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Doctor Strange 2 Review: टूटे दिलों की दास्तां पर भारी स्पेशल इफेक्ट्स, मार्वल की नई फिल्म में छाईं एलिजाबेथ

Fri, 06 May 2022 10:34 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 06 May 2022 10:34 AM IST
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Doctor Strange In The Multiverse Of Madness Review Hindi Benedict Cumberbatch movie Sam Raimi Elizabeth Olsen
डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस
कलाकार
बेनेडिक्ट कंबरबैच , एलिजाबेथ ऑल्सेन , बेनेडिक्ट वोंग और रेचेल मैकएडम्स आदि
लेखक
माइकल वॉल्ड्रॉन
निर्देशक
सैम रैमी
निर्माता
मार्वल स्टूडियोज
रिलीज डेट
6 मई 2022
रेटिंग
2.5/5

ऐसा कम ही होता है कि फिल्म आप किसी एक किरदार की देखने जाएं और फिल्म देखकर सिनेमाहॉल से बाहर निकलें तो दिमाग में छवि किसी दूसरे किरदार की बसी मिले। मार्वल सिनेमैटिक यूनीवर्स (एमसीयू) की नई फिल्म फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ के साथ यही हो रहा है। डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर प्रसारित हो चुकीं तीन वेब सीरीज ‘वांडा विजन’, ‘लोकी’ और ‘व्हाट इफ’ में बोए गए बीज एमसीयू को इस फिल्म से अलग बरगद बनाने की कोशिश हैं। लेकिन, वट वृक्ष बनने में समय लगता है। ये तुरत फुरत नहीं हो सकता। एक ही समय पर अलग अलग ब्रह्मांडों में चलती कहानियों को जिस तरह से मार्वल स्टूडियो के कर्णधारों ने फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ में जोड़ने की कोशिश की है, उसे को समझने, अपनाने और पहचानने में एमसीयू के घाघ दर्शकों को भी समय लगेगा। ये फिल्म विशाल है, भव्य है और नयनाभिराम भी है। लेकिन, इसकी अंतर्धारा से मार्वल कॉमिक्स का डीएनए गायब है।

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Doctor Strange In The Multiverse Of Madness Review Hindi Benedict Cumberbatch movie Sam Raimi Elizabeth Olsen
डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म देखने से पहले का होमवर्क
फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ एमसीयू के ‘पाठ्यक्रम’ का वह अध्याय है जिसे पढ़ने (देखने) के लिए आपको घर से तैयार होकर आने की जरूरत है। अगर आपने डिज्नी प्लस पर रिलीज हुईं वेब सीरीज ‘वांडा विजन’, ‘लोकी’ और ‘व्हाट इफ’ नहीं देखी हैं तो ये चैप्टर आपको समझ नहीं आएगा। तो फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ को देखने की पहली शर्त यही है कि आप पहले इन सीरीज को देखें तभी ‘स्पाइडरमैन: नो वे होम’ से आगे की इस कहानी के सिरे आपको पकड़ आएंगे। नौ साल बाद निर्देशन में लौटे सैम रैमी के सामने चुनौती है अपनी डरावनी फिल्मों की खास पहचान और एमसीयू की तीन स्पाइडर मैन फिल्मों के निर्देशन से बनी अपनी ब्रांडिंग को बनाए रखने की। और, करिश्मा बेनेडिक्ट कंबरबैच का भी इस बार कसौटी पर है।

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Doctor Strange In The Multiverse Of Madness Review Hindi Benedict Cumberbatch movie Sam Raimi Elizabeth Olsen
डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ देखने पहुंचे दर्शकों को पता है कि डॉक्टर स्ट्रेंज क्या क्या कर सकता है। उसकी जादुई शक्तियों के विस्तार के लिए ही मल्टीवर्स का ताना बाना बुना गया है। लेकिन फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ की कहानी का केंद्र वह नहीं हैं। फिल्म की सरपट भागती पटकथा इसके किरदारों को सुस्ताने का मौका ही नहीं देती है। जिस किरदार को लेकर फिल्म सोची गई वह किनारे हो गया और वांडा यानी स्कारलेट विच यहां कहानी का केंद्र बिंदु बन जाती है। कहानी एमसीयू में पहुंची एक युवती की है। उसका पीछा हो रहा है। उसकी अपनी शक्तियां हैं। हीरो डॉक्टर स्ट्रेंज को उसे ‘विलेन’ से बचाना है। प्रेमिका उसकी किसी और की हो चुकी है। वांडा का विजन भी कब का खो चुका है और अमेरिका शावेज नाम की इस युवती का दिल भी दुखी है।

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डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बन नहीं पाया बढ़िया माहौल
मार्वल स्टूडियोज की इस फिल्म को रिलीज करने वाली कंपनी डिजनी से भी इस बार फिल्म की रिलीज से पहले गलतियां खूब हुईं। फिल्म की एडवांस बुकिंग जैसे ही महीने भर पहले खोली गई, एमसीयू के प्रशंसकों को समझ आ गया कि कुछ तो लोचा है। फिल्म की ब्रांडिंग और मार्केटिंग इसकी तीसरी सबसे कमजोर कड़ी रही। फिल्म के निर्माता केविन फाइगी के बयानों से भी समझ आता रहा कि मामला कहीं न कहीं गड़बड़ है। और, फिल्म देखने के बाद ये बात साफ भी हो जाती है। फिल्म की रिलीज से पहले इसकी इतनी सामग्री यूट्यूब पर डाल दी गई कि एमसीयू की फिल्में देखने के लिए बेकरार रहने वालों की फिल्म में दिलचस्पी ही कम होती चली गई। फिर भी एमसीयू के प्रशंसकों का अपना अलग भरोसा है इन फिल्मों पर। एडवांस बुकिंग इसका सबूत भी है।

