Sameer Anjaan: ‘मैंने खुद को हर पीढ़ी के साथ अपडेट किया’, समीर ने बताया पहली कविता पर क्या था लोगों का रिएक्शन
Sameer Anjaan Interview: 90 के दशक में अपने गीतों से सबको दीवाना बना देने वाले दिग्गज गीतकार समीर अनजान ने आखिर क्यों बदला अपना नाम? जानिए कैसा रहा गीतकार का सफर।
विस्तार
“संगीतकार ऐसी चीज है जिससे हर कोई जुड़ना चाहता है। हर किसी के दिल मे संगीत होता है। अगर किसी के पास संगीत के लिए दिल नहीं है तो फिर वह दिल नहीं पत्थर है।”
यह कहना है भारत के दिग्गज गीतकार समीर अनजान का। फिल्मी दुनिया में समीर अनजान, एक ऐसा नाम है जो किसी के लिए अनजान नहीं है। हिंदुस्तान में रहने वाले लोग उनके गीतों को सुनकर और गुनगुनाकर मोहब्बत का इजहार करते हैं। एक ऐसा गीतकार, जिसे यह कला विरासत में मिली, लेकिन उन्होंने अपने पिता की खींची गई लकीर से भी लंबी लाइन खींच दी। उनके नाम हिंदी सिनेमा में सर्वाधिक गीत लिखने का रिकॉर्ड दर्ज हैं। समीर अनजान ने अमर उजाला से खास बातचीत में बॉलीवुड के नेपोटिज्म, राजनीति और म्यूजिक इंडस्ट्री में अपने सफर की अनसुनी कहानियां सुनाईं।
लोगों को मेरा असली नाम पसंद नहीं आया तो अनजान बन गया
उत्तर प्रदेश के बनारस के शीतला पांडेय कैसे समीर अनजान बने इस पर वह कहते हैं कि मेरी पहली कविता बनारस के एक प्रमुख अखबार जयदेश में प्रकाशित हुई। उस वक्त में इस अखबार को उसके ऑफिस की दीवार पर लगाया जाता था। पहली बार जब कविता लगी तो लोगों ने कहा कि शीतला पांडेय तो किसी क्लर्क या किसी शिक्षक का नाम लगता है। इसके बाद में दो-तीन कविता घर के नाम राजन से लिखीं, उस पर भी कोई रिएक्शन नहीं आया। उस वक्त मैं समीर का एक नॉवेल पढ़ रहा था। मैंने विचार किया और अगली कविता इसी नाम से लिखकर दे दी। इस पर लोगों का जबरदस्त रिएक्शन देखने को मिला। इसी से मुझे पहचान भी मिली।
पिता नहीं चाहते थे मैं गीतकार बनूं
बनारस छोड़कर मुंबई पहुंचने के सवाल पर उन्होंने बताया कि पिताजी लाला जी पांडेय ने 17 साल के लंबे संघर्ष के बाद सफलता हासिल की थी। उन्होंने मुझे बोला था सबकुछ करना लेकिन गीतकार बनने की कोशिश मत करना। पढ़ाई के बाद मेरी सरकारी बैंक में जॉब भी लग गई। इस बीच मेरा शौक परवान चढ़ रहा था। मैं सोचने पर मजबूर हो गया कि मैं बैंक में क्या कर रहा हूं? फिर मैंने जॉब छोड़ दी। इसके बाद सीधे मुंबई के लिए निकल गया।
आखिर पिता ने ही सिखाईं बारीकियां
अनजान बताते हैं कि जब मैं मुंबई से अपने घर आया तो मां ने मेरी हालत देखकर पिताजी को मुंबई में खत लिखा कि बेटा मुंबई में बहुत संघर्ष कर रहा है। पिताजी को इसकी जानकारी नहीं थी। खोज खबर ली और कुछ रिश्तेदार मुझे उनके पास ले गए। उन्होंने मुझसे कई सवाल पूछे। वह समझ गए थे कि मैं मुंबई छोड़कर जाने वाला नही हूं। इसके बाद मुझे उन्होंने अपने पास रहने के लिए बुला लिया। उन्होंने संगीत लाइन की कई बारीकियों को सिखाया और समझाया। फिर कुछ दिन बाद एक ऐसा मोड़ आया कि पिताजी खुद बोले कि अब तुम तैयार हो जाओ, आकाश तुम्हारा है।
सर्वाधिक गीत लिखने का रिकॉर्ड
1983 से फिल्मों के गीत लिख रहे अनजान बताते हैं कि सबसे ज्यादा गीत लिखने का अवॉर्ड उनके नाम है। करीब 5 हजार गीत लिख चुका हूं। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज है। मोहम्मद रफी साहब को छोड़कर करीब-करीब सभी प्रमुख गायक-गायिकाएं मेरे लिखे गाने गा चुके हैं। मैं आज फिल्मी दुनिया की चौथी पीढ़ी के साथ काम कर रहा हूं। हर पीढ़ी के हिसाब से मैं खुद को बदलते आया हूं। मैंने खुद को हर समय अपडेट किया। ‘साजन’, ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘कुछ कुछ होता है’, जैसी कई अहम फिल्मों के गीत मेरे लिए खास हैं।