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'मांझीः द माउंटेन मैन ': प्यार के लिए कोई ऐसा भी कर सकता है!

Fri, 21 Aug 2015 10:39 PM IST
Updated Fri, 21 Aug 2015 10:39 PM IST
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film review: Manjhi the mountain man

निर्माताः एनएफडीसी/माया मूवीज, निर्देशकः केतन मेहता, सितारेः नवाजुद्दीन सिद्दिकी, राधिका आप्टे

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रेटिंग ***1/2
खोदा पहाड़, निकला रास्ता। मांझीः द माउंटेन मैन देखने के बाद आपके मन में ऐसी ही और नई बातें आ सकती हैं। इंसानी इरादों में छुपे फौलाद को लेकर आपका विश्वास बढ़ सकता है। लेकिन साथ ही आपको यह भी पता चलता है कि प्रेम में कितनी ताकत होती है।

इस बेहद कठोर और पत्थर दिल दुनिया में जब पढ़े-लिखों के मन में किसी के लिए दर्द पैदा नहीं होता तब एक बेपढ़ा-अंगूठा छाप इंसान कैसे अपने प्यार को अमर कर जाता है, यह दशरथ मांझी की कहानी बताती है। अपनी व्यस्तताओं में फिर डूब जाने से पहले कुछ पल को ही सही, आप सोच में पड़ जाते हैं कि क्या प्यार के लिए कोई ऐसा भी कर सकता है!
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आश्चर्य कि जब आप पहाड़ को काट दिए जाने से उभर आए रास्ते को पर्दे पर देखते हैं तो वहां खालीपन नहीं दिखता। ऐसा महसूस होता है मानो कोई अदृश्य ताजमहल खड़ा है!!
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साधारण इंसान को नायक बनाती है 'मांझी द माउंटेनमैन'

film review: Manjhi the mountain man
सिनेमा अपने कथानकों में साधारण इंसान को नायक बनाता है। निर्देशक केतन मेहता की मांझी सच्चे अर्थों में यह काम करती है। बिहार के गया जिले में स्थित गहलोर गांव और वजीरगंज ब्लॉक के बीच एक ऊंचे पहाड़ को काट कर रास्ता बना देने वाले दशरथ मांझी (1934-2007) को हमारे सामने सामने लाती है।


इस पहाड़ को पार करना आसान नहीं था और जिले तक जाने में गांववालों को मीलों लंबा सफर तय करना पड़ता था। आजादी के कुछ वर्षों बाद दशरथ मांझी की कहानी शुरू होती है। आप पाते हैं कि बचपन से ही कुछ बागी तेवरों वाला यह शख्स युवावस्था में अपनी पत्नी के पहाड़ से गिर कर मर जाने के बाद हथौड़ा-छैनी लेकर पहाड़ को काट डालने का प्रण कर लेता है।

यह प्रण किसी भीष्म प्रतिज्ञा से कम नहीं मालूम पड़ता। 22-23 बरस लगातार लग कर वह अपने इरादों से पहाड़ को धूल-धूसरित कर देता है। मांझीः द माउंटेन मैन की सबसे बड़ी खूबी इसके नायक नवाजुद्दीन सिद्दिकी हैं। युवावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक वह इस तरह दशरथ मांझी के किरदार में समा जाते हैं कि आपको वक्त का बढ़ना पता नहीं चलता। यह विश्वास करना कठिन होता है कि कोई कलाकार सामने अभिनय कर रहा है और उसका रूप मेकअप इत्यादि से बदल रहा है।

नवाजुद्दीन अपने करियर के सबसे शानदार रोल में

film review: Manjhi the mountain man

आप एक शख्स को अपनी आंखों के आगे उसके दृढ़ इरादों के साथ जिंदगी से मुठभेड़ करते देखते हैं। नवाजुद्दीन अपने करियर के सबसे कठिन और सबसे शानदार रोल में हैं। उनके हाव-भाव और संवाद अदायगी आपको मोहित कर देती है। अगर आपने दशरथ मांझी को नहीं देखा तो नवाजुद्दीन में उन्हें देख सकते हैं।

आप दथरथ मांझी की कहानी को जानते हों तब भी सिर्फ नवाज के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है। राधिका आप्टे ने मांझी की पत्नी की भूमिका में नवाजुद्दीन का साथ खूबसूरती से निभाया है। वह भी अपनी भूमिका में बेहद सहज और सुंदर हैं। केतन मेहता ने लंबे कालखंड को चतुराई से दो घंटे के आसपास समेटा है।

फिल्म का कैमरावर्क और एडिटिंग अच्छे हैं। मांझी के दृढ़ इरादों के साथ फिल्म में आम जन के साथ हमारे राजनेताओं के व्यवहार और बाबू व्यवस्था पर भी करारी चोट है। यह फिल्म विकास की घोंघे से भी धीमी चाल की गवाही देती है।

साथ ही संदेश देती है कि न भगवान भरोसे बैठें और न व्यवस्था के भरोसे। व्यवस्था का तो हाल पता है, क्या पता भगवान भी हमरे ही भरोसे बैठा हो! मांझी की कहानी का बेहद खूबसूरत पक्ष प्रेम है। ...और खास बात यह कि यहां प्रेमिका एक पत्नी है।

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