Doctor Strange In The Multiverse Of Madness Review Hindi Benedict Cumberbatch movie Sam Raimi Elizabeth Olsen
डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कहां चूकी डॉक्टर स्ट्रेंज 2?
फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ तीन वजहों से एमसीयू के प्रशंसकों को निराश करती है। पहली वजह है इस फिल्म की कहानी, इसकी पटकथा और इसके संवाद। एमसीयू के सबसे पसंदीदा किरदार स्पाइडरमैन की हंसी उड़ाने वाले संवादों का स्वाद सही नहीं है। ऐसा करके मार्वल स्टूडियोज ने निराश ही किया है। फिल्म की कहानी को समझने के लिए जितनी हाई लेवल की आईक्यू चाहिए, वह सबमें होना मुश्किल है और इसकी पटकथा का विस्तार भी बहुत ज्यादा है। ये सही है कि फिल्म में नियमित अंतराल पर दिखने वाले दर्शकों के पसंदीदा किरदार उनका आकर्षण परदे की तरफ बनाए रखते हैं लेकिन ये बस टोटके हैं। असली कहानी जो डॉक्टर स्ट्रेंज की होनी चाहिए थी, वह वांडा की होकर रह गई है। तालियां भी सिनेमा हॉल में उन्हें ही सबसे ज्यादा मिलती हैं।

Doctor Strange In The Multiverse Of Madness Review Hindi Benedict Cumberbatch movie Sam Raimi Elizabeth Olsen
'डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

नहीं बनी भावनात्मक धारा
दूसरी वजह जिसके चलते फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ से दर्शकों का राब्ता अच्छे से नहीं जुड़ पाता है वह है फिल्म का निर्देशन और इसका संपादन। फिल्म को चुस्त और चौकस रखने के चक्कर में फिल्म के किरदारों का ठहराव गायब हो गया है। सारे किरदार लगातार कुछ न कुछ करते रहते हैं, भागते रहते हैं। फिल्म 10, 15 मिनट और बढ़ जाती तो शायद ही कोई इसकी शिकायत करता है और तीसरी वजह जो फिल्म से दर्शकों का रिश्ता न जुड़ पाने की है, वह है इसकी छिछली भावनात्मक धारा। फिल्म के तीन अहम किरदारों अमेरिका शावेज, वांडा मैक्सिमॉफ और डॉक्टर स्ट्रेंज के दर्द भरे अतीत को लेकर तीनों के बीच जिस तरह की भावनात्मक डोर बंधनी चाहिए थी, फिल्म उसमें चूक जाती है।

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'डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

एलिजाबेथ नंबर वन
अभिनय के लिहाज से फिल्म में एलिजाबेथ सबसे ज्यादा तारीफ बटोर ले जाती हैं। एलिजाबेथ का व्यक्तित्व शुरू से बहुत आकर्षक रहा है। उनकी मुस्कान मोहिनी है और उनके गुस्से पर भी दर्शकों को प्यार आता है। बेनेडिक्ट कंबरबैच को फिल्म में उम्रदराज होते दिखाया गया है। बाल चांदी जैसे हो रहे हैं। दाढ़ी भी चेहरे पर ज्यादा फैल चुकी है। लेकिन, पहली बार उनका आकर्षण क्षीण होता नजर आया। हालांकि, रोल इस बार उनके पास दो दो हैं। उधर, पहली फिल्म में अपने आदर्श सर्जन को देखकर ही आंखें नम कर लेने वाली क्रिस्टीन के किरदार में रेचेल इस बार बदली बदली नजर आईं। हां, वॉन्ग और गोमेज ने अपना अपना इलाका मजबूती से संभाले रखा।

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'डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

स्पेशल इफेक्ट्स के टोटके
तकनीकी तौर पर देखें तो फिल्म मार्वल स्टूडियोज के स्पेशल इफेक्ट्स का भी नया विस्तार है। लेकिन, केविन फाइगी को ये ध्यान रखना होगा कि सिनेमा भावनाओं का उफान है। भावनाओं पर टोटके हावी होंगे तो दर्शक का ध्यान टिकेगा नहीं। ऐसा नहीं है कि मार्वेल सिनेमैटिक यूनीवर्स की पिछली सारी फिल्में दर्शकों की उम्मीदों पर सौ फीसदी खरी उतरी ही हों, ‘थॉर: द डार्क वर्ल्ड’ में भी ये स्टूडियो गच्चा खा चुका है। दोनों फिल्मों का कनेक्शन जोड़ने पर ये भी साफ होता है कि फिल्म ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ को सैम रैमी के संसार की पहचान देना सही फैसला नहीं है।

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'डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस' - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

देखें कि न देखें..
कोरोना संक्रमण काल के बीते दो साल में दर्शकों ने बहुत उहापोह देखा है, अब वह बहुत मानसिक उहापोह वाली फिल्में या ऐसी फिल्में जिनमें मनोरंजन की बजाय उनको कहानी के ओर छोर को लेकर बहुत दिमागी जोर लगाना पड़े, देखने को उतने उत्सुक नहीं होंगे। एमसीयू के जो प्रशंसक हैं, वे तो ये फिल्म इस कल्पना लोक के नए विस्तार को जानने और आगे आने वाली फिल्मों को समझने के लिए देखेंगे ही, लेकिन आम दर्शकों के लिए फिल्म किसी पहेली से कम नहीं है, लिहाजा अपने जोखिम पर ही देखें।

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