Saira Banu: आजादी के पर्व पर सायरा बानो को याद आए दिलीप कुमार, पूरा किस्सा साझा कर बोलीं- वे सच्चे देशभक्त थे
आज 15 अगस्त पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सायरा बानो ने अपने दिवंगत पति व अभिनेता दिलीप कुमार को याद किया है। उनका कहना है कि वे सच्चे देशभक्ति थे। उन्होंने अपनी कला और सामाजिक कार्यों से लोगों की हमेशा सेवा की।
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अभिनेत्री सायरा बानो अक्सर सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करती हैं। कोई भी त्योहार और खास मौका हो उनकी पोस्ट में साहब यानी अभिनेता दिलीप कुमार का जिक्र जरूर होता है। आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिग्गज अभिनेत्री ने एक पोस्ट साझा की है, इसमें भी वे दिलीप कुमार को याद करती नजर आई हैं। साथ ही उन्होंने कुछ पुरानी फिल्मी झलकियां भी शेयर की हैं। आइए देखते हैं...
'विदेश में पली-बढ़ी पर दिल से देसी हूं'
अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट साझा किया है। इसमें एक वीडियो है, जिसमें फिल्म 'नया दौर' का गाना 'ये देश है वीर जवानों का' और 1986 की फिल्म 'कर्मा' की झलकियां हैं। इसके साथ सायरा बानो ने लिखा है, 'कई बार मैं ठहरकर सोचने लगती हूं कि मेरे लिए यह सफर कैसे शुरू हुआ और आज यह सफर मुझे कितनी दूर ले आया है। मैं एक अंग्रेजी समाज में पली-बढ़ी हूं, लेकिन मेरा दिल हमेशा से ही अपनी खूबसूरत मातृभूमि भारत से जुड़ा रहा है। चाहे फिर वह अदब की बात हो, जो मुझे और सुल्तान भाई को अप्पाजी ने बड़े ही प्यार और सलीके से सिखाई। या फिर यहां के लजीज व्यंजन हों, जिन्हें मैंने खूब स्वाद से खाया है। मैं हमेशा अपनी मातृभूमि की परंपराओं की ओर आकर्षित रही हूं, चाहे फिर कभी इससे मीलों दूर से ही क्यों न रही हूं, यह हमेशा याद रही'।
'साहब जैसा देशभक्त नहीं देखा'
सायरा बानो आगे लिखती है, 'अब जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे एहसास होता है और सबकुछ समझ में आता है। ईश्वर बखूबी यह जानते हैं कि हम कहां से जुड़े हैं और मेरे लिए इसका मतलब था अपने पति के रूप में ऊपर वाले का सबसे बड़ा आशीर्वाद पाना। मेरे प्यारे पति बेहद 'देसी' व्यक्ति थे। उनकी बराबर मैंने कोई ऐसा नहीं देखा। वे अपनी जड़ों से इतनी गहराई से जुड़े थे कि इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता'।
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'दिलीप कुमार ने बखूबी समझे आजादी के मायने'
अभिनेत्री ने आगे कहा, 'दिलीप साहब एक सच्चे देशभक्त थे, जिन्होंने न सिर्फ अपनी कला के जरिए सेवा की, बल्कि अपने उदार धर्मार्थ कार्यों के जरिए भी लोगों को अपना सब कुछ दिया। उन्हें जानने का सौभाग्य पाने वाले सभी लोग उनसे प्यार करते थे। हमारे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू साहब, अटल बिहारी वाजपेयी साहब और नरसिम्हा राव साहब जैसे प्रिय मित्रों से लेकर हमारे समय के प्रमुख वकीलों, अर्थशास्त्रियों और उद्योगपतियों तक सबका स्नेह उन्हें प्राप्त हुआ। अपने पूरे जीवन में, दिलीप साहब ने कुछ आदर्शों को बनाए रखा और आज भी मैं इस बात से हैरान हूँ कि उन्होंने यह सब कैसे किया? मुझे लगता है कि उन्होंने यह बात समझी कि सच्ची आजादी सिर्फ अधिकार नहीं है, बल्कि उस भूमि को वापस कुछ लौटाने की जिम्मेदारी भी है, जिसने हमारे कार्यों का भार उठाया है। लोगों का उत्थान करना हमारा धर्म है'।