फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   Film Review of namaste england Arjun Kapoor and Parineeti Chopra

Movie Review: ना अभिनय- ना कहानी, 'नमस्ते इंग्लैंड' को दूर से ही करें नमस्ते

Fri, 19 Oct 2018 10:04 AM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Fri, 19 Oct 2018 10:04 AM IST
विज्ञापन
Film Review of namaste england Arjun Kapoor and Parineeti Chopra
-निर्माताः विपुल अमृतलाल शाह-जयंती लाल गाडा
विज्ञापन

-निर्देशकः विपुल अमृतलाल शाह
-सितारेः अर्जुन कपूर, परिणीति चोपड़ा, सतीश कौशिक, आदित्य सील, अलंकृता सहाय, विनोद नागपाल
रेटिंग *1/2


कोई फिल्म क्यों बनती है और अगर बन गई तो क्यों देखी जाए? दोनों सवाल नमस्ते इंग्लैंड देखते हुए उठते हैं। विपुल शाह सीनियर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर हैं लेकिन समय के साथ ताल मिलाने की उनकी यह कोशिश बहुत कमजोर है। वह 1990 के दशक और 2018 को मिलाकर जो बनाते हैं, वह हास्यास्पद है। एक तरफ इंटरनेशल ज्वैलरी डिजाइनर बनने की महत्वाकांक्षा पाले जसमीत (परिणीति चोपड़ा) का बूढ़ा दादा है, जो पोती की शादी के लिए उसके प्रेमी परम (अर्जुन कपूर) के परिवार वालों के आगे शर्त रखता है कि बहू को घर से निकल कर बाहर काम नहीं करने देंगे। दूसरी तरफ जसमीत शादी के बाद इंग्लैंड जाने के लिए वहां रहने वाले एक बंदे के साथ नकली शादी तक कर लेती है। उसका तर्क है इंग्लैंड की नागरिकता मिल जाने पर परम को भी वहां बुला लेगी। क्रोधित परम पीछे-पीछे गैर-कानूनी रास्ते से इंग्लैंड जाता है और वहां आलीषा (अलंकृता सहाय) की मदद से जसमीत को असली प्यार का एहसास दिलाता है। प्यार अंततः इंसान से होता है। करिअर या देश से नहीं।

Film Review of namaste england Arjun Kapoor and Parineeti Chopra
फिल्म पूरी तरह अविश्वनीयस घटनाक्रमों से बुनी गई और यह नहीं सोचा गया कि दर्शक को पास दिमाग भी होता है। तर्क कोई चीज होती है। महिलाओं का घर से निकल कर काम करने का मुद्दा अब छोटे शहरों-कस्बों में भी उतना बड़ा नहीं है, जितना जसमीत के दादाजी के दिमाग में दिखाया गया। लेकिन उसके आगे जो ड्रामा विपुल शाह और उनके राइटरों की टीम ने रचा, वह सवाल पैदा करता है कि आखिर उन्होंने यह फिल्म क्यों बनाई? यह अक्षय कुमार-कैटरीना कैफ की नमस्ते लंदन का सीक्वल नहीं है और नमस्ते इंग्लैंड कहने भर से इसमें पुरानी रंगत नहीं आ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

Film Review of namaste england Arjun Kapoor and Parineeti Chopra
फिल्म विपुल शाह का पुराना पड़ जाना तो बताती है लेकिन इससे भी ज्यादा यह अर्जुन कपूर और परिणीति चोपड़ा के करिअर के लिए खतरे की घंटी है। उनका फिल्म का चयन तो खराब है ही, अभिनय उससे भी ज्यादा दयनीय है। हालांकि इसके लिए वह कहानी और निर्देशन को दोष दे सकते हैं। यहां उनके प्यार की कहानी दशहरे, दीवाली से होली तक का सफर तय करती है। इस प्यार की गहराई का हाल यह है कि जसमीत के गले लगने पर हर बार परम के मन में गंदी बातें आती है।

वह यह बात बार-बार कहता भी है। वीजा पर बेतुकी बातें हैं। विपुल ने कहानी से ज्यादा दृश्य रचे हैं। ऐसा लगता है कि वह मानते रहे कि कथित भव्यता ही किसी फिल्म को देखे जाने योग्य बना देती है। फिल्म के गाने शुरू होते ही लगते हैं कि कब खत्म होंगे। नमस्ते इंग्लैंड में न तो इंग्लैंड जमता है और न पंजाब। नया यहां कुछ नहीं है। सारा कुछ घिसा-पिटा है। किसी को दूर से नमस्कार करना भले ही मुहावरेदार भाषा में कही बात हो परंतु नमस्ते इंग्लैंड के बारे में आप इसे दो टूक समझ सकते है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed