज्ञासा पैदा हो जाती है।
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सीरीज के निर्देशक बिजॉय नांबियार ने एक बेजोड़ कहानी पेश करने की कोशिश तो की है। लेकिन सस्पेंस वाले दृश्यों में कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। इसकी सबसे बड़ी वजह सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक है। अगर बैकग्राउंड म्यूजिक पर थोड़ा सा और ध्यान दिया गया होता तो सीरीज के सस्पेंस वाले दृश्य थोड़ा सा और उभर कर आता। यह इस सीरीज का बहुत ही कमजोर पहलू है। सीरीज की पृष्ठभूमि कोलकाता की है। इस वजह से कहीं-कहीं बंगाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
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नीरज पांडे की वेब सीरीज 'खाकी द बिहार चैप्टर’ में चंदन महतो का किरदार निभाकर सुर्खियों में आए अभिनेता अविनाश तिवारी की इस हफ्ते एक साथ दो क्राइम वेब सीरीज रिलीज हुई है। कल उनकी वेब सीरीज 'बंबई मेरी जान' रिलीज हुई और आज काला रिलीज हुई है। 'बंबई मेरी जान' में उनके अभिनय की सराहना हो ही रही है। 'काला' में भी सीरीज का पूरा दामोदर उनके ही कंधे पर है। इस सीरीज में वह अपने संवाद अदायगी और एक्शन दृश्यों से अच्छा खासा प्रभाव छोड़ते हैं। दिवंगत अभिनेता विनोद मेहरा के बेटे रोहन विनोद मेहरा ने सीरीज में अपनी उम्र से बड़ा किरदार निभाया है। उन्होंने अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह से न्याय करने की कोशिश की है। जितिन गुलाटी, ताहिर शब्बीर,एलीशा मेयर और हितेन तेजवानी का परफार्मेंस ठीक ठाक रहा।
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