Hunt For The Indian Mujahideen Review: समझिए कहां से आया इंडियन मुजाहिदीन, किसने ठोकी इसके ताबूत में आखिरी कील
गुजरात के अहमदाबाद में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट में आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का नाम सामने आया। यही नहीं, इस ब्लास्ट के ठीक पांच मिनट पहले इस आतंकी संगठन के तरफ से मीडिया में एक ईमेल आया कि रोक सको तो रोक लो। पुलिस के लिए इसकी तहकीकात बड़ी चुनौती रही लेकिन तफ्तीश शुरू हुई तो इसके तार बनारस, जयपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ते चले गए। इसी सब पर बानीजे एशिया ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘हंट फॉर द इंडियन मुजाहिदीन’ बनाई है।
डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'हंट फॉर द इंडियन मुजाहिद्दीन' की कहानी जांच अधिकारियों के निजी अनुभवों के आधार पर आगे बढ़ती है। गुजरात पुलिस ने सबसे पहले इस बात का पता लगाया कि मेल कहां से आया। फिर पता चलता है कि नवी मुम्बई के सानपाड़ा से मेल किया गया। ये उन दिनों की बात है जब नया नया वाई फाई आया था तो कोई पासवर्ड नहीं लगता था। इसी का लोगों ने फायदा उठाया। तहकीकात आगे बढ़ती है तो पता चलता है कि मंसूर नामक एक शख्स पुणे से नवी मुंबई आया और वहां वाई फाई यूज करके उसने सारे मीडिया को मेल भेजा। बस यहीं से मुंबई पुलिस की तफ्तीश सही रास्ते पर चल निकलती है।
Rakhi Sawant: कई घंटों की पूछताछ के बाद पुलिस स्टेशन से निकलीं राखी सावंत, पति आदिल दिखे साथ, देखें वीडियो
'हंट फॉर द इंडियन मुजाहिद्दीन' में यह भी दिखाया गया है कि आखिर में इंडियन मुजाहिदीन की स्थापना हुई कैसे? पता चलता है कि इस संगठन को बनाने की कवायद तिहाड़ जेल में ही शुरू हो गई थी। कोलकाता का रहने वाला आसिफ रजा खान जब दिल्ली आया तो उसे गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। जहां पर उसकी मुलाकात आफताब अंसारी और उमर से हुई। आसिफ रजा खान पहले से ही तबलीगी जमात और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया से जुड़ा हुआ था। उमर 1999 में छूट गया। जब आसिफ रजा खान और आफताब अंसारी भी जेल से छूट गए तो दोनो उमर से मिलने पाकिस्तान गए। उमर ने उनकी मुलाकात लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के नेताओं से कराई और फिर इंडियन मुजाहिदीन संगठन शुरू करने की बात शुरू हो गई।
Vardhan Puri: 'सीधा फेवर मांग कर..', अमरीश पुरी के पोते वर्धन पुरी ने उठाई आवाज, खोले इंडस्ट्री के काले चिट्ठे
'हंट फॉर द इंडियन मुजाहिद्दीन' में इस बात का खुलासा किया गया है कि किस तरह से पुलिस ने इंडियन मुजाहिदीन के एक एक सदस्यों को ढूंढ कर निकाला। पुलिस की जांच गुजरात से शुरू होकर, मुंबई से इंदौर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पुणे, मंगलोर तक पहुंचती है और पुलिस इस संगठन के सदस्यों को गिरफ्तार करती है। इंडियन मुजाहिदीन के दो सदस्य रियाज भटकल और इकबाल भटकल के बारे में अब कोई खुलासा नहीं हुआ है। डाक्यूमेंट्री में इस बात का खुलासा किया गया है कि इंडियन मुजाहिदीन संगठन का कोई भी सदस्य अब सक्रिय नहीं है।
Salaar: प्रभास की 'सालार' के सेट से सामने आई नई तस्वीर, उत्साहित फैंस ने मेकर्स से टीजर पर मांगा अपडेट
'हंट फॉर द इंडियन मुजाहिद्दीन' में जो भी तथ्य दिखाए गए हैं, उन सबके बारे में दर्शक न्यूज चैनल पर देख चुके हैं। पूरी सीरीज देखने के बाद मन में कोई नई चीज जानने की जिज्ञासा ही नहीं रहती है। जांच अधिकारियों के फर्स्ट पर्सन नैरेटिव से कहानी आगे बढ़ती है, इस सीरीज में गांधी नगर गुजरात के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस मयूर चावड़ा, गुजरात की डिप्टी कमिश्नर उषा राड़ा, महाराष्ट्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक देवेन भारती और जांच अधिकारी अरुण चौहान ने अपने अपने अनुभव शेयर किए हैं। शूटिंग ज्यादातर वास्तविक लोकेशन पर हुई है। जांच अधिकारियों की बात ओरीजनल फुटेज या फिर ग्राफिक्स के जरिए घटनाओं को समझाने की कोशिश की गई है। ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में बहुत बड़ी जिम्मेदारी लेखक और रिसर्च टीम की होती है। इस मामले में लेखक सुदर्शन सुरेश की मेहनत नजर आती है हालांकि एक ही बात का बार बार दोहराव खटकता है। डॉक्यूमेंट्री के शौकीनों के लिए ये एक अच्छी कोशिश है डिस्कवरी प्लस की।
Bigg Boss 16: बिग बॉस के घर में टिकट टू फिनाले के लिए चली 'गोलियां', निमृत की कैप्टंसी अब भी बरकरार