रुंधे गले से 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गाकर भाई प्रसून ने दी पीयूष पांडे को आखिरी विदाई, ये दिग्गज रहे मौजूद
Piyush Pandey Funeral: विज्ञापन जगत के दिग्गज और एडगुरु के नाम से मशहूर पीयूष पांडे का शुक्रवार को निधन हो गया। शनिवार को उनके अंतिम संस्कार में इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज शामिल हुए। भाई प्रसून ने रुंधे गले से 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गाया।
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'शर्मा की दुल्हिन जो ब्याह के आई', 'हर घर कुछ कहता है', 'एमपी गजब है' और 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' जैसे चर्चित विज्ञापनों की लाइनों को रचने वाले एडगुरु पीयूष पांडे नहीं रहे। कल शनिवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। पीयूष पांडे के अंतिम संस्कार में अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन से लेकर इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज शामिल हुए। भाई को आखिरी विदा देते हुए जब प्रसून पांडे ने रुंधे गले के साथ 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गुनगुनाया तो हर किसी की आंखें छलक आईं।
नम आंखों के साथ दी गई पीयूष पांडे को आखिरी विदाई
अंग्रेजीदां प्रभाव वाले विज्ञापन जगत में पीयूष पांडे ने भारतीय देसी भाषाओं की मिठास को शामिल किया। भारतीय मिट्टी की महक जोड़ी और संस्कृति व परंपराओं को जोड़ा। सही मायनों में विज्ञापन आने पर रिमोट का बटन दबाकर चैनल बदल देने वाले दर्शकों को उन्होंने दिलचस्पी के साथ विज्ञापन देखना सिखाया। ऐसे दिग्गज को जब लोग आखिरी विदा देने एकत्र हुए तो आंखें भर आईं। प्रसून पांडे ने जब रुंधे गले के साथ भाई के लिए 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गाया तो लोग फफक-फफक कर रो पड़े। यह सभी के लिए भावुक कर देने वाला पल था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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संक्रमण से पीड़ित थे पीयूष पांडे
फेविकोल, कैडबरी और एशियन पेंट्स जैसे चर्चित विज्ञापनों को डिजाइन करने वाले पीयूष पांडे 70 वर्ष के थे। उन्होंने ही 90 के दशक में मशहूर गीत मिले सुर मेरा तुम्हारा लिखा था। पीयूष पांडे संक्रमण से पीड़ित थे। पीयूष पांडे लगभग चार दशकों से विज्ञापन उद्योग में कार्यरत थे। वे ओगिल्वी के विश्वव्यापी मुख्य रचनात्मक अधिकारी और भारत में कार्यकारी अध्यक्ष थे। पांडे 1982 में ओगिल्वी से जुड़े और उन्होंने अपना पहला विज्ञापन सनलाइट डिटर्जेंट के लिए लिखा। छह साल बाद, वे कंपनी के क्रिएटिव विभाग में शामिल हो गए और फेविकोल, कैडबरी, एशियन पेंट्स, लूना मोपेड, फॉर्च्यून ऑयल और कई अन्य ब्रांडों के लिए उल्लेखनीय विज्ञापन बनाए।
पद्मश्री से सम्मानित थे एडगुरु
पीयूष पांडे ने भारतीय विज्ञापन जगत में विभिन्न ब्रांड्स के लिए क्या स्वाद है जिंदगी में, मिले सुर मेरा तुम्हारा, अबकी बार मोदी सरकार, दो बूंद जिंदगी की, एमपी गजब है, ठंडा मतलब कोका-कोला, बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर, हमारा बजाज, हर घर कुछ कहता है, भाई, हच है ना! जैसे कई आइकॉनिक लाइन्स दिए। ये लाइन्स हर किसी की जुबान पर चढ़ गए और उनसे जुड़े उत्पादों को घर-घर में पहचान मिली। उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया को एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में 12 वर्षों तक नंबर एक एजेंसी का दर्जा दिया गया। पांडे ने कई पुरस्कार जीते हैं। 2016 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।
फिल्म जगत में किया था काम
पांडे ने अभिनय में भी कदम रखा और 2013 में जॉन अब्राहम अभिनीत फिल्म "मद्रास कैफे" और मैजिक पेंसिल प्रोजेक्ट वीडियोज (आईसीआईसीआई बैंक की ओर से चलाया गया एक मार्केटिंग अभियान) में काम किया। पांडे ने "मिले सुर मेरा तुम्हारा" गीत लिखा था। यह गीत 90 के दशक में देश में राष्ट्रीय एकता और विविधता बढ़ावा देने वाला एक कालजयी गीत था, जो टेलीविजन के जरिए घर-घर तक पहुंच गया था। पांडे ने चर्चित फिल्म 'भोपाल एक्सप्रेस' की पटकथा भी लिखी थी।