फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   film review of marry kom

आपके दिल को छू पाएगी 'मैरी कॉम' की कहानी?

Fri, 05 Sep 2014 12:28 PM IST
Updated Fri, 05 Sep 2014 12:28 PM IST
विज्ञापन
film review of marry kom

खबरों की बाढ़ के इस दौर में कई बार खबरें देर से भी पहुंचती हैं। पांच बार की विश्व महिला बॉक्सिंग चैंपियन मैरी कॉम को अधिकांश लोगों ने तब जाना जब उन्होंने 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों में भारत के लिए कांस्य पदक जीता।

विज्ञापन


क्या ऐसा इसलिए हुआ कि मैरी मणिपुर से हैं और बहुत सारे लोग भारत के नक्शे में मणिपुर की स्थिति भी नहीं जानते!! यही मैरी निर्देशक ओमंग कुमार की पहली फिल्म के केंद्र में हैं। आज के युवाओं के आदर्शों में से एक।
विज्ञापन


देश के सुदूर कोने में चावल उगाने वाले एक किसान की बेटी के संघर्ष की कहानी आज अखबारों-पत्रिकाओं और टीवी के माध्यम से लोगों तक पहुंच चुकी है, लेकिन बड़े पर्दे पर किसी भी कहानी को देखने का रोमांच अलग है। यही कारण है कि अक्सर जानी-सुनी बातें देखने भी लोग सिनेमाघरों में पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पर्दे पर उतारा निजी जीवन

film review of marry kom

ओमंग ने मैरी के बॉक्सर बनने का संघर्ष दिखाने के साथ उनके निजी जीवन की घटनाओं को फिल्म में उतारा है। साथ ही एक खिलाड़ी की निराशा से उपजे गुस्से को भी उन्होंने दिखाया, जब मैरी को विवाह के बाद गर्भवती होने पर रिंग से बाहर हो जाना पड़ता है।

प्रियंका चोपड़ा भले ही मैरी की तरह न दिखी हों लेकिन मैरी के स्वभाव, हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज को उन्होंने खूबसूरती से जीया है। उनकी मेहनत साफ दिखाई पड़ती है। फिल्म मैरी के बचपन से शुरू होकर उनके विश्व चैंपियन बनने तक आपको बांधे रहती है। यह हिस्सा मैरी के सपनों के सच होने की दास्तान है, जिससे आप खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

बाद में भटक गए निर्देशक

film review of marry kom

इसके बाद निर्देशक भटक गए हैं। फिल्म बिल्कुल ढीली और लचर हो जाती है। यहां स्क्रिप्ट और निर्देशन की कमियां सामने दिखने लगती है। डॉक्युमेंट्री और सिनेमाई ड्रामा अजीब ढंग से मिक्स हो जाता है। मैरी के पति की भूमिका में दर्शन कुमार और कोच के रोल में नेपाली ऐक्टर सुनील थापा जमे हैं।

आम दर्शक मैरी को ओलंपिक विजेता के रूप में जानता है, लेकिन निर्देशक उनके चौथी बार विश्व चैंपियन बनने के साथ फिल्म का अंतः करते है। जहां स्टेडियम में राष्ट्रगीत की धुन बजती है और पर्दे पर निवेदन उभरता है कि इसके सम्मान में सीट से खड़े हो जाएं। फिल्म का यहां अंत हो जाता है।

अधूरी सी लगती है कहानी

film review of marry kom

फिल्म अधूरी-सी लगती है। मैरी की जिंदगी के डीटेल यहां गायब हैं। संजय लीला भंसाली अक्सर लंबी फिल्में बनाते हैं, लेकिन यहां क्रिएटिव डायरेक्टर होने के बावजूद उन्होंने फिल्म को छोटा रखा। क्या यह माना जाए कि निर्देशकों पर बाजार का दबाव हावी है, जिसमें लंबी होने पर फिल्म को ऊबाऊ मान लिए जाने का खतरा पैदा हो जाता है।

फिल्म का दूसरा हिस्सा बहुत निराश करता है। जिन्होंने ‘भाग मिल्खा भाग’ देखी है, वे इस फिल्म को उससे कमतर पाएंगे। अगर आप मैरी की जिंदगी के बीस साल को दो घंटे में देखना चाहते हैं तो ‘मैरी कॉम’ देख सकते हैं। लेकिन फिल्म देखने का आनंद आपको मिलेगा, इसमें संदेह है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed