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Movie Review: अगर हाफ में मिल जाए टिकट तो देख आइए 'हाफ गर्लफ्रेंड'

रवि बुले Updated Fri, 19 May 2017 03:48 PM IST
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'हाफ गर्लफ्रेंड' के पोस्टर में श्रद्दा कपूर और अर्जुन कपूर
'हाफ गर्लफ्रेंड' के पोस्टर में श्रद्दा कपूर और अर्जुन कपूर

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- निर्माताः बालाजी मोशन पिक्चर्स, मोहित सूरी, चेतन भगत
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- निर्देशकः मोहित सूरी

- सितारेः अर्जुन कपूर, श्रद्धा कपूर, विक्रांत मैसी, सीमा बिस्वास

- रेटिंग ** 2
 

'हाफ गर्लफ्रेंड' का मतलब चेतन भगत अपने नॉवेल में पहले ही समझा चुके हैं। दोस्त से थोड़ी-सी ज्यादा मगर गर्लफ्रेंड से काफी कम। नॉवेल पर बनी फिल्म भी कुछ ऐसी है। आप चेतन के फैन नहीं हैं और अर्जुन-श्रद्धा फेवरेट नहीं हैं तो फिल्म वक्त की बर्बादी से ज्यादा और एंटरटनमेंट से कम लगेगी। ऐसा कई बार हुआ है कि लड़का प्यार करता रह जाता है और लड़की कहानी में उसे छोड़ कर दूसरे की हो जाती है। थोड़े समय बाद दोनों की राहें फिर मिलती हैं। पिछले ही शुक्रवार को मेरी प्यारी बिंदु में भी ऐसा हुआ था।

बिहार के सिमराव के राज परिवार से कनेक्ट माधव झा (अर्जुन कपूर) स्पोर्ट्स कोटे से दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में पढ़ने आता है मगर उसकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है। यहीं उसकी मुलाकात ठेठ दिल्ली की अंग्रेजी-हाईफाई लड़की रिया सोमानी (श्रद्धा कपूर) से होती है। बास्केटबॉल कोर्ट से होती हुई बात आगे बढ़ती है मगर सिर्फ माधव की तरफ से। दोस्त उसे समझाते रह जाते हैं कि वह रिया और अपने बीच ‘क्लास डिफरेंस’ को नहीं समझ रहा। रिया भी अलग है, उसके सपने भी अलग हैं। उसे सिंगर बनने न्यूयॉर्क जाना है।


माधव का जुनून देख कर रिया उसकी हाफ गर्लफ्रेंड बनने को तो राजी हो जाती है पर यह हाफ उनकी जिंदगी में मुश्किलें बढ़ाता है। फिल्म के सेकेंड हाफ में स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है और अगर पॉपकॉर्न खत्म हो जाएं तो समझ नहीं पड़ता कि अब क्या करें?

हाफ गर्लफ्रेंड चेतन के कम सराहे गए उपन्यासों में से है। कहानी जल्द ही उबाने लगती है और हाफ में ही कनेक्शन टूट जाता है। आप सोचते हैं कि फिल्म कब खत्म होगी? क्या हाफ में उठ के चल दें? क्या अच्छा नहीं होता कि फिल्म का हाफ हिट ही लगता? अर्जुन कपूर पुरानी फिल्मों जैसे ही लगे हैं। यह जरूर है कि वह कहीं-कहीं मेहनत करते नजर आते हैं। इसके बावजूद चेतन के उपन्यास टू स्टेट्स के कृष मल्होत्रा जैसी सहजता माधव में नहीं नजर आती।

श्रद्धा कपूर खोई-खोई ग्लैमर गर्ल लगी हैं। निर्देशक को लगता है कि कॉलेज में लड़कों की नजर लड़कियों के स्कर्ट पर ही रहती है। सो, यहां उन्होंने श्रद्धा के स्कर्ट ज्यादातर हाफ कर दिए। फिल्म में अगर कुछ फुल है तो अरिजीत सिंह का गाया मैं फिर भी तुमको चाहूंगा और बारिश गीत में ऐश किंग की आवाज। दोनों गाने और आवाजें बहुत खूबसूरत हैं।

शायद यह कहानी और स्क्रिप्ट की कमजोरी की वजह से हो परंतु निर्देशक मोहित सूरी की इस फिल्म में आशिकी-2 और एक विलेन जैसी पकड़ नजर नहीं आती। कॉलेज जाने वाले युवा भले ही माधव और रिया से कहीं-कहीं खुद को कनेक्ट करें परंतु फिल्म से जुड़ाव हाफ ही रहेगा।

